Farmers Protest: किसानों के दिल्ली कूच के बीच नई रणनीति, पंजाब में कल 12 बजे से 4 बजे तक 'रेल रोको' का ऐलान

Farmers Protest News: राजधानी दिल्ली सहित हरियाणा के पंजाब बॉर्डर इलाकों में किसान आंदोलन का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। किसानों का 13 फरवरी को शंभू बॉर्डर से दिल्ली में दाखिल होने का प्रयास विफल रहा। पुलिस ने किसानों को शंभू बॉर्डर से आगे नहीं बढ़ने दिया। इसके बाद अब किसानों ने अपनी रणनीति को लेकर नया ऐलान किया है।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और ऋण माफी पर कानून सहित कई मांगों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए 'दिल्ली चलो' आंदोलन का ऐलान किया है, जिसका आज दूसरा दिन है।

Farmers protest

इस बीच अब दिल्ली कूच नहीं कर पा रहे किसानों ने पंजाब में रेलवे ट्रैक जाम करने की तैयारी कर ली है। किसानों ने 15 फरवरी को पंजाब में रेलवे ट्रैक जाम करने का ऐलान कर दिया है।

दरअसल, जालंधर में पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन उग्रहा की बैठक हुई, जिसकी जानकारी देते हुएजोगिंदर सिंह उग्रहा ने जानकारी दी कि संगठन 'रेल रोको' का फैसला किया गया है।

ऐसे में उग्रहा गुरुवार (15 फरवरी) को पंजाब में दोपहर 12 बजे से शाम के 4 बजे तक रेलवे ट्रैक जाम करने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोकने और उनके आंसू गैस के गोले छोड़ने के साथ लाठीचार्ज से नाराजगी के चलते यह फैसला किया है।

बताया जा रहा है कि पंजाब की 7 जगहों पर दोपहर 12:00 से शाम 4:00 तक रेलवे ट्रैक जाम किया जाएगा। इधर, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बुधवार को कहा कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित अपनी मांगों पर केंद्र के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। दल्लेवाल ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने बयान में कहा है कि केंद्र बातचीत के लिए तैयार है और किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए भी तैयार है।

जानिए किसानों की क्या हैं मांगे?

आपको बता दें कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी के अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की भी मांग कर रहे हैं।

वहीं भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए। विश्व व्यापार संगठन से हटना और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देना समेत अन्य मांगें शामिल हैं।

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