बम की धमकी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग के बाद विमान के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
मुंबई से लंदन जा रही एयरइंडिया की फ्लाइट में बम की धमकी के बाद विमान को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर इमर्जेंसी लैंडिंग करवाई गईह। बोइंग 777-300ER की तरफ से ऑपरेट की जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI129 ने यूनाइटेड किंगडम के पास पहुंचते समय स्क्वाक कोड 7700 के साथ आपातकाल की घोषणा की है। आइए जानते हैं बम की सूचना या धमकी पर इमर्जेंसी लैंडिंग के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
जब किसी विमान को उड़ान के दौरान बम की धमकी मिलती है, तो तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग कराई जाती है। पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को स्थिति की जानकारी देकर विमान को निकटतम हवाई अड्डे पर उतारने का निर्णय लेता है। जैसे ही विमान लैंड करता है, उसे हवाई पट्टी से एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से अन्य विमानों या लोगों को खतरा न हो।

विमान के जमीन पर उतरते ही हवाई अड्डे पर सुरक्षा एजेंसियों की एक टीम सक्रिय हो जाती है। बम निरोधक दस्ते, स्नीफर डॉग्स, और एक्सपर्ट्स की टीम पूरे विमान की बारीकी से जांच करती है। सभी यात्रियों को विमान से निकालकर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है, और उनके सामान की भी जांच की जाती है।
जांच प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां हर छोटी से छोटी चीज की तहकीकात करती हैं ताकि किसी भी विस्फोटक सामग्री का खतरा पूरी तरह से समाप्त हो सके। यदि किसी प्रकार का कोई विस्फोटक पदार्थ नहीं मिलता, तो इसे 'फॉल्स अलार्म' घोषित किया जाता है।
फॉल्स अलार्म की पुष्टि के बाद विमान को उड़ान के लिए अनुमति दी जाती है, लेकिन इससे पहले विमान की पूरी तरह से तकनीकी जांच भी की जाती है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। इस प्रक्रिया में कई घंटे से लेकर एक दिन भी लग सकता है, और फिर सुरक्षा विभाग की हरी झंडी मिलने के बाद ही विमान को दोबारा उड़ान की मंजूरी दी जाती है।












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