Delhi Earthquake: एक महीने में तीसरी बार डोली धरती, भारत में सबसे अधिक खतरा कहां? जानिए
Delhi Earthquake के कारण दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लोगों में हड़कंप मच गया है। लोग अपने घरों से बाहर निकलकर भागे हैं। जानिए भारत के सबसे संवेदनशील इलाके कौन से हैं।

Delhi Earthquake के कारण लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। अधिक दहशत का माहौल इसलिए भी क्योंकि अभी तुर्की की दिल दहलाने वाली तस्वीरें जेहन से उतरी भी नहीं हैं कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में धरती डोली। महीने में तीसरी बार भूकंप के झटके लगने के कारण लोग डरे-सहमे हैं। तस्वीरों में लोगों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता है।
10 सेकेंड से अधिक समय कांपी धरती
Delhi Earthquake के संबंध में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान में लोकेट किया गया है। दिल्ली एनसीआर के लोगों के अनुसार भूकंप के झटके 10 सेकेंड से अधिक समय तक महसूस किए गए। दिल्ली से सटे हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के कई इलाकों में भी भूकंप के तेज झटके लगने की सूचना है। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड में एक साथ धरती डोलने की घटना के बाद लोगों को तुर्की की तस्वीरें याद आईं और सिहरन पैदा हो गई।

अफगानिस्तान के फैजाबाद में भूकंप का केंद्र
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के फैजाबाद में रहा। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के पड़ोसी मुल्क में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। पेशावर, इस्लामाबाद और लाहौर में भी भूकंप के तेज झटके लगने की खबरें हैं।
भूकंप भारत के इन राज्यों में भी आए
गौरतलब है कि सोमवार को पहाड़ी प्रदेश हिमाचल प्रदेश में भी भूकंप के झटके लगे थे। कुछ दिन पहले तटीय राज्य गुजरात में भी भूकंप आया था। कच्छ में रिक्टर स्केल पर 3.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। विगत 26-27 फरवरी को भी गुजरात के कुछ क्षेत्रों में भूकंप के झटके लगे थे।
किन भारतीय राज्यों में सबसे अधिक खतरा
भारत में भूकंप के मद्देनजर सबसे अधिक संवेदनशील राज्यों को Very High Risk Zone -V में रखा गया है। इसमें पूर्वोत्तर भारतीय क्षेत्र के अलावा बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर, गुवाहाटी, गुजरात और अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर भूकंप का खतरा सबसे अधिक है। इसके अलावा चेन्नई, केरल के कोच्चि और तिरुवनंतपुरम और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी भूकंप का खतरा बना रहता है। करीब 19 साल पहले की सुनामी और तमिलनाडु की तबाही का मंजर आज भी सिहरन पैदा करता है।
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इन राज्यों में भी भूकंप का High Risk
जोन चार वाले प्रदेशों को हाई रिस्क जोन माना गया है। इसमें समुद्र किनारे बसे महानगर मुंबई, लद्दाख, जम्मू कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाके शामिल हैं। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार भूकंप के झटकों से होने वाले नुकसान के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा हिस्सा जोन तीन और जोन टू में आता है। जोन तीन में अंडमान निकोबार और पश्चिमी हिमालयी इलाके गिने जाते हैं। जोन टू में भूकंप का खतरा सबसे कम होता है। इन प्रदेशों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई क्षेत्रों को गिना जाता है।
भूकंप के खतरे पर अमेरिकी एजेंसी की राय
बात मंगलवार, 21 मार्च को लगे भूकंप के झटकों की करें तो अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) ने बताया कि भूकंप का केंद्र धरती की सतह से 187.6 किमी नीचे था। केंद्र जितनी अधिक गहराई में होगा, झटके काफी दूर तक लगने की आशंका होती है। यही कारण है कि मंगलवार को भूकंप के झटके पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी महसूस किए गए।
इस आदमी ने तुर्की में विनाश देख भारत को अलर्ट किया
यूएसजीएस के अनुसार, भूकंप का केंद्र काबुल से लगभग 300 किमी उत्तर में उत्तरपूर्वी अफगानिस्तान में जुर्म नाम की जगह पर डिटेक्ट किया गया। ये जगह ताजिकिस्तान के साथ लगी अफगानिस्तान की सीमाओं के बेहद करीब है।सोलर सिस्टम ज्योमेट्री सर्वे (SSGEOS) के साथ जुड़े नीदरलैंड के रिसर्चर फ्रैंक हूगरबीट्स ने तुर्की में विनाशकारी भूकंप से तीन दिन पहले Earthquake का पूर्वानुमान लगाया था। इसके बाद इन्होंने भारत-पाकिस्तान-अफगानिस्तान के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप की आशंका जाहिर की थी।
ग्रहों की चाल से भूकंप का अनुमान
बता दें कि शोध संस्थान- SSGEOS ग्रहों की चाल के आधार पर भूकंप की भविष्यवाणी करने के लिए जाना जाता है। SSGEOS भूकंप जैसी गतिविधि का अनुमान लगाने के लिए आकाशीय पिंडों की निगरानी करता है। बकौल, फ्रैंक हूगरबीट्स रिसर्च के अनुसार ग्रहों का काफी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने रिक्टर स्केल पर 7.5 तीव्रता के भूकंप का अनुमान इसलिए लगाया क्योंकि उन्होंने ऐतिहासिक भूकंपों पर रिसर्च किया था। इसी आधार पर फ्रैंक ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के कई इलाकों में भूकंप की आशंका जताई। उन्होंने कहा, हिंद महासागर में शक्तिशाली भूकंप के कारण कई और इलाके भी चपेट में आ सकते हैं।
2022 के भूकंप में 1000 से अधिक की मौत
सीस्मोलॉजी के विद्वानों का मानना है कि इस इलाके में अक्सर भूकंप के खतरे होते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल पूर्वी अफगानिस्तान में 6.1 तीव्रता के भूकंप में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे। इसके अलावा करीब पांच साल पहले भी इसी तरह का भूकंप 2018 में भी आया था। उस समय भी उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता भी 6.1 मापी गई थी।
2500 किलोमीटर एरिया में भूकंप के तगड़े झटकों की आशंका
पश्चिमी हिमालय दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र, हिंदू कुश पहाड़ों और अरुणाचल प्रदेश के अंतिम छोर तक 2500 किलोमीटर एरिया में रिक्टर पैमाने पर 8 से अधिक तीव्रता के बड़े भूकंपों का खतरा बना हुआ है। भूकंप सबसे घातक प्राकृतिक आपदा है क्योंकि अभी किसी भी तरह से इसकी भविष्यवाणी या सटीक पूर्वानुमान के अभाव में चेतावनी की प्रणाली विकसित नहीं की जा सकी है। इसके बावजूद वैज्ञानिक उन क्षेत्रों की पहचान कर नक्शे पर संकेत देते हैं कि किस इलाके में भूकंप का खतरा सबसे अधिक है। टाइम्स ऑफ इंडिया की ऐसी ही एक रिपोर्ट में भारत के नक्शे पर दिखाया गया कि भूकंप के नजरिए से प्रदेशों को चार कैटेगरी में दिखाया जा सकता है। इस अनुमान के मुताबिक भारत का 59 फीसद भूभाग भूकंप के खतरों का लगातार सामना करता है।
भूकंप से नुकसान पर UN के आकड़े
भूकंप कितना भयावह होता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अप्रैल, 2015 में भारत के पड़ोसी देश नेपाल में आए भूकंप के बाद लगभग 2.3 से 3.5 लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए। एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में करीब 71 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति भूकंप के कारण खतरे में है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार भूकंप के कारण 180 बिलियन डॉलर का सालाना नुकसान होता है।
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