तुर्की में भूकंप की भविष्यवाणी करने वाले रिसचर्र का दावा, भारत में भी आने वाला है शक्तिशाली भूकंप

फ्रैंक हूगरबीट्स नाम के एक रिसर्चर ने तुर्की में हुए भूकंप की भविष्यवाणी 3 दिन पहले ही कर दी थी। अब वही डच रिसर्चर ने एक बार फिर से नई भविष्यवाणी की है।

India Pakistan earthquake prediction

Image: Oneindia

तुर्की और सीरिया में भूकंप से खतरनाक तबाही मची है। इन दोनों देशों में अब तक करीब 35 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। तुर्की में भूकंप आने के कुछ समय बाद नीदरलैंड के एक रिसर्चर बेहद चर्चा में आ गए थे। फ्रैंक हूगरबीट्स नाम के एक रिसर्चर ने तुर्की में हुए भूकंप की भविष्यवाणी 3 दिन पहले ही कर दी थी। अब वही डच रिसर्चर ने एक बार फिर से नई भविष्यवाणी की है और भारत-पाकिस्तान सहित अफगानिस्तान के आसपास के कई इलाकों में भूकंप के आने की आशंका जताई है।

कौन हैं फ्रैंक हूगरबीट्स?

कौन हैं फ्रैंक हूगरबीट्स?

फ्रैंक हूगरबीट्स ने आजतक से बातचीत में बताया कि वे सोलर सिस्टम ज्योमेट्री सर्वे (SSGEOS) के लिए काम कर रहे हैं और वे ग्रहों की चाल के आधार पर भूकंप की भविष्यवाणी करते हैं। SSGEOS एक शोध संस्थान है, जो भूकंप की गतिविधि का अनुमान लगाने के लिए आकाशीय पिंडों की निगरानी करता है। तुर्की में आए भूकंप की भविष्यवाणी की बात करते हुए फ्रैंक ने कहा कि इसके लिए उन्होंने विस्तार से रिसर्च किया था। रिसर्च से उन्हें अनुमान लग गया था कि वहां कुछ भूकंप संबंधी गतिविधियां होने वाली हैं। इसलिए उन्होंने सोचा कि कोई घटना घटित होने से पहले लोगों के लिए चेतावनी जारी की जानी चाहिए।

फ्रैंक के दावे पर उठ रहे सवाल

फ्रैंक के दावे पर उठ रहे सवाल

हालांकि, फ्रैंक के दावों पर कई वैज्ञानिक सवाल भी उठा रहे हैं। उनसे इस बात को लेकर ही सवाल पूछा गया कि सोशल मीडिया पर उनकी भविष्यवाणी पर प्रश्नचिन्ह क्यों लगाए जा रहे हैं? फ्रैंक ने इसके जवाब में कहा कि आज भी भूकंप को लेकर की जाने वाली भविष्यवाणी को सैद्धांतिक तौर पर सही नहीं माना जाता। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण करने वालों का कहना है कि किसी भी वैज्ञानिक ने कभी भी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की है। दरअसल वे भविष्यवाणी करने के लिए जिस विधि का हम उपयोग करते हैं उसे लेकर कई तरह के विवाद हैं।

ग्रहों की स्थिति का भूकंप पर प्रभाव

ग्रहों की स्थिति का भूकंप पर प्रभाव

फ्रैंक हूगरबीट्स ने कहा कि उनकी संस्था ने इतिहास में आए भीषण भूकंपों के बारे में भी विस्तार से रिसर्च की है। उनकी संस्था विशेष रूप से ग्रहों की स्थिति देखकर अनुमान लगाती है। उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में आए बड़े भूकंपों का अध्ययन इसलिए किया जाता है कि ताकि उनमें एक पैटर्न ढूंढकर भविष्य में आने वाले बड़े भूकंपों का अनुमान लगा सकें। रिसर्चर के मुताबिक यह बहुत अच्छी तरह से काम करता है। हालांकि मुख्यधारा के वैज्ञानिक ग्रहों के प्रभाव के कारण भूकंप आने को सही नहीं मानते।

भारत-पाक में आ सकता है भूकंप

भारत-पाक में आ सकता है भूकंप

रिसर्चर ने कहा कि अब ये आम सहमति बन चुकी है कि ग्रहों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए ग्रहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, लेकिन हमारी रिसर्च से पता चलता है कि ग्रहों का असल में काफी प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि वे 7.5 तीव्रता के भूकंप का अनुमान इसलिए लगा पाए थे क्योंकि उन्होंने ऐतिहासिक भूकंपों की गतिविधि पर रिसर्च किया था। फ्रैंक ने अब अफगानिस्तान, पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के साथ हिंद महासागर क्षेत्र तक शक्तिशाली भूकंप की भी भविष्यवाणी की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्यवाणी को लेकर अभी थोड़ी भ्रम की स्थिति है, क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अफगानिस्तान से भूकंप शुरू होकर हिंद महासागर तक जाएगा। हालांकि, हो सकता है कि यह भूकंप 2001 की तरह भारत पर अपना असर डाले। लेकिन कोई निश्चितता नहीं है।

तकनीक साझा करना है चुनौती

तकनीक साझा करना है चुनौती

फ्रैंक का कहना है कि भूकंप की भविष्यवाणी से संबंधित यह तकनीक दूसरे देशों के साथ साझा करना एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनके पास तकनीक का विस्तार करने का साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि निकट भविष्य में ऐसा आसानी से किया जा सकता है। फ्रैंक ने बताया कि उन्होंने तुर्की के वैज्ञानिक से संपर्क किया था, कुछ वैज्ञानिकों की इसमें दिलचस्पी हैं। लेकिन ज्यादातर वैज्ञानिकों की इसमें रुचि नहीं है। उन्हें सीरिया से कुछ सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में पूछे जाने पर फ्रैंक ने कहा कि अगर भारत सरकार उनसे संपर्क करती है, तो वे अपने ज्ञान को साझा करने के लिए तैयार हैं।

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