Empuraan Controversy: मोहनलाल की एम्पुरान पर क्यों थम नहीं रहा सियासी विवाद, फसाद की जड़ में क्या है?
Empuraan Controversy: मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की बहुचर्चित फिल्म एम्पुरान (Empuraan) रिलीज की शुरुआत से ही भारी सियासी विवादों में घिरी हुई है। यह फिल्म 'लूसिफर' की सीक्वल है और शुरू में इसकी कहानी, निर्देशन और प्रस्तुति को लेकर काफी चर्चा हो रही थी, लेकिन अब यह राजनीतिक विवाद का मसला बन चुकी है।
इस फिल्म को लेकर उपजे विवाद ने इसे एक सिनेमा से ज्यादा सियासी मुद्दा बना दिया है। सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है कि एम्पुरान को लेकर इतना घमासान हो रही है? क्या यह विवाद फिल्म को हिट करवाने की प्रचार रणनीति का हिस्सा है या इसके पीछे गहरी राजनीतिक मंशा छिपी हुई है? क्योंकि, दक्षिणपंथी संगठनों का कहना है कि फिल्म हिंदू विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देती है, जबकि विपक्ष का कहना है कि सेंसर बोर्ड सरकार के दबाव में काम कर रहा है।

Empuraan Controversy: फिल्म एम्पुरान विवाद की जड़ में क्या है?
फिल्म एम्पुरान को लेकर हिंदू संगठनों और राष्ट्रवादी समूहों का आरोप है कि इसके माध्यम से हिंदुत्व को बदनाम करने और 2002 के गुजरात दंगों को संदर्भित करके 'राष्ट्र-विरोधी' नैरेटिव गढ़ने का प्रयास किया गया है।
इसके चलते, सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म में 17 कट्स लगाने के सुझाव दिए हैं। यही नहीं, बढ़ते विरोध के बाद अभिनेता मोहनलाल ने भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि वे अपने फैंस को आहत नहीं करना चाहते।
उन्होंने माना है कि फिल्म के कुछ हिस्सों को लेकर भारी असहमति है और दर्शकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इन हिस्सों को हटाने का निर्णय लिया गया। फिल्म के निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन ने भी मोहनलाल के बयान का समर्थन किया है और कहा कि उन्हें किसी भी तरह की राजनीति में घसीटना उचित नहीं है।
Empuraan row: राजनीतिक मोर्चे पर विवाद का असर
केरल में बीजेपी के नए-नवेले प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस विवाद को लेकर एक इंटरव्यू में कहा है कि जब खुद मोहनलाल ही अपनी फिल्म से खुश नहीं हैं, तो वे इसे देखने क्यों जाएं? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विवाद को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने और तूल दिया है।
वहीं, पिनाराई विजयन और कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी (BJP) और आरएसएस (RSS) पर आरोप लगाया है कि वे जबरदस्ती फिल्मकारों को अपने हिसाब से फिल्म में कांट-छांट करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। विजयन ने कहा कि फिल्म निर्माताओं को दबाव में आकर अपने रचनात्मक अधिकारों से समझौता नहीं करना चाहिए और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
विजयन के मुताबिक,'फिल्मकारों को अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। बीजेपी इस अधिकार को कुचलना चाहती है। यह लोकतंत्र के लिए घातक है।'
Empuraan Controversy: सेंसरशिप बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
यह विवाद एक बड़े सवाल को जन्म देता है कि क्या कला और सिनेमा को राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है? बीजेपी-विरोधियों के नजरिए से देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि फिल्म निर्माताओं पर हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़ी धारणा के कारण दबाव बनाया जा रहा है।
लेकिन, तथ्य यह है कि सेंसर बोर्ड का हस्तक्षेप, कलाकारों की माफी और राजनीतिक दलों के बीच जुबानी लड़ाई की वजह से यह महज एक फिल्मी विवाद मात्र नहीं रह गया, बल्कि एक गहरी वैचारिक संघर्ष बन गया है।
Empuraan row: क्या यह पब्लिसिटी स्टंट है?
लेकिन, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद पूरी तरह से पूर्व नियोजित प्रचार रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। क्योंकि यह एक आम प्रवृत्ति बन चुकी है कि जब किसी फिल्म को लेकर विवाद खड़ा होता है, तो उसकी टिकट बिक्री और व्यूअरशिप में उछाल देखा जाता है।
हालांकि, इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार करना मुश्किल है, क्योंकि जब किसी बड़े सुपरस्टार की फिल्म पर विवाद होता है, तो वह कलाकार के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को भी प्रभावित कर सकता है।
खासकर मोहनलाल जैसे दिग्गज अभिनेता के लिए यह विवाद निश्चित रूप से अनपेक्षित होगा, क्योंकि उन्होंने अपने चार दशक के करियर में शायद ही कभी इतने भारी राजनीतिक विरोध का सामना किया हो।
Empuraan Controversy: फसाद की जड़ में क्या है?
फिल्म एम्पुरान की टीम ने जिस तरह से आसानी से विवादास्पद हिस्सों को हटाने का फैसला किया है,इससे यह संदेश भी निकलता है कि फिल्म बनाने वालों को भी कहीं न कहीं यह महसूस हुआ है कि उन्होंने शायद ऐसे विवादित सीन्स जोड़े थे, जिससे कहानी की सच्चाई और इसकी मंशा को लेकर संदेह पैदा हो सकता है कि यह किसी सोची-समझी नैरेटिव का हिस्सा है। खासकर इस वजह से क्योंकि अगले साल की शुरुआत में ही केरल में विधानसभा चुनाव भी होने हैं।
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