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वाराणसी ही नहीं, इस सीट पर भी है पीएम मोदी की नजर! क्या दक्षिण में बदलेगा 2024 का चुनावी गणित

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही तेलंगाना का राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। लोकसभा चुनाव में अब 6 महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में नई चुनावी रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। सभी प्रमुख पार्टियां चाहे वो कांग्रेस हो, बीआरएस या भाजपा सत्ता के लिए नए पैंतरे अपना रहे हैं।

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित कांग्रेस की नजरें लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में जीत पर टिकी हैं। जबकि बीआरएस अपनी वापसी के लिए रणनीति हैयार कर रही है। दूसरी ओर दक्षिण भारत की सत्ता से बाहर भाजपा ने राज्य में प्रभावशाली कदम उठाए हैं।

PM Modi

तेलंगाना में विधानसभा की लड़ाई के समाप्त होने के बाद, सभी राजनीतिक दल अब अपना ध्यान आनेवाले लोकसभा चुनावों पर केंद्रित कर रही हैं। अंदर की खबर के अनुसार, इसी सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक नई रणनीतिक योजना तैयार की है।

2019 के आम चुनावों में चार लोकसभा सीटें हासिल करने के बाद, बीजेपी ने हाल ही में विधानसभा चुनावों के दौरान आठ सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, तेलंगाना में भाजपा की स्थिति बेहद खराब थी पर उसके पर्सनल वोट बैंक में इजाफा हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव में 4 सीटें पाने वाली भाजपा ने इस बार 8 सीटों पर कब्जा जमाया है। जिसके बाद भाजपा आलाकमान ने रणनीतिक रूप से तेलंगाना पर अपना विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उनका लक्ष्य तेलंगाना को अपने गढ़ के रूप में परिवर्तित कर पूरे दक्षिण भारत में अपनी पार्टी को प्रभावशाली बनाना है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार बीजेपी आलाकमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तेलंगाना की मल्काजगिरी लोकसभा सीट से मैदान में उतारने पर विचार कर रही है। पार्टी को उम्मीद है कि तेलंगाना में मोदी की उम्मीदवारी से उनकी स्थिति मजबूत होगी। जिससे दक्षिण भारत में पार्टी की नींव मजबूत में भी मजबूती आएगी।

हालांकि, पिछली बार भी पीएम मोदी के तमिलनाडु से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज थी लेकिन अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वर्तमान में, भाजपा के पास दक्षिणी राज्यों में कोई पावर नहीं है। यदि पीएम मोदी से जुड़ी यह रणनीति सफल साबित होती है, तो भाजपा के भीतर राजनीतिक गतिशीलता दक्षिणी क्षेत्र में उनके पक्ष में हो सकती है।

मल्काजगिरि में सभी राज्यों के निवासियों के होने के कारण इसे मतदाताओं के मामले में सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है। 2019 में, तेलंगाना के वर्तमान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मल्काजगिरि लोकसभा सीट पर जीत हासिल की। उनके इस्तीफे के बादा अब यह सीट खाली है।

मल्काजगिरी निर्वाचन क्षेत्र में पीएम मोदी को मैदान में उतारने के भाजपा के रणनीतिक निर्णय के साथ, राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं। कथित तौर पर अन्य राजनीतिक गुटों, विशेषकर बीआरएस के नेता लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। भाजपा का ध्यान खम्मम, नलगोंडा, भोंगीर और महबूबाबाद को छोड़कर तेलंगाना के सभी 13 लोकसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है।

यह रणनीतिक दृष्टिकोण भाजपा को बीआरएस के एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करता है। मोदी को मल्काजगिरी से उम्मीदवार के रूप में उतार कर भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस और बीआरएस दोनों के लिए चुनौतियां पैदा करना है। भाजपा आलाकमान की ओर से इसे लेकर जल्द ही आधिकारिक बयान जारी होने की उम्मीद है।

(तेलंगाना से वनइंडिया तेलुगु के सह-संपादक कन्नैया आई के इनपुट पर आधारित)

यह देखें: तेलंगाना सरकार ने भूमि विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम, विशेष पैनल गठित करने के निर्देश

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