Mulayam Singh की Ex बहू के नए पति BJP नेता Gaurav Chaudhary की पहली पत्नी कौन थी? क्यों हुआ था तलाक?

Mulayam Singh Ex Bahu Monika Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर है। मुलायम सिंह यादव के भतीजे और सपा सांसद धर्मेंद्र यादव की पूर्व पत्नी मोनिका यादव (फर्रुखाबाद जिला पंचायत अध्यक्ष) ने 28 मई 2026 को बीजेपी नेता गौरव चौधरी (मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष) से शादी कर ली।

दोनों ने हिमाचल प्रदेश में बेहद निजी और सादा समारोह में परिणय सूत्र बांधे। यह शादी इसलिए चर्चा में है क्योंकि दोनों तलाकशुदा हैं, दोनों जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और दोनों अलग-अलग राजनीतिक परिवारों से आते हैं। दोनों के जीवन की ये नई शुरुआत है। इस बीच चर्चा है कि जर्मनी में बसा-बसाया व्यापार छोड़कर मेरठ की सियासी भूमि में उतने वाले गौरव चौधरी की पहली पत्नी कौन थी और क्यों हुआ था तलाक?

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पहले जानते हैं दूसरी पत्नी मोनिका यादव के बारे में...

Mulayam Singh के करीबी की बेटी बनी भतीजे की दुल्हन, फिर Ex बहू

मोनिका यादव मूल रूप से फर्रुखाबाद की रहने वाली हैं। उनके पिता नरेंद्र सिंह यादव मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी रहे। नरेंद्र सिंह यादव छह बार विधायक चुने गए (1993 से 2017 तक) और मुलायम सरकार में मंत्री भी रहे। अखिलेश यादव की सरकार में वे गृह सुरक्षा, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री रहे।

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2005 में मुलायम सिंह यादव की पैरवी से मोनिका की शादी मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव (Dharmendra Yadav) से हुई। यह रिश्ता समाजवादी परिवार को और मजबूत बनाने वाला माना गया। शादी के बाद शुरू में सब ठीक रहा, लेकिन पंचायत चुनावों में मोनिका की हार के बाद रिश्तों में दरार आई। दोनों का तलाक हो गया। मोनिका बीएससी पास हैं और राजनीति में सक्रिय रहीं। तलाक के बाद मोनिका ने सपा से दूरी बनाई और 2021 में बीजेपी जॉइन कर ली। पंचायत चुनाव लड़ा और वे अब फर्रुखाबाद जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।

Mulayam Singh के कैसे करीबी बने नरेंद्र सिंह?

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नरेंद्र सिंह यादव और मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक नजदीकियां समाजवादी राजनीति के दौर में मजबूत हुईं। हालांकि नरेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर की थी, लेकिन बाद में उन्होंने समाजवादी विचारधारा को अपनाया और मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सक्रिय राजनीति करने लगे। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद वे पार्टी से जुड़े और जल्द ही मुलायम सिंह के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए।

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उनकी संगठनात्मक क्षमता, जमीनी पकड़ और लगातार चुनावी सफलता ने मुलायम सिंह का विश्वास और मजबूत किया। नरेंद्र सिंह यादव कई बार विधायक चुने गए और मुलायम सिंह यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने। पार्टी और सरकार में उनकी सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यही वजह रही कि वे लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के करीबी सहयोगियों में गिने जाते रहे और समाजवादी पार्टी की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा बने।

Who Is Gaurav Chaudhary: जर्मनी से मेरठ तक की यात्रा

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गौरव चौधरी मेरठ जिले के कुशेड़ी गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता महकार सिंह (मेहकर चौधरी) मत्स्य विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। परिवार राजनीति और पंचायती राज से गहरा जुड़ा हुआ है - चाचा-चाची प्रधान और जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं।

गौरव की प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल हॉस्टल में हुई। 19 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ा और जर्मनी के एरलांगेन विश्वविद्यालय में Bachelor of International Business की पढ़ाई की। इसके बाद फ्रैंकफर्ट में उन्होंने होटल व्यवसाय और प्रॉपर्टी कारोबार शुरू किया। 14 साल तक जर्मनी में रहे और सफल उद्यमी बने।

2021 में 33 साल की उम्र में गौरव भारत लौटे। पीएम मोदी और चाचा योगेंद्र कुसैड़ी (BJP किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष) से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा। पंचायत चुनाव में वार्ड 18 से उन्होंने जीत हासिल की और मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए। वे गांवों में शिक्षा, विकास और मानसिकता बदलने पर जोर देते हैं। उनका नारा था कि विकास किया है, विकास करेंगे; जन-जन का सम्मान करेंगे। उन्होंने बाबा के नाम पर कर्मयोगी भीम सिंह मेमोरियल ट्रस्ट चलाया, जिसके जरिए गरीब बच्चों को किताबें, कपड़े और मदद पहुंचाई जाती है।

Gaurav Chaudhary की पहली पत्नी कौन? तलाक क्यों हुआ?

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गौरव चौधरी की पहली शादी 2014 में मोनिका चौधरी (जर्मनी में बसी) से हुई थी। दोनों की एक बेटी सोफिया है, जो फिलहाल साढ़े तीन-चार साल की है। तलाक का सटीक कारण सामने नहीं आया। हालांकि, जब गौरव 2021 में भारत वापस आए तो उनकी पत्नी जर्मनी में ही रहीं। गौरव ने जर्मनी का सफल व्यवसाय छोड़कर भारत में राजनीति और सामाजिक कार्य चुना। पत्नी विदेशी जीवनशैली और व्यवसाय को जारी रखना चाहती थीं। यह तलाक आपसी सहमति से हुआ माना जाता है। कोई बड़ा सार्वजनिक विवाद या आरोप-प्रत्यारोप सामने नहीं आया। उन्होंने जर्मनी का 14 साल का जीवन पीछे छोड़ दिया और मेरठ में नई शुरुआत की।

नई शुरुआत की उम्मीद

मोनिका यादव और गौरव चौधरी की शादी UP की सियासत में एक सकारात्मक खबर है। जहां अक्सर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं, वहां दो तलाकशुदा व्यक्तियों का नया जीवन साथ शुरू करना प्रेरणादायक है।

गौरव की पहली पत्नी जर्मनी से संबंधित थीं और तलाक जीवनशैली के अंतर के कारण हो सकता है। कोई कड़वाहट सार्वजनिक नहीं हुई। अब दोनों नई जिंदगी, राजनीति और परिवार को संभालते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

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