गुजरात चुनाव तारीखों पर घिरा आयोग, RTI में हुआ ये बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोति ने गुजरात चुनावों की तारीख में देरी के पीछे कारण बाढ़ राहत बताया था। जो कि अब चुनाव आयोग के लिए मुसीबत बनती जा रही है। द इंडियन एक्सप्रेस में इस मामले पर एक खबर छपी है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी सामने आया कि आयोग ने बाढ़ राहत कार्यों की वजह से गुजरात में थोड़ी देर से चुनाव कराने का फैसला किया था।

चुनाव आचार संहिता के कारण बाढ़ राहत कार्य प्रभावित न हों

चुनाव आचार संहिता के कारण बाढ़ राहत कार्य प्रभावित न हों

चुनाव आयोग ने आरटीआई में बताया कि अक्टूबर में गुजरात के मुख्य सचिव ने एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने आग्रह किया था कि विधानसभा चुनाव की तारीखें आगे बढ़ाई जाएं ताकि चुनाव आचार संहिता के कारण बाढ़ राहत कार्य प्रभावित न हों। अक्टूबर की 12 तारीख को हिमाचल प्रदेश की चुनाव तारीखें घोषित करते समय मुख्य निर्वाचन आयुक्त एके जोति ने दलील दी थी कि हमें उनकी ओर से (गुजरात सरकार) एक प्रतिनिधि मिला था। उन्होंने कहा था कि गुजरात में जुलाई में भारी बाढ़ आई और सितंबर से राहत कार्य शुरू हो पाए। आचार सहिंता के चलते राहत काम प्रभावित होगा। इसलिए गुजरात सरकार ने काम को पूरा करने के लिए समय मांगा था।

तारीखें आगे बढ़ाने की मांग सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गई

तारीखें आगे बढ़ाने की मांग सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गई

यह मांग सत्तारूढ़ दल के पक्ष में गई। इस दौरान कई वित्तीय की घोषणा की गई, राज्य में बड़ी-बड़ी परियोजनाएं शुरू की गईं और कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने चुनाव रैलियों को संबोधित करने की यात्रा की। अखबार ने आरटीआई के द्वारा जानकारी पर सवाल पूछा कि जब गुजरात की तरह ही 2014 में जम्मू-कश्मीर बाढ़ से जूझ रहा था तो आयोग ने वहां विधानसभा चुनाव की तारीखें आगे खिसकाने में रुचि क्यों नहीं दिखाई? चुनाव आयोग ने बाढ़ आने तीन महीने बाद ही चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया था।

 2014 में आई बाढ़ में 300 लोगों की मौत हो गई थी

2014 में आई बाढ़ में 300 लोगों की मौत हो गई थी

जम्मू कश्मीर में अक्टूबर 2014 में आई सदी की सबसे भंयकर बाढ़ में 300 लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त वी एस संपत ने इन सब चीजों को दरकिनार कर पांच चरणों में चुनाव करवाने का घोषणा कर दी। लेकिन इसके बावजूद आयोग ने चुनाव तारीखें नहीं टालीं। हालांकि बाढ़ राहत कार्यों को चुनाव आचार संहिता के दायरे से बाहर जरूर रखा। यानी चुनाव के दौरान भी तत्कालीन सरकार को बाढ़ रहत कार्य पहले की तरह करते रहने की इजाजत दी थी। इस दौरान राज्य में रिकॉर्ड 65 फीसदी मतदान हुई जो कि पिछले 25 सालों में सबसे अधिक था।

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