44 सेकंड और दुश्मन के बंकर तबाह! कितना खतरनाक है DRDO का नया Pinaka रॉकेट, चीन-पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन
Pinaka Long Range Guided Rocket: भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा ताकत को एक और बड़ा बूस्ट दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में Pinaka Long Range Guided Rocket का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण ने साबित किया कि भारत अब लंबी दूरी तक बेहद सटीक निशाना लगाने में और सक्षम हो रहा है।
पिनाका पहले से ही भारतीय सेना का भरोसेमंद मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। नए LRGR संस्करण के आने से इसकी मारक क्षमता और रेंज दोनों बढ़ गई हैं। आइए जानते हैं कि पिनाका LRGR कितना खतरनाक और खास है।

क्या है Pinaka LRGR और क्यों है खास?
Pinaka LRGR भारत का स्वदेशी गाइडेड रॉकेट सिस्टम है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) का उन्नत संस्करण है। इसकी सबसे बड़ी खासियत लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता है। हाल ही में हुए फ्लाइट टेस्ट में इसने तय लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ भेदा। इससे भारतीय सेना को युद्ध के दौरान दूर बैठे दुश्मन पर तेज और प्रभावी हमला करने की ताकत मिलेगी।
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आखिर कितना खतरनाक है पिनाका रॉकेट सिस्टम?
पिनाका की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज फायरिंग क्षमता है। यह सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है। एक बार की फायरिंग में यह लगभग 700×500 मीटर क्षेत्र को निशाना बना सकता है। गाइडेड तकनीक की वजह से यह तय लक्ष्य पर अधिक सटीकता से हमला करता है। यही कारण है कि इसे दुश्मन के ठिकानों, बंकरों और सैन्य ठिकानों को कम समय में भारी नुकसान पहुंचाने वाले हथियारों में गिना जाता है।
कितनी है इसकी रेंज और कौन-कौन से वेरिएंट हैं?
पिनाका सिस्टम समय के साथ लगातार अपग्रेड हुआ है। शुरुआती मॉडल की रेंज करीब 37.5 किलोमीटर थी, लेकिन अब इसके कई वेरिएंट मौजूद हैं। MK-I की रेंज 37-40 किमी, MK-I Enhanced की 45-60 किमी और MK-II की 60-75 किमी तक है। Guided Pinaka 75-90 किमी तक वार कर सकता है, जबकि नए LRGR-120 (MK-III) की मारक क्षमता 90 से 120 किलोमीटर तक पहुंच चुकी है।
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किन इलाकों में इस्तेमाल किया जा सकता है?
पिनाका को हर तरह के युद्धक्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसका इस्तेमाल रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में आसानी से किया जा सकता है। यह 8×8 हाई मोबिलिटी सैन्य ट्रक पर लगाया जाता है, जिससे इसे तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। फायरिंग के तुरंत बाद अपनी लोकेशन बदलने की क्षमता इसे दुश्मन के जवाबी हमले से भी काफी हद तक सुरक्षित बनाती है।
GPS गाइडेंस से कैसे बनता है और ज्यादा सटीक?
Pinaka LRGR में आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। GPS आधारित सिस्टम की मदद से यह उड़ान के दौरान अपने लक्ष्य तक सटीक तरीके से पहुंचता है। DRDO के अनुसार हालिया परीक्षण में रॉकेट ने "टेक्स्टबुक प्रिसिजन" के साथ लक्ष्य को भेदा। इसका मतलब है कि यह केवल लंबी दूरी तक ही नहीं बल्कि बेहद सटीक हमला करने में भी सक्षम है, जिससे युद्ध के दौरान सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
भगवान शिव के धनुष से क्या है पिनाका का संबंध?
'पिनाका' नाम भगवान शिव के दिव्य धनुष से लिया गया है। सनातन धर्मग्रंथों में पिनाका को बुराई के विनाश और शक्ति का प्रतीक माना गया है। इसी सोच के साथ भारत के इस स्वदेशी रॉकेट सिस्टम का नाम भी पिनाका रखा गया। यह नाम केवल धार्मिक महत्व ही नहीं दर्शाता, बल्कि दुश्मन के खिलाफ मजबूत और प्रभावी सैन्य शक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। इस वजह से यह नाम लोगों के बीच खास पहचान रखता है।
भारतीय सेना और रक्षा निर्यात के लिए क्यों है अहम?
पिनाका केवल भारतीय सेना की ताकत नहीं बढ़ा रहा, बल्कि भारत के रक्षा निर्यात को भी नई पहचान दे रहा है। आर्मेनिया पहले ही इस सिस्टम को खरीद चुका है, जबकि फ्रांस समेत कई अन्य देशों ने इसमें रुचि दिखाई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हालिया सफल परीक्षण पर DRDO को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता को और मजबूत करेगी। इससे भारत की रक्षा तकनीक पर दुनिया का भरोसा भी बढ़ रहा है।












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