CP Radhakrishnan के सामने इंडिया अलायंस किसे उतारेगा? PM Modi के दांव ने बढ़ाई विपक्ष की मुश्किल
Vice President Election: एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। पीएम मोदी ने बहुत सोच-समझकर इस नाम पर मुहर लगाई है। विपक्षी इंडिया अलायंस की ओर से आने वाले दिनों में संयुक्त उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया जा सकता है। हालांकि, पीएम ने वाइस प्रेसिडेंट के लिए जिस नाम का चयन किया है, उसने कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। सीपी राधाकृष्ण्न का व्यक्तित्व, राजनैतिक जीवन और जातीय समीकरण जैसे पहलू को देखते हुए विपक्षी दलों के लिए असमंजस की स्थिति बन गई है।
सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं जहां विपक्षी डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। अगले साल वहां चुनाव होने वाले हैं। डीएमके और कांग्रेस दोनों के लिए विरोध के कुछ तार्किक कारण ढूंढ़ना मुश्किल है। दूसरी तरफ एनडीए के पास यह तर्क रहेगा कि संवैधानिक पद पर तमिलनाडु से आने वाली हस्ती के चुनाव को भी निर्विरोध नहीं होने दिया।

PM Modi ने सीपी राधाकृष्णन के बहाने साधे कई समीकरण
एनडीए ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार के चयन के लिए अंतिम फैसला पीएम नरेंद्र मोदी पर छोड़ दिया था। पीएम ने कई समीकरणों को देखते हुए सीपी राधाकृष्णन का चुनाव किया है। एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है और उनके जीतने में कोई बाधा नहीं है। इस तथ्य के बावजूद प्रधानमंत्री ने ऐसे उम्मीदवार का चयन किया है, जिसका विरोध करने का आधार विपक्ष के पास न हो। विपक्ष की ओर से भले ही उम्मीदवार खड़ा किया जाए, लेकिन पीएम और एनडीए यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि संवैधानिक पद के लिए राजनीति विपक्षी दल कर रहे हैं न कि बीजेपी और एनडीए।
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CP Radhakrishnan के पक्ष में जाती हैं ये प्रमुख बातें
- सीपी राधाकृष्णन का ताल्लुक तमिलनाडु से है। प्रदेश में डीएमके-कांग्रेस की सरकार और खास तौर पर डीएमके के लिए उनका विरोध करना थोड़ी असहज स्थिति है। सैद्धांतिक तौर पर उपराष्ट्रपति दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं और यह पद संवैधानिक होता है।
- सीपी राधाकृष्णन ओबीसी समुदाय से आते हैं और तमिलनाडु में यह वर्ग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। बीजेपी अपने इस कदम को नेशनल लेवल पर भुनाएगी और विपक्ष का विरोध करना ओबीसी प्रतिनिधित्व के खिलाफ दिख सकता है। इससे पहले दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद और आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी ने सांकेतिक तौर पर पूरे देश में बड़ा मैसेज दिया है।
- राधाकृष्णन की एक ईमानदार और साफ-सुथरी छवि रही है। विपक्ष को उनके खिलाफ कोई बड़ा नैरेटिव बनाना मुश्किल होगा। उन्होंने बतौर राज्यपाल भी काम किया है।
- पीएम मोदी ने दक्षिण भारत और ओबीसी समीकरण को साधते हुए ऐसा उम्मीदवार चुना है कि इंडिया अलायंस बैकफुट पर रहकर ही विरोध कर सकती है।
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कांग्रेस की कोशिश साझा उम्मीदवार उतारने के लिए सहमति बनाने की है। एनडीए के उम्मीदवार के सामने अपना कैंडिडेट उतारते हुए विपक्षी इंडिया अलायंस के लिए सभी समीकरणों को ध्यान में रखना होगा। समाजवादी पार्टी, डीएमके जैसे सहयोगी दलों की राजनीति में बड़ा हिस्सा ओबीसी वर्ग का है। अब देखना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे कैसे सहयोगी दलों को साझा कैंडिडेट के लिए मना पाते हैं।












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