क्या देश में फिर से भयावह रूप ले रहा है कोरोना ? ये 4 लक्षण दे रहे हैं दूसरी लहर की गवाही
नई दिल्ली: मध्य फरवरी से महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे फिर से रफ्तार पकड़ने शुरू हुए थे। देश में एक निश्चिंतता थी कि करीब दो करोड़ टीकाकरण तक हम पहुंचने वाले हैं। लेकिन, पिछले कुछ हफ्तों से केस बढ़ने की चिंता सिर्फ महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक ही सीमित नहीं रह गई है। पूरे देश में इसमें अचानक इजाफा दर्ज किया जाने लगा है। इस स्थिति ने कुछ विशेषज्ञों को यह अनुमान लगाने पर मजबूर किया कि यह भारत में कोराना की दूसरी लहर हो सकती है। लेकिन, सवाल फिर भी सवाल ही रहा कि क्या संक्रमण बढ़ने की स्थिति देश के कुछ हिस्से में ही है या फिर हालात फिर से चिंताजनक हो रहे हैं? ऊपर से नए-नए वैरिएंट और उनपर मौजूदा वैक्सीन के प्रभाव को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं अलग टेंशन दे रही है। लेकिन, यहां हम वह चार लक्षणों पर बात करेंगे, जिससे लगता है कि दूसरी लहर की आशंका बेवजह पैदा नहीं हुई है।

पहला- पूरे देश में बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले
अपने निचले स्तर पहुंचने के बाद देश में कोरोना के नए मामलों में सात दिनों में औसतन 67 फीसदी से ज्यादा इजाफा हो गया है। उदाहरण के लिए 11 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते में कुल 10,988 केस से बढ़कर इस हफ्ते बुधवार को नए केस 18,371 तक पहुंच चुके थे। अगर शुक्रवार की बात करें तो यह संख्या बढ़कर 23,285 तक पहुंच चुकी है। यानी यह एकबार फिर से कोरोना की भयावह लहर की आहट लग रही है। वजह साफ है कि आर्थिक गतिविधि पटरी पर लौटने लगी थी। वैक्सीन ने राहत की सांस दी है। लेकिन, इसी दौरान सरकारें भी ढीली पड़ीं हैं। टेस्टिंग अपने चरम से घटकर उसके करीब 40 फीसदी तक रह गई थी। मसलन, पिछले हफ्ते देश में औसतन रोजाना 7,25,626 सैंपल टेस्ट हुए, जो कि अक्टूबर में रोजाना 12 लाख को पार कर रहे थे। सबसे बड़ी बात कि ज्यादातर लोगों ने तो लगभग मास्क पहनना ही छोड़ दिया। खासकर ग्रामीण इलाकों में तो हाल बहुत बुरा हो चुका है। सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र है, जहां लॉकडाउन और कर्फ्यू की दहशत लौटानी पड़ी है। वैसे भी शुरू से यह राज्य कोरोना को कंट्रोल करने में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है।

दूसरा- कुछ राज्यों में बहुत ज्यादा तेजी से फैल रहा है कोरोना
पंजाब में पहली दौर के निचले स्तर के बाद देश में औसतन सबसे ज्यादा केस बढ़े हैं और हफ्ते में 509 फीसदी तक उछाल है। यहां राष्ट्रीय औसत का तकरीबन 8 गुना तेज रफ्तार से मामले बढ़ने लगे हैं। हर हफ्ते औसतन केस बढ़ने के मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है। यहां 11 फरवरी के हफ्ते में जब कोरोना सबसे निचले स्तर पर आया था, उसमें 331 फीसदी तक की उछाल दर्ज की जा चुकी है। औसतन रोज के 2,415 केस से बढ़कर यह मामले 10,410 तक पहुंच चुके हैं। शुक्रवार के दिन 14,317 नए संक्रमण दर्ज किए गए हैं। यह राज्य शुरू से कोरोना को ठीक से कंट्रोल करने में पिछड़ा साबित हुआ है। शुक्रवार तक यहां कुल 2,26,6374 लोक संक्रमित हो चुके हैं। पिछले हफ्ते की बात करें तो देश में जितने भी नए संक्रमण की रिपोर्ट की गई, उसमें आधे से ज्यादा यानी 57 फीसदी महाराष्ट्र में है। इसी तरह हरियाणा में भी नए केस तेजी से बढ़ रहे हैं और खास बात ये है कि पंजाब और हरियाणा दोनों किसान आंदोलनों से प्रभावित हैं। हरियाणा में भी निचले स्तर से 302 फीसदी का साप्ताकि इजाफा दर्ज की गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश (164%) और दिल्ली (140%) का स्थान है। इनके बाद असम (138%), गुजरात (125%), राजस्थान(111%) और आंध्र प्रदेश (105%)की रिपोर्ट भी डराने वाली है। ये सारी वृद्धि संक्रमण के निचले स्तर से तुलात्मक आधार पर है। जहां तक केरल की बात है तो वहां अभी पहली ही लहर खत्म नहीं हुई है। एक तथ्य ये है कि देश के 20 सबसे ज्यादा आबादी वाले 17 राज्यों में पहली लहर के निचले स्तर से 20 फीसदी मामले अबतक बढ़ चुके हैं।

तीसरा- पॉजिटिविटी रेट भी फिर बढ़ने लगे हैं
पिछले हफ्ते देश में कोविड-19 के जितने सैंपल टेस्ट किए गए उनमें से औसतन 2.6 फीसदी केस पॉजिटिव थे। मोटे तौर तो यह स्थिति विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैरामीटर में नियंत्रण की स्थिति बताती है। लेकिन, चिंता की बात ये है कि इसमें फिर से इजाफा होना शुरू हो चुका है। ऊपर से ये भी तथ्य है कि पहले की तुलना में टेस्ट भी तो कम हो रहे हैं। बता दें कि 14 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते से देश में औसतन साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट में 1.6% की बढ़ोतरी हो चुकी थी। हालात की गंभीरता को समझने की इसलिए जरूरत है कि पॉजिटिविटी रेट बढ़ने का सीधा मतलब ये है कि आने वाले दिनों में संक्रमण में और इजाफा होने वाला है।

चौधा- 21 दिन से ऐक्टिव केस बढ़ रहे हैं
ऐक्टिव केस का मतलब है, वो सारे लोग जो इस समय कोरोना पोजिटिव हैं। इसमें कोरोना से ठीक हो चुके और कोविड की वजह जिनकी मौत हो चुकी है, उन्हें नहीं गिना जाता। यानी जिन लोगों में अभी कोरोना वायरस सक्रिय है, वह ऐक्टिव केस माने जाते हैं। यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है कि ऐक्टिव केस जितना ज्यादा होता है, कोरोना संक्रमण फैलने के आसार उतने ही ज्यादा होते हैं। आज की तारीख में देश में कुल 1,97,237 कोरोना मरीज है, जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 1,07,307 कोरोना मरीज हैं। केरल में यह संख्या 34,082 और पंजाब में 10,069 है। यह इसलिए खतरे की घंटी है, क्योंकि 17 फरवरी से पहले के 80 दिनों तक देश में ऐक्टिव केस निगेटिव में चला गया था। मतलब हर हफ्ते ऐक्टिव केस लोड घटता जा रहा था। लेकिन, पिछले हफ्तों में रोजाना इसमें हजारों में इजाफा होने लगा है।












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