लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की हालत पर वरिष्ठ वकीलों की लिखी चिट्ठी ने बदला SC का नजरिया
नई दिल्ली। कोरोना संकट में अगर सबसे ज्यादा कोई परेशान हुआ है तो वो हैं प्रवासी मजदूर। लॉकडाउन के चलते उनका रोजगार छिन गया है और हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर सड़कों पर आ गए हैं। पैसा न होने के कारण वो पैदल ही अपने घर जाने को मजबूर है। कई मजदूरों को अपना जान भी गंवाना पड़ा है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों से जुड़ी याचिका को खुद संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि हालात को सुधारने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। मीडिया में प्रवासी मजदूरों की मुश्किलों से संबंधित खबरों को संज्ञान में लेते हुए जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों के लिए इंतजाम किए हों लेकिन "अपर्याप्तता और कुछ खामियां" रहीं हैं।
जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह की बेंच ने 28 मई तक इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन की स्थिति में समाज के इसी वर्ग को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली और मुंबई के 21 वरिष्ठ वकीलों ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिसमें लॉकडाउन के कारण होने वाले मानवीय संकट में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया था।
इन वरिष्ठ वकीलों ने लिखी है चिट्ठी
- पी चिदंबरम
- आनंद ग्रोवर
- इंदिरा जयसिंह
- मोहन कटारकी
- सिद्धार्थ लूथरा
- संतोष पॉल
- महालक्ष्मी पावनी
- कपिल सिब्बल
- चंदर उदय सिंह
- विकास सिंह
- प्रशांत भूषण
- इकबाल चागला
- अफी चिनॉय
- मिहिर देसाई
- जानकी देसाई
- द्वारका दास
- रजनी अय्यर
- युसुफ मुच्छाला
- राजीव पाटिल
- नवरोज सरवाई
- गायत्री सिंह
- संजय सिंघवी












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