Budget 2026: मोबाइल से बढ़ रही बच्चों में मानसिक बीमारी? Economic Survey में डिजिटल एडिक्शन पर चेतावनी
Budget 2026 Economic Survey: क्या आपके घर के बच्चे भी दिन भर इंस्टाग्राम रील्स या यूट्यूब शॉर्ट्स की दुनिया में खोए रहते हैं? यदि हां, तो सरकार अब आपकी इस चिंता को कानूनी रूप देने जा रही है। भारत सरकार ने बजट 2026 में बच्चों में बढ़ती 'डिजिटल लत' (Digital Addiction) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है।
साल 2026 के आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में इस बार केवल जीडीपी और वित्तीय आंकड़ों की ही चर्चा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य, यानी बच्चों की मानसिक सेहत पर सोशल मीडिया के पड़ते नकारात्मक प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।

सरकार ने सिफारिश की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अब 'एज-लिमिट' (उम्र सीमा) तय करना अनिवार्य होना चाहिए। इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में यह साफ कहा गया है कि कम उम्र में 'अनफिल्टर्ड कंटेंट' तक पहुँच बच्चों के व्यवहार, एकाग्रता और उनके जीवन के लक्ष्यों को प्रभावित कर रही है।
Economic Survey 2026 की 3 बड़ी सिफारिशें: जो बदल देंगी इंटरनेट की दुनिया
आर्थिक सर्वेक्षण में सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए तीन प्रमुख दिशा-निर्देश सुझाए हैं:
सख्त उम्र सत्यापन (Age Verification): सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक तय उम्र (संभवतः 13 या 15 वर्ष) से कम के बच्चे इन ऐप्स का इस्तेमाल न कर सकें।
डिफ़ॉल्ट सुरक्षित सेटिंग्स: यदि कोई किशोर (Teenager) सोशल मीडिया चलाता है, तो उसके ऐप की सेटिंग्स पहले से ही 'प्राइवेसी-फर्स्ट' होनी चाहिए, जिसे बच्चा खुद न बदल सके।
एल्गोरिदम में बदलाव: प्लेटफॉर्म्स को ऐसे एल्गोरिदम बनाने होंगे जो बच्चों को हिंसक, आपत्तिजनक या तनाव बढ़ाने वाला कंटेंट न दिखाएं।
Digital Addiction पर लगाम लगाने की क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
सर्वेक्षण के अनुसार, सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक 'मानसिक महामारी' का रूप ले रहा है। जानकारों का मानना है कि घंटों स्क्रीन पर बिताने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और ध्यान भटकने (ADHD जैसे लक्षण) की समस्या बढ़ रही है।
साइबर बुलिंग का खतरा मंडरा रहा है। इससे कम उम्र में बच्चे ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर बुलिंग का आसानी से शिकार हो जाते हैं। सोशल मीडिया की वजह से बच्चे खेलकूद और आउटडोर गतिविधियों से पूरी तरह कट गए हैं।
टेक कंपनियों की जवाबदेही तय होगी
सरकार का मानना है कि अब जिम्मेदारी केवल माता-पिता की नहीं हो सकती। टेक कंपनियों को ऐसे टूल विकसित करने होंगे जो यूजर्स की उम्र को सही तरीके से वेरिफाई कर सकें। कई विकसित देशों में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी या माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करने जैसे कानून बन चुके हैं, और भारत अब इसी वैश्विक राह पर चलने की तैयारी में है।
चुनौतियां और माता-पिता की भूमिका
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती बच्चों द्वारा 'गलत उम्र' बताकर अकाउंट बनाना है। इसके लिए स्कूलों में 'डिजिटल साक्षरता' बढ़ाना और घर पर माता-पिता द्वारा 'स्क्रीन टाइम' के सख्त नियम बनाना जरूरी है। बहुत ज्यादा सख्ती बच्चों को अनजान या डार्क वेब ऐप्स की तरफ धकेल सकती है, इसलिए विशेषज्ञ 'संतुल' (ना पूरी छूट, ना पूरी पाबंदी) की सलाह दे रहे हैं।












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