धारा-370 को हटाए जाने की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज ने क्या कहा?
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक कुमार गांगुली ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त करना जाहिर तौर पर असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने का निर्णय अस्थायी और संक्रमणकालीन था, और इस तरह यह हमेशा के लिए नहीं रह सकता।

स्थायी प्रावधान 70 साल से ज्यादा समय तक चलता रहा
उन्होंने कहा कि अस्थायी प्रावधान 70 साल से ज्यादा समय तक चलता रहा, कितने लंबे समय तक इसे जारी रखा जाता? मैं नहीं कह सकता कि राजनीतिक रूप से यह सही कदम है या नहीं लेकिन लगता है कि यह असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर धारा 370 को निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है, तो यह एक गहरी जांच पर एक अलग दृष्टिकोण ले सकता है, लेकिन स्पष्ट रूप से इसमें कोई असंवैधानिकता नहीं है।

अनुच्छेद 370 में विशेष दर्जा को वापस लेने का प्रावधान है
गांगुली ने कहा कि अनुच्छेद 370 (उप-अनुच्छेद 3) के तहत, इस विशेष दर्जा को वापस लेने का प्रावधान है। जिसे राष्ट्रपति राज्य विधानसभा के परामर्श से कर सकते हैं। दिसंबर 2008 से फरवरी 2012 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे गांगुली ने कहा, जम्मू कश्मीर में राज्य विधानसभा अभी मौजूद नहीं है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। पूरी राज्यसभा राष्ट्रपति में निहित है।

राष्ट्रपति के पुराने आदेश को बदला है
वहीं पूर्व अटार्नी जनरल सोली सोराबजी का मानना है कि (सरकार ने) कुछ भी क्रांतिकारी कदम नहीं उठाया गया है क्योंकि अब तक राज्य में लागू नहीं होने वाला कानून अब वहां पर लागू होगा। पूर्व सॉलिसीटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि यह बहुत जटिल कानूनी स्थिति है और मैंने इसका पूरा विश्लेषण नहीं किया है। ऐसा लगता है कि उसने (केंद्र) राष्ट्रपति के पुराने आदेश को बदला है।












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