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दिल्ली के बच्चों में अस्थमा और एलर्जी का खतरा ज्यादा, सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली, 2 सितंबर: अगर आप राजधानी दिल्ली के पास रहते हैं, तो आपके लिए एक चिंताजनक खबर है। हाल ही की एक स्टडी में पाया गया कि दिल्ली के स्कूली बच्चों में दमे और एलर्जी का खतरा बढ़ गया है। अध्ययनकर्ताओं ने दिल्ली की तुलना कोट्टायम (केरल) और मैसूर (कर्नाटक) से की थी, जिसमें ये बात पता चली। दोनों शहर में प्रदूषण का स्तर राजधानी की अपेक्षा कम है। इसको लेकर विस्तृत रिपोर्ट लंग इंडिया जर्नल में लंग केयर फाउंडेशन और पल्मोकेयर रिसर्च एंड एजुकेशन फाउंडेशन ने प्रकाशित की है।

Pollution

मामले में फेफड़े के सर्जन अरविंद कुमार ने कहा कि लंग केयर फाउंडेशन और पल्मोकेयर रिसर्च एंड एजुकेशन (प्योर) फाउंडेशन ने इस अभ्यास के लिए हाथ मिलाया था, जो 2019 में इन तीन शहरों के 12 बेतरतीब ढंग से चुने गए स्कूलों में शुरू हुआ। जिसमें सभी बच्चे 13-14 और 16-17 आयु वर्ग के थे। 3157 स्कूली बच्चों पर किए गए इस अध्ययन को 31 अगस्त, 2021 को एक प्रमुख पीयर-रिव्यूड मेडिकल जर्नल, लंग इंडिया में प्रकाशित किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि अस्थमा, एलर्जी, वायुमार्ग की रुकावट या बचपन में मोटापे से संबंधित लक्षणों का उच्च प्रसार है। इसके लिए बच्चों को इंटरनेशनल स्टडी फॉर अस्थमा एंड एलर्जिक डिजीज इन चिल्ड्रन (आईएसएएसी) द्वारा विकसित एक व्यापक प्रश्नावली दी गई थी। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने साइट पर स्पाइरोमेट्री भी की, जो एक हाईलेवल टेस्ट है।

प्रश्नावली के आंकड़ों से पता चला कि उच्च संख्या में बच्चों ने अस्थमा और एलर्जी से संबंधित लक्षण होने की बात कही है। इसमें 52.8 प्रतिशत बच्चों को ज्यादा छींक आती है, जबकि 44.9 प्रतिशत बच्चे खुजली और आंखों से पानी आने की समस्या से परेशान हैं। वहीं 31.5 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे, जिनको खांसी की समस्या है। इसके अलावा 31.5 प्रतिशत ने सांस में तकलीफ बताई। अध्ययन में शामिल 11.2 प्रतिशत बच्चों के सीने में जकड़न और 8.75 प्रतिशत बच्चों में एक्जिमा की शिकायत थी।

वहीं दूसरी ओर कोट्टायम और मैसूर में 39.3 प्रतिशत स्कूली बच्चों ने छींकने, 28.8 प्रतिशत खुजली और आंखों से पानी आने, 18.9 प्रतिशत ने गंभीर खांसी, 12.1 प्रतिशत ने खुजली वाले दाने, 10.8 प्रतिशत ने सांस की तकलीफ, 4.7 प्रतिशत ने सीने में जकड़न की बात कही। इसके साथ ही लड़कियों की तुलना में लड़कों में अस्थमा का प्रसार दो गुना अधिक पाया गया।

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