सात समुंदर पार से सत्यनारायण की पूजा कराने आया विदेशी जोड़ा
जोड़े ने उत्तर प्रदेश स्थित बुलंदशहर में त्रिवेणी घाट पर भगवान सत्य नारायण की कथा मंत्रोच्चारण व विधि-विधान के साथ की।
बुलंदशहर। सात समुंदर पार से यूपी के बुलंदशहर में एक विदेशी जोड़ा मंगलवार को पहुंचा। विदेशी जोड़े ने ने अनूपशहर स्थित छोटी काशी में गंगा स्नान के बाद गंगा आरती की।
उसके बाद त्रिवेणी घाट पर भगवान सत्य नारायण की कथा मंत्रोच्चारण व विधि-विधान के साथ की।


पहुंचे छोटी काशी
अनूपशहर स्थित छोटी काशी धर्म और आस्था का प्रतिक मानी जाती है। छोटी काशी के दर्शन करने काफी बडी तादात में विदेशी पर्यटक आते रहते है। पंडित नरेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि 40 साल पहले पलक के पिता हिन्दुस्तान को छोडकर अमेरिका में बस गए थे।
अमेरिका में ही पलक गुप्ता का जन्म हुआ और पढ़ाई-लिखाई भी अमेरिका में हुई है। उन्होंने बताया कि लंदन निवासी अलेक्जेंडर और पलक गुप्ता की शादी दिल्ली में एक सप्ताह पहले हुई है। भारतीय मूल की पलक गुप्ता अपने पति लंदन निवासी अलकजेंडर हुलमैर के साथ मंगलवार को छोटी काशी पहुंची।

मर्चेन्ट नेवी में काम करता है युवक
पलक के पिता भगवान गुप्ता ने बताया कि उनके पिता जी 40 साल पहले वो अमेरिका के न्यूआर्क में जाकर बस गए। यहां पर ही उनकी दो बेटियां पलक व पूजा का जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि पलक अमेरिका में सीए है, वहीं पर पलक की मुलाकात लंदन निवासी अलेक्जेंडर हॉमल्स से हुई। अलेक्जेंडर हॉमल्स मर्चेन्ट नेवी में कार्यरत हैं।

प्यार में बदली दोस्ती
दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया। पलक ने अपने माता-पिता से अलेक्जेंडर से शादी करने की बात कही तो उन्होंने अपनी सहमति देते हुए शादी को हिन्दू वैदिक रीति से करने की बात कही। कुछ दिनों पूर्व सभी दिल्ली पहुंचे, वहीं पर अपने संबन्धियों की उपस्थिति में विवाह संपन्न किया।
पंडित नरेश कुमार उपाध्याय ने बताया छोटी काशी स्थित त्रिवेणी घाट पर विदेशी जोड़े ने गंगा स्नान किया उसके बाद गंगा आरती की।

किया प्रसाद वितरण
उन्होंने बताया कि पलक के पिता भगवान गुप्ता व माता सुनीता ने भी स्नान किया और भगवान सत्यनारायण की विधि-विधान और मंत्रो चारण के साथ पूजा अर्जना की। पंडित नरेश कुमार ने बताया कि दोनो पूजा अर्जना करने के बाद अब लंदन निकल गए।
पंडित नरेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि शास्त्रों में बेटी के कन्यादान के बाद गंगा स्नान के लिए कहा गया है। मलू रूप से भारतीय होने के कारण यह विदेशी जोडा अपने माता-पिता के साथ गंगा स्नान करने के लिए आया था। यहां गंगा स्नान करने के बाद विदेशी जोडने ने सत्यनारायण भगवान की कथा की और प्रसाद वितिरण किया। लोगों के लिए यह आकर्षण का केन्द्र बना रहा।












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