दिल्ली चुनाव: क्या एंटी इनकंबेंसी की काट ढूंढ रही है AAP? सत्ता विरोधी लहर का सामना कैसे करेंगे केजरीवाल?

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के पहले आम आदमी पार्टी (AAP) अपनी चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाओं में है। आप को इस समय एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर की चिंता सता रही है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता में बने रहना इस बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि पार्टी के प्रति लोगों की उम्मीदें अब बढ़ चुकी हैं और पिछले कुछ सालों में किए गए उनके कई वादें पूरे भी नहीं हुए हैं।

दिल्ली चुनाव के पहले आप एंटी इनकंबेंसी की काट ढूंढ रही है। पार्टी इस बार कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटने जा रही है। इस लिस्ट में कुछ बड़े चेहरों के नाम भी हैं, जैसे विधानसभा स्पीकर राम निवास गोयल और दिलीप पांडेय। इन दोनों नेताओं ने घोषणा की है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय फिलहाल विधानसभा में पार्टी के चीफ व्हिप भी हैं। उन्होंने अब कहा है कि वह पार्टी के लिए अब कोई और काम करेंगे।

AAP Anti-Incumbency

क्यों AAP को करना पड़ सकता है एंटी इनकंबेंसी का सामना?

अब ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली में सत्ता की लगभग एक दशक लंबी अवधि के दौरान अगर एंटी इनकंबेंसी लहर बनती है तो क्या आम आदमी पार्टी उसके मुकाबले अपनी पकड़ बना सकेगी? आप ने दिल्ली में 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की, लेकिन अब 2025 में एंटी इनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली की जनता में पहले जैसे उत्साह और विश्वास की कमी देखी जा सकती है। चुनावों में लगातार जीत के बावजूद पार्टी के कामकाज में कई कमियां सामने आई हैं। कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठे, खासकर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी।

आप पार्टी के भीतर की असंतोष और आंतरिक मतभेद भी चुनावों में पार्टी की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। हाल ही में चुनाव से पहले कैलाश गहलोत ने भी इस्तीफा दिया है। पार्टी में कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से नाराज हैं और इससे पार्टी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा पंजाब और अन्य राज्यों में पार्टी की स्थिति में उतार-चढ़ाव आया है, जिससे दिल्ली में उसके लिए चुनावी माहौल भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

एंटी इनकंबेंसी के लिए अरविंद केजरीवाल का क्या है मास्टर प्लान?

आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एंटी इनकंबेंसी का सामना करने की तैयारियां शुरू कर दी है। दिलीप पांडेय जैसे बड़े नेताओं का भी टिकट कटते देख आप के विधायकों में बेचैनी है। आप ने पहले ही 11 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। जिसमें तीन मौजूदा विधायकों का टिकट काटा गया है और कुछ ऐसे हैं, जो हाल ही में कांग्रेस या भाजपा से आए हैं। एंटी इंकंबेंसी से निपटने के लिए 'आप' कई सीटों पर नए चेहरों को उतारेगी।

दिल्ली में अब तीसरी बार चुनाव जीतने के लिए आप ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की तरफ से फाउंडेड आई-पैक के साथ डील किया है। 2020 के चुनावों में भी आप ने इस ऑर्गनाइजेशन की मदद ली थी।

आई-पैक ने भी इस डील की पुष्टि की है। इस चुनाव के लिए अब आई-पैक आप पार्टी के लिए इलेक्शन कैंपेन और रणनीतियां बनाएगी। टीम ने इसके लिए काम भी शुरू कर दिया है। आई-पैक आप के अभियान को जमीनी स्तर और डिजिटल दोनों स्तरों पर देख रही है। इसके लिए 40-50 सदस्यों की एक टीम काम करेगी। आई-पैक का कैंपेन लगभग 70-80 दिनों का होगा।

सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल ने 10 साल की सत्ता विरोधी लहर का सामना कैसे करना है, इसका जिम्मा आई-पैक को दिया है। आई-पैक के एक अधिकारी ने कहा कि हमने एंटी इनकंबेंसी के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए एक 'नया कैंपेन' तैयार किया है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता बनाए रखना उतना आसान नहीं होगा, जितना पहले था। एंटी इनकंबेंसी का चुनौती के अलावा विपक्षी दलों का दबाव, जनता का असंतोष और पार्टी के भीतर की असहमति, ये सभी कारक आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी कैसे इन चुनौतियों का सामना करती है और 2025 के चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूती से बनाए रखती है या नहीं।

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