Video: चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या? खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया
Election Commission Press conference: चुनाव आयोग ने बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने कहा कि यह आरोप न सिर्फ निराधार हैं बल्कि भारतीय संविधान का भी अपमान है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि चुनाव आयोग और देश का मतदाता किसी भी तरह की सस्ती राजनीति से डरने वाला नहीं है।
इसी बीच में चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती इन दिनों AI और डीपफेक की है। CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आज के समय में चुनाव आयोग के सामने वास्तविक चुनौती AI और डीपफेक है।

ज्ञानेश कुमार बोले- AI और डीपफेक सचमुच गंभीर चुनौती हैं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बोले, "AI और डीपफेक सचमुच गंभीर और असली चुनौतियां हैं। एक ट्विटर हैंडल पर एआई द्वारा तैयार किया गया एक वीडियो वायरल हुआ, जो सच्चाई से कोसों दूर था और पूरी तरह झूठा था। चुनाव आयोग इन चुनौतियों से निपटने की पूरी कोशिश करेगा, लेकिन हम कानून के दायरे में रहकर ही काम कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि एआई और डीपफेक हमारे लिए एक चुनौती है इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने हर जिले के लिए अलग वेबसाइट भी बनाई है ताकि लोग चुनावी जानकारी और शिकायतों तक आसानी से पहुंच सकें।
साफ है कि अब चुनाव आयोग केवल वोटर लिस्ट सुधार पर ही नहीं, बल्कि AI और डीपफेक जैसी डिजिटल चुनौतियों से निपटने की तैयारी में भी जुटा है।
चुनाव आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें
🔹 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष के आरोपों पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि वोट चोरी जैसी बातें जनता को गुमराह करने की कोशिश हैं और यह भारतीय संविधान का अपमान है। उन्होंने साफ किया कि चुनाव आयोग और बिहार के 7 करोड़ से ज्यादा वोटर किसी भी झूठे आरोप से डरने वाले नहीं हैं।
🔹 राजनीतिक दलों की मांग पर शुरू हुआ SIR
CEC ज्ञानेश कुमार ने बताया कि लगभग सभी राजनीतिक दल पिछले लंबे समय से मतदाता सूची में सुधार की मांग कर रहे थे। इसी वजह से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें करीब 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA), जिन्हें राजनीतिक दलों ने नामित किया था, ने मिलकर वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट तैयार किया।
🔹 ज्ञानेश कुमार ने कहा- "यह चिंता का विषय है कि राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्ष और उनके द्वारा नामित BLO के सत्यापित दस्तावेज और रिपोर्ट या तो उनकी ही पार्टी के राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व तक नहीं पहुंच रहे, या फिर जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज कर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है। जबकि सच्चाई यह है कि हर स्तर पर सभी लोग ईमानदारी से काम कर रहे हैं ताकि बिहार में SIR पूरी तरह सफल हो सके।"
🔹 'वोट चोरी' कहना संविधान का अपमान
CEC ने कहा कि कानून के अनुसार, अगर वोटर लिस्ट में कोई गलती है तो उसे सुधारने का मौका समय पर दिया जाता है। चुनाव के बाद भी कोई आपत्ति हो तो 45 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा, "लेकिन जब यह सब न करके बाद में 'वोट चोरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल जनता को गुमराह करने के लिए किया जाता है, तो यह सीधे-सीधे भारतीय संविधान का अपमान है।"
🔹 मतदाताओं की तस्वीरें बिना सहमति के जारी करना गलत
CEC ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया में पेश की गईं। उन्होंने सवाल उठाया- "क्या चुनाव आयोग किसी मतदाता, उसकी मां, बहू या बेटी के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक कर सकता है? वोट केवल वही डालते हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल होता है।"
🔹 'आयोग डरता नहीं, हर मतदाता के साथ खड़ा है'
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ मतदाताओं ने डबल वोटिंग का आरोप लगाया, लेकिन जब सबूत मांगा गया तो कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, "झूठे आरोपों से न तो चुनाव आयोग डरता है और न ही कोई मतदाता। आयोग गरीब, अमीर, महिला, युवा, बुजुर्ग और हर वर्ग-धर्म के लोगों के साथ पहले भी खड़ा था, आज भी खड़ा है और आगे भी मजबूती से खड़ा रहेगा।"
🔹 राहुल गांधी को चुनौती
CEC के इस बयान को राहुल गांधी के हालिया आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल ने आरोप लगाया था कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर 'वोट चोरी' कर रहे हैं। इस पर चुनाव आयोग ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर राहुल गांधी के पास सबूत हैं तो 7 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करें, वरना पूरे देश से माफी मांगें।












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