Covid vaccine update:आप हैं इस रोग के शिकार, तो वैक्सीन का घट सकता है प्रभाव
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डिप्रेशन और अकेलापन से घट सकता है असर
कोरोना वायरस वैक्सीन की प्रभावकारिता (Covid-19 vaccine efficacy) को लेकर इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन एसोसिएशन फॉर साइकोलॉजिकल साइंस (Association for Psychological Science) ने अपनी नई रिसर्च के बाद इस अभियान से जुड़े दुनियाभर के लोगों को आगाह किया है। इस रिसर्च के मुताबिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार या अवसाद, तनाव या अकेलापन (Health behaviours and depression, stress, or loneliness) वैक्सीन की इम्यून रेसपॉन्स विकसित करने की क्षमता में खलल डाल सकता है। इस रिसर्च को 'पर्सपेक्टिव्स ऑन साइकोलॉजिकल साइंस'(Perspectives on Psychological Science) जर्नल में छापने के लिए स्वीकार कर लिया गया है। अमेरिका के ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी(Ohio State University) के अन्नेलिज मैडिसन और इस रिसर्च पेपर के लीड ऑथर ने कहा है, 'हमारी नई स्टडी इस बात पर प्रभाव डालती है कि वैक्सीन की प्रभावकारिता और स्वास्थ्य से जुड़े बर्ताव और भावनात्मक तनाव शरीर में इम्मूयन रेस्पॉन्स विकसित होने में नुकसान पहुंचा सकती हैं। '

वैक्सीन को असरदार बनाने के लिए उपाय
इस रिसर्च में यह भी जानकारी दी गई है कि ऐसे लोगों में कुछ साधारण उपायों के जरिए वैक्सीन को ज्यादा कारगर बनाया जा सकता है। इसके लिए व्यायाम और वैक्सीन पड़ने वाले समय से 24 घंटे पहले की रात से अच्छी नींद की सलाह दी गई है। इस रिसर्च में कहा गया है कि अलग-अलग व्यवक्ति में वैक्सीन के पूरा कारगर नहीं हो पाने के कई कारण हो सकते हैं। मसलन, पर्यावरण से जुड़ी वजहों के अलावा व्यक्ति की आनुवंशिकी के अलावा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है, जिससे कि वैक्सीन का पर्याप्त असर नहीं हो पाता। अवसाद और मानसिक परेशानियों को इस रिसर्च में इसलिए बहुत ज्यादा महत्त्व दिया गया है, क्योंकि कोरना वायरस महामारी ने करोड़ों लोगों को आर्थिक, मानसिक और भविष्य की चिंताओं को लेकर भी परेशान कर रखा है।

रिसर्च में एंटीबॉडीज पर किया फोकस
वैक्सीन इम्यून सिस्टम को चुनौती देकर काम करती हैं। वैक्सीनेशन के कुछ घंटे के बाद से ही बाहरी जैविक खतरे के खिलाफ शरीर की क्षमता विकसित होने लगती है। इस शुरुआती असर के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, जो विशेष रोगाणुओं (specific pathogens) को निशाना बनाते हैं। वैक्सीन के बाद यह प्रक्रिया लंबे वक्त के लिए शुरू हो जाती है। ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े इस रिसर्च पेपर के सीनियर ऑथर जैनिस किकोल्ट-ग्लेजर ने कहा, 'हमारी रिसर्च में हमने मुख्यतौर पर एंटीबॉडीज की प्रतिक्रिया पर फोकस किया है, हालांकि यह सिर्फ पूरे इम्यून सिस्टम का सिर्फ एक पहलू है। '

'थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन स्थिति ठीक हो सकती है'
लेखकों का कहना है कि अभी दुनियाभर में जो वैक्सीन विकसित हुई हैं, उनके ट्रायल के परिणाम काफी प्रभावकारी बताए जा रहे हैं। ऐसे में जिन मनोवैज्ञानिक और बर्ताव संबंधी परेशानियों की बात रिसर्च में की गई है, उससे ये हो सकता है कि वैक्सीनेशन के बाद ऐसे लोगों में इम्यून विकसित होने में थोड़ा ज्यादा वक्त ले और यह भी हो सकता है कि इम्यूनिटी की अवधि थोड़ी कम रहे। हालांकि, किकोल्ट-ग्लेजर ने यह भी कहा है कि 'जो चीज मुझे उत्साहित करती है वह ये है कि इन परेशानियों में कुछ को ठीक किया जा सकता है। बहुत साधारण उपायों से वैक्सीन की शुरुआती प्रभावों को बहुत हद तक बढ़ाया जा सकता है।' (तस्वीरें-सांकेतिक)












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