सरकार ने कोविशील्ड की पहली और दूसरी खुराक में 2 से 4 हफ्तों का अंतर क्यों बढ़ाया, जानिए

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को खत लिखकर कहा है कि देश में कोविड-19 की रोकथाम के लिए दी जा रही दो वैक्सीन में से एक कोविशील्ड की दो खुराक में अंतराल को 4 हफ्तों से बढ़ाकर 6 या 8 हफ्ते कर दिया जाए। गौरतलब है कि देश में पिछले 16 जनवरी से ही कोरोना वायरस की वैक्सीन दी जा रही है। ऐसे में जब लाखों लोगों को इसकी दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है, तब सवाल उठता है कि सरकार ने ऐसा फैसला क्यों किया। 28 फरवरी तक पहले चरण में सिर्फ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई जा रही थी। लेकिन, दूसरे चरण में 1 मार्च से 60 साल से ऊपर के लोगों या गंभीर बीमारियों से पीड़त 45 साल से ऊपर के लोगों को भी टीका लगाया जा रहा है। सरकार ने सोमवार को जो एडवाइजरी जारी की है, वह सिर्फ कोविशील्ड की डोज के लिए है, देसी टीके कोवैक्सीन के लिए नहीं।

केंद्र ने कोविशील्ड वैक्सीन के लिए ऐसी एडवाइजरी क्यों जारी की ?

केंद्र ने कोविशील्ड वैक्सीन के लिए ऐसी एडवाइजरी क्यों जारी की ?

केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने यह एडवाइजरी इसके नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एटीएजीआई) और नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन की सलाह पर जारी की है, जिसने साइंटफिक एविडेंस के आधार पर ऐसा मशवरा दिया है। दोनों एक्सपर्ट ग्रुप ने कहा है कि दोनों खुराकों के बीच अंतर 4 से 6 हफ्ते की जगह पहली खुराक के बाद 4 से 8 हफ्तों की हो। केंद्र सरकार ने इन दोनों ग्रुप की सलाह को मंजूर करते हुए राज्यों को सलाह दी है कि कोविशील्ड की दूसरी खुराक के बीच अंतर को बढ़ा दिया जाए। ड्रग कंट्रोलर जेनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने इस साल जनवरी में ही कोविशील्ड और कोवैक्सीन की इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।

कोरोना वैक्सीन की दो खुराक में अंतर बढ़ाने से क्या फायदा होगा ?

कोरोना वैक्सीन की दो खुराक में अंतर बढ़ाने से क्या फायदा होगा ?

केंद्र सरकार ने कहा है कि साइंटिफिक एविडेंस से पता चलता है कि अगर कोविशील्ड की दूसरी डोज 6 से 8 हफ्ते बाद दिया जाता है तो यह ज्यादा प्रभावी होता है। लेकिन, यह अंतराल 8 हफ्तों से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बता दें कि कोविशील्ड वैक्सीन का निर्माण पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में हो रहा है, जिसने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से इसे तैयार किया है। इस समय यह देश का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीन उत्पादक है। यह वैक्सीन पुणे से ही पूरे देश में और विदेशों में भी सप्लाई की जा रही है।

एक्सपर्ट दे रहे हैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने की सलाह

एक्सपर्ट दे रहे हैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने की सलाह

रविवार को ही केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक (स्वदेशी 'कोवैक्सीन' की निर्माता) को कोविड-19 की 12 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया है। इनमें से 10 करोड़ डोज कोविशील्ड की है और बाकी कोवैक्सीन की। भारत में अगले जुलाई तक 30 करोड़ हेल्थकेयर वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर और उम्र और गंभीर बीमारियों की वजह से हाई रिस्क श्रेणी के लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए एक्सपर्ट मान रहे हैं कि जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों को संभव हो सके, वैक्सीन लगाने की पहल की जाए। सोमवार सुबह 7 बजे तक की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कोरोना वैक्सीन की 4.50 करोड़ से ज्यादा डोज लगाई जा चुकी थी। सोमवार तक देश में वैक्सीनेशन ड्राइव के 66 दिन पूरे हो चुके हैं।

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