दिल्ली: कोरोना के नाम पर रेप के आरोपी HIV+ को जमानत

नई दिल्ली- कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच दिल्ली की एक अदालत ने रेप के एक आरोपी को इलाज के नाम पर 45 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। आरोपी एचआईवी का मरीज है और कोरोना वायरस के दौरान उसकी इलाज की जरूरतों को देखते हुए अदालत ने उसे 25, 000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। आरोपी पर रेप के अलावा भी कई सारे गंभीर आरोप हैं। हालांकि, अदालत ने आरोपी को हिदायत दी है कि जमानत की अवधि में अगर किसी अदालत में उसके किसी मामले की सुनवाई होगी तो उसे निश्चित ही वहां पेश होना होगा। यही नहीं अदालत ने उससे कहा है कि वह हर हाल में अंतरिम जमानत की मियाद पूरी होते ही या उससे पहले भी जेल सुप्रीटेंडेंट के सामने सरेंडर कर दे। सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया, लेकिन अदालत ने एचआईवी जैसी बीमारी से इलाज के लिए उसे अंतरिम जमानत पर छोड़ने का आदेश दे दिया।

रेप के आरोपी एचआईवी+ कैदी को जमानत

रेप के आरोपी एचआईवी+ कैदी को जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने रेप, अपहरण, अनैतिक तस्करी और आपराधिक साजिश के आरोपों में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद एक आरोपी को जमानत दे दी है। अदालत ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए उसे एचआईवी के इलाज के लिए ये अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने उसके पीपुल लिविंग विद एचआईवी/एड्स की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद 45 दिनों की अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अपने आदेश में अतिरिक्त सेशन जज गीतांजलि गोयल ने लिखा है, 'जेल से रिपोर्ट मिली है जिसके मुताबिक आवेदक का मामला पीपुल लिविंग विद एचआईवी/एड्स (पीएलएचए) का है और वह एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी पर है.......नई दिल्ली के तिहाड़ जेल नंबर 1 के जेल डिस्पेंसरी के इंचार्ज मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर। क्योंकि, आवेदक के वकील ने सिर्फ 45 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग की है, इस आवेदन को मंजूर किया जाता है। '

एचआईवी का इलाज करवाने के लिए दी गई जमानत

एचआईवी का इलाज करवाने के लिए दी गई जमानत

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट की एक अधिकार प्राप्त कमिटी ने जेल की भीड़ कम करने के लिए प्रस्ताव पास किया है, जिसमें रेप के आरोपियों को अंतरिम जमानत देने से अलग रखा गया, लेकिन कुछ बीमार कैदियों को इससे अलग रखा गया है, जिसमें कि एचआईवी भी शामिल है। कोर्ट ने आदेश में आगे कहा है, 'आवेदक को निर्देश दिया जाता है कि वह 13 जून, 2020 या उससे पहले जेल सुप्रीटेंडेंट के सामने सरेंडर कर दे। उसे यह भी निर्देश दिया जाता है कि इस दौरान अगर कोर्ट के सामने उसका मामला सुनवाई के लिए आता है तो वो वहां भी पेश हो।' कैदी के वकील ने अदालत के सामने दलील दी थी कि वह एचआईवी के साथ-साथ कई और बीमारियों की चपेट में है और उसे ठीक से इलाज की जरूरत है। अदालत ने उसे 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया है।

रेप के अलावा भी कई गंभीर आरोप

रेप के अलावा भी कई गंभीर आरोप

आरोपी पर आईपीसी की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है, जिसमें रेप, आपराधिक साजिश और इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) ऐक्ट, 1956 के तहत वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। लेकिन, उसके वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर उसकी बीमारी को देखते हुए अंतरिम जमानत मंजूर की जाए। जबकि, सरकारी वकील ने यह कहकर जमानत का विरोध किया कि उस पर रेप जैसे संगीन आरोप हैं, जो अपराध हाई कोर्ट की अधिकार प्राप्त कमिटी की नई गाइडलाइंस में शामिल नहीं है।

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