Wife Murder: 11 दिन तक पत्नी के बिस्तर पर छोड़ा कोबरा! गला घोंटा-हाथ में गाड़े दांत, पोस्टमॉर्टम से फंसा पति

Indore Shivani Pateriya Murder Case: 14 साल पहले शादी, दो बच्चे, बैंक में नौकरी और बाहर से देखने पर एक सामान्य परिवार। लेकिन इस घर के भीतर ऐसी साजिश पल रही थी, जिसने पूरे देश को चौंका दिया। दिल्ली वाली प्रेमिका के चक्कर में बैंक अधिकारी पति ने अपनी ही पत्नी की हत्या को नैचुरल मौत दिखाने की साजिश रची।

पति ने ऐसा प्लान बनाया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। वह इंदौर से करीब 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर पहुंचा, वहां से 30 हजार रुपये में जिंदा कोबरा खरीदा, 11 दिन तक उसे घर में छिपाकर रखा और फिर एक दिन पत्नी की हत्या के बाद उसी सांप का इस्तेमाल साक्ष्य मिटाने के लिए किया। लेकिन जिस कोबरा को उसने अपनी सबसे बड़ी ढाल बनाया था, वही पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच के सामने बेकसूर साबित हो गया। आखिरकार करीब साढ़े छह साल बाद अदालत ने आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा सुना दी। आइए विस्तार से जानते हैं कि पत्नी को अपने रास्ते से हटाने के लिए कैसी कैसी चाल पति ने चली ?

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Who Is Shivani Pateriya: कौन थीं शिवानी पटेरिया?

35 वर्षीय शिवानी पटेरिया इंदौर की रहने वाली थीं। उनकी शादी बैंक अधिकारी अमितेष उर्फ शालू पटेरिया से हुई थी। दोनों के दो बच्चे भी हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन समय के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में दरार बढ़ती गई। मायके पक्ष का आरोप था कि अमितेष का दूसरी महिला से संबंध था और वह शिवानी से छुटकारा चाहता था। दहेज को लेकर भी विवाद और प्रताड़ना के आरोप लगाए गए।

हत्या से पहले कैसे रची गई साजिश?

पुलिस जांच में सामने आया कि अमितेष ने हत्या का फैसला पहले ही कर लिया था। इसके लिए उसने राजस्थान के अलवर से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का विषैला कोबरा करीब 30 हजार रुपये में खरीदा। वह सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखता रहा ताकि सही समय पर उसका इस्तेमाल कर सके।

1 दिसंबर 2019... जब सामने आया खौफनाक सच

1 दिसंबर 2019 को शिवानी की तबीयत बिगड़ने की सूचना देकर उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल ले जाया गया। पति और उसके साथ मौजूद किरायेदार ने डॉक्टरों से कहा कि शिवानी की मौत सांप के डसने से हुई है।

उधर, घर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को कमरे में एक मरा हुआ कोबरा भी मिला। पहली नजर में मामला सर्पदंश का लग रहा था, लेकिन शिवानी के मायके वालों ने इसे हत्या बताते हुए जांच की मांग कर दी।

परिवार को पहले से था शक

शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने आरोप लगाया कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। उनका कहना था कि अमितेष पहले भी तलाक की कोशिश कर चुका था। वह दिल्ली की एक महिला के संपर्क में था और शिवानी को रास्ते से हटाना चाहता था। परिजनों का यह भी आरोप था कि घटना से पहले शिवानी का गला दबाने और जहर देने की कोशिश भी की गई थी। घटना वाले दिन घर से बच्चों को पहले ही बाहर भेज दिया गया था।

पोस्टमॉर्टम ने खोल दिया पूरा राज

इस केस का सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनी। मेडिकल बोर्ड ने साफ कर दिया कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं हुई थी। रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई। जांच में पता चला कि किसी मुलायम वस्तु, संभवतः तकिए से मुंह और नाक दबाकर उनकी हत्या की गई थी। शरीर पर मौजूद निशान, बिस्तर की स्थिति और फोरेंसिक साक्ष्य भी हत्या की ओर इशारा कर रहे थे।

कैसे फेल हो गई आरोपी की पूरी प्लानिंग?

जांच में सामने आया कि हत्या करने के बाद अमितेष ने कोबरा को भी मार दिया। इसके बाद सांप के दांत शिवानी के हाथ में गड़ाए गए ताकि ऐसा लगे कि उनकी मौत सर्पदंश से हुई है। लेकिन मेडिकल जांच में न तो शरीर में सांप के जहर के प्रभाव मिले और न ही ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण मिले जो जीवित व्यक्ति को सांप के काटने की पुष्टि करते। यहीं से आरोपी की पूरी कहानी टूट गई।

पुलिस पूछताछ में कबूला जुर्म

शुरुआत में अमितेष पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा। लेकिन, लगातार पूछताछ और फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद वह टूट गया। उसने स्वीकार किया कि पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होते थे। इसी वजह से उसने तकिए से मुंह दबाकर शिवानी की हत्या कर दी और बाद में कोबरा का इस्तेमाल कर पूरे मामले को हादसा दिखाने की कोशिश की।

जांच में क्या-क्या मिला?

पुलिस ने घटनास्थल से तकिया, तकिए का कवर, बिस्तर, मृत कोबरा और अन्य सामान जब्त किया। फोरेंसिक जांच में तकिए के कवर पर लार जैसे जैविक निशान मिले। कमरे की हालत और बिखरा हुआ बिस्तर भी संघर्ष की ओर इशारा कर रहा था। यही सबूत बाद में कोर्ट में अहम साबित हुए।


कोबरा भी बना इस केस का अहम किरदार

इस मामले की सबसे अनोखी बात यह रही कि हत्या की साजिश में एक संरक्षित वन्यजीव का इस्तेमाल किया गया। जांच में साबित हुआ कि कोबरा को अवैध तरीके से खरीदा गया, फिर हत्या की साजिश में इस्तेमाल करने के बाद उसे भी मार दिया गया। इसी वजह से आरोपी पर हत्या और साक्ष्य मिटाने के अलावा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भी केस दर्ज किया गया।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

करीब साढ़े छह साल चली सुनवाई के बाद 24 जून 2026 को अदालत ने माना कि अमितेष पटेरिया ने सुनियोजित तरीके से पत्नी की हत्या की थी। कोर्ट ने हत्या के अपराध में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। साक्ष्य मिटाने के मामले में दो साल की अतिरिक्त सजा और संरक्षित कोबरा की हत्या करने पर तीन साल के कारावास के साथ 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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