विपक्षी एकता की पोल खोलने की हो चुकी है तैयारी? आपातकाल और RSS पर लिख दी गई है स्क्रिप्ट
बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ जिस तरह से दर्जन भर से ज्यादा विपक्षी पार्टियां गोलबंद हुई हैं, उसी दौरान आपातकाल की दौर पर प्रसार भारती के विशेषज्ञों की एक टीम ने एक व्यापक स्क्रिप्ट तैयार की है।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर गठित विशेषज्ञों की इस टीम का मुख्य फोकस आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आएसएस) और जनसंघ और उसी समय गुजरात में सफल हुए नव-निर्माण आंदोलन में नरेंद्र मोदी की भूमिका पर है।

आपातकाल का हथियार, कांग्रेस के खिलाफ भाजपा तैयार!
इसके मुताबिक इसी से प्रभावित होकर समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के विरोध में संपूर्ण क्रांति आंदोलन में छात्रों को जोड़ने के लिए प्रेरित हुए। सूत्रों के मुताबिक प्रसार भारती की एक टीम इस पर काम कर रही है, जिससे बीजेपी को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल सकता है।
विपक्ष को एकजुट करने में संघ और जनसंघ की भूमिका की चर्चा
इसके तहत यह बताने की कोशिश होगी कि आपातकाल के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने और जनता पार्टी के गठन में आरएएसएस और जनसंघ के बड़े नेताओं ने किस तरह से प्रमुख भूमिका निभाई। इसी की वजह से 1975 में देश पर आपातकाल थोपने के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से सफलतापूर्वक बेदखल कर दिया गया था।
नरेंद्र मोदी की तत्कालीन भूमिका को भी प्रमुखता
खास बात ये है कि प्रसार भारती की टीम की ओर से तैयार इस साहित्य (डॉक्यूमेंट्री के तौर पर इस्तेमाल होने की संभावना ) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दौर की भूमिका को खास प्रमुखता दी गई है। तब आरएसएस के स्वयं सेवक के तौर पर उन्होंने जेपी मूवमेंट के लिए गुजरात के युवाओं को गोलबंद करने में बहुत सक्रिय योगदान दिया था।
गुजरात नव-निर्माण आंदोलन में निभाई थी बड़ी भूमिका
इसमें जेपी और संघ की ओर से 1974 में मोदी के संगठनात्मक कौशल के जिक्र का संदर्भ भी शामिल किया गया है। तब नरेंद्र मोदी ने गुजरात नव-निर्माण आंदोलन के तहत सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदेश के युवाओं को जगाने में बहुत बड़ी भागीदारी निभाई थी।
आपातकाल के दौरान लोकतंत्र पर मंडराए खतरे को उजागर करेगा
जानकारी के मुताबिक इस अभियान के माध्यम से स्वदेशी आंदोलन में आरएसएस और जनसंघ की भूमिका को भी सामने लाया जाएगा। इससे मौजूदा कांग्रेस को इस रूप में चित्रित करना आसान हो सकता है, जिसने आपातकाल के माध्यम से लोकतंत्र का 'गला घोंटने' का काम किया।
विपक्षी दलों के विरोधाभास को किया जाएगा उजागर
इसके माध्यम से अभी के विपक्षी दलों के नेताओं के विरोधाभास को उजागर किया जा सकेगा। क्योंकि, एक वक्त जो जनता पार्टी के तहत भ्रष्टाचार और आपातकाल के खिलाफ कांग्रेस के विरोध में एकजुट हुए थे और उन्हें इसकी वजह से तत्कालीन इंदिरा सरकार की प्रताड़नाएं झेलनी पड़ीं थीं। उसी समाजवादी विचारधारा के लोग आज सबकुछ ताक पर रखकर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार हो गए हैं।
'जेपी और संघ ने तभी नरेंद्र मोदी की संगठन क्षमता को पहचाना था'
इसमें कहा गया है, 'गुजरात में छात्रों के नव-निर्माण आंदोलन ने देश का ध्यान खींचा और यहां तक कि जय प्रकाश नारायण भी इसके बुलावे पर 11 फरवरी को अहमदाबाद आए............अहमदाबाद में ही जय प्रकाश नारायण इंदिरा गांधी के विरोध में आंदोलन की अगुवाई करने के लिए राजी हुए.......यह वो समय था जब आरएसएस और जय प्रकाश नारायण ने जो तब एक राष्ट्रीय आइकन के रूप में उभरे थे, नरेंद्र मोदी की संगठन क्षमता को पहचाना था।'
देश में लोकतंत्र की फिर से बहाली की कहानी
इसमें राजनीतिक दलों की संघर्ष की उस कहानी को भी दिखाया जाएगा, जिन्होंने इंदिरा गांधी के सामने झुकने से इनकार कर दिया था; और साथ ही यह भी दिखाया जाएगा कि संघ और इसके नेताओं ने किस तरह से विपक्षी एकता के सूत्रधार की भूमिका निभायी थी, जिनकी वजह से देश में आखिरकार लोकतंत्र फिर से स्थापित हो सका था।












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