दिल्ली के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 98%, केजरीवाल सरकार की इन कोशिशों का दिखा असर

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने साल 2015 के चुनाव में जनता से ये वादा किया था कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी बेहतर बनाया जाएगा। उस समय लोगों ने इस वादे को हल्के में लिया क्योंकि ये किसी के लिए भी विश्वास कर पाना मुश्किल था कि सरकारी स्कूल महंगे निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। लेकिन इस वादे के पांच साल बाद यानी सोमवार को सीबीएसई 12वीं कक्षा के परिणाम से एक बार फिर साबित हो गया कि दिल्ली का शिक्षा सुधार मॉडल देश में सबसे बेहतर है।

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    ऐसे बेहतर होता गया रिजल्ट-

    • 2020- 98%
    • 2019- 94.24%
    • 2018- 90.6 %
    • 2017- 88.2%
    • 2016- 85.9%

    दिल्ली के स्कूल देश में सबसे बेहतर क्यों हैं, इन 10 कारणों से जानिए-

    • पिछले छह साल से दिल्ली का शिक्षा बजट सरकार के कुल बजट का 25 फीसदी है। जो देश में सबसे अधिक है।
    • दिल्ली के स्कूलों में कक्षाओं की संख्या 17,000 से 37,000 हो गई है, यानि छह साल में दोगुनी।
    • स्कूली वातावरण छात्रों को उबाऊ ना लगे और वो इसका आनंद ले सकें इसके लिए मॉर्डन इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जैसे- स्वीमिंग पूल, ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, लैब्स।
    • दिल्ली के शिक्षकों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में प्रशिक्षित किया जाता है, जैसे कैंब्रिज, सिंगापुर और फिनलैंड में शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है।
    • सीएम केजरीवाल व्यक्तिगत रूप से बच्चों, शिक्षकों और उनके माता-पिता से बातचीत करते हैं। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करते हैं।
    • शिक्षा सुधार में सलाहकारों की सहायता ली जाती है। ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई पूरी करने वाली आप विधायक आतिशी के नेतृत्व में इस ओर काफी काम किया गया है।
    • निजी स्कूलों की तरह ही सरकारी स्कूलों में भी नियमित तौर पर पेरेंट टीचर मीटिंग होती है।
    • पूर्व सैनिकों की एस्टेट मैनेजर के तौर पर नियुक्ति की गई है। जो हर सरकारी स्कूल का प्रबंधन देखते हैं।
    • स्कूलों में इनोवेटिव प्रोग्राम चलाए जाते हैं। हाल ही में मिशन चुनौती और मिशन बुनियाद चलाया गया था।
    • शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए मोबाइल टैबलेट्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। उच्च कक्षाओं में छात्रों को प्रोजोक्टर की मदद से पढ़ाया जाता है।

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