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दिल्ली हाईकोर्ट से पी चिदंबरम को बड़ी राहत, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगाई रोक

P Chidambaram Money Laundering Case: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एयरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Aircel Maxis Money Laundering Case) में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

यह फैसला तब आया जब चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र को ट्रायल कोर्ट द्वारा स्वीकार किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने चिदंबरम की ओर से दायर याचिका के संबंध में जवाब भी मांगा है।

P Chidambaram

जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने ईडी को नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी और मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए जनवरी 2025 के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

चिदंबरम की कानूनी चुनौती

वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और अन्य द्वारा प्रस्तुत चिदंबरम ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश ने गलती की है। न्यायाधीश ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197(1) के तहत पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 के तहत अपराधों का संज्ञान लिया, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है। कथित अपराध के समय, चिदंबरम वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत थे।

याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम 600 करोड़ रुपये तक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दे सकते थे। इस राशि से अधिक की मंजूरी के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) से मंजूरी की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अवैध रूप से 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3565.91 करोड़ रुपये) के एफडीआई को मंजूरी दी।

आरोप और कानूनी प्रावधान

जून और अक्टूबर 2018 में ईडी की अभियोजन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि चिदंबरम ने वित्त मंत्री के रूप में अपनी आधिकारिक क्षमता में काम करते हुए अपराध किए। याचिका में तर्क दिया गया है कि पीएमएलए कार्यवाही पर सीआरपीसी के सभी प्रावधान लागू होते हैं, जिसमें धारा 197 सीआरपीसी भी शामिल है, जो लोक सेवकों को सुरक्षा प्रदान करती है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने ईडी को नोटिस जारी किया और जनवरी 2025 के लिए विस्तृत सुनवाई निर्धारित की। याचिका में कहा गया है कि धारा 197(1) सीआरपीसी के तहत पूर्व मंजूरी के बिना पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत अपराधों का संज्ञान लेना गलत था।

अदालत ने चिदंबरम की याचिका के बारे में ईडी से जवाब मांगा है। आरोपों में वित्त मंत्री के तौर पर अपने अधिकार से बाहर जाकर एफआईपीबी की मंजूरी देकर सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला आगे भी जारी रहेगा और अगले साल आगे की सुनवाई होगी।

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