मिसाल : इकलौते बेटे का अंतिम संस्‍कार कर फिर ड्यूटी पर लौट आया ये कोरोना योद्धा, बोले परिवार से बड़ा हैं देश

मिसाल : इकलौते बेटे का अंतिम संस्‍कार कर फिर ड्यूटी पर लौट आया ये कोरोना योद्धा, बोले परिवार से बड़ा हैं देश

लखनऊ। दुनिया की तरह भारत भी कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। कोरोना के कारण हर तरफ सन्‍नाटा हैं, हमें अपने घर से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है वहीं देश में ऐसे भी लाखों की संख्‍या में कोरोना वॉरियर्स जान जोखिम में डाल कर दिन-रात एक कर देश के नागरिकों की सेवा में लगे हुए हैं। अपनी सारी इच्‍छाओं को त्यागकर और परिवार से दूर रहते हुए दिल में सारा दर्द भुला कर कोरोना वायरस को हराने के लिए योद्धा की तरह लगातार लड़ रहे हैं। पुलिस, हेल्थ वर्कर्स और अन्य विभाग कंधे से कंधा मिलाकर देश को महामारी से बचाने में दिन-रात जुटे हैं। इन कोरोना वॅरियर्स के साथ जो उनका परिवार तकलीफें सह कर उनका साथ दे रहा हैं वो भी एक अनूठी मिसाल ही हैं।

rinku
वहीं अब मुजफ्फरनगर में तैनात आरक्षी (सिपाही) रिंकू ने जो किया हैं वो मिसाल ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों को आईना दिखाया है जो इस संकटकाल में किसी न किसी बहाने से घर पर बैठे हैं ताकि ड्यूटी न करना पड़े। रिंकू ऐसे कोरोना योद्धा हैं जिन्‍होंने अपने प्‍यारे एकलौते बेटे को खोने के सबसे बड़े सदमें में भी इस कोरोना योद्धा ने देश के प्रति अपने कर्तव्‍य को नहीं भूला।

बेटे की इस कारण से हो गई मौत

बेटे की इस कारण से हो गई मौत

दरअसल, लॉकडाउन के दौरान आरक्षी रिंकू कुमार के तीन साल के इकलौते बेटे हार्दिक की अचानक तबीयत खराब हुई जिसके बाद छुट्टी लेकर वह ससुराल में मेरठ गए। वहां बीमार बेटे को निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन तीन वर्षीय बेटे ने 15 अप्रैल को दम तोड़ दिया। बेटे को खोने पर उन्हें और पत्नी रजनी पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने वैश्विक महामारी को इस सदमे से बड़ा बताते हुए बेटे की अंत्येष्टि ससुराल अब्दुल्लापुर मेरठ में ही कर दी। लॉकडाउन की वजह से वह अपने पैतृक गांव सदुल्लापुर थाना हापुड़ भी नहीं जा पाए।

पत्नी को किसी तरह ढांढ़स बंधाते हुए ड्यूटी पर लौट आए

पत्नी को किसी तरह ढांढ़स बंधाते हुए ड्यूटी पर लौट आए

वह अपने मासूम बेटे को खोने का गम दिल में लिए, पत्नी को किसी तरह ढांढ़स बंधाते हुए चार दिन में ही ड्यूटी पर लौट आए। महामारी के दौर में ऐसे डॉक्टर भी सामने आए हैं जिनके साथी तो बहाने से छुट्टी लेकर ड्यूटी छोड़ गए, लेकिन वे तब तक मरीजों से जूझते रहे जब तक कि वे ठीक नहीं हो गए।

अपने गम से ज्यादा थी इस महामारी की चिंता

अपने गम से ज्यादा थी इस महामारी की चिंता

अंतिम संस्कार की क्रियाएं पूरी कराकर अपने गांव जाए बिना ही लौट आए। बकौल रिंकू उन्हें दुख की घड़ी में गमजदा पत्नी के साथ रहने को इमरजेंसी छुट्टी मिल जाती, लेकिन उन्हें घर के गम से ज्यादा कोरोना महामारी की चिंता सताती रही। उन्होंने चार दिन बाद आकर पुलिस सेवाओं के प्रति फर्ज निभाया। उन्होंने राष्ट्रहित में पत्नी और एक साल की बेटी को ससुराल मेरठ छोड़कर थाने में ड्यूटी जॉइन कर ली। कहा कि परिवार से बड़ा राष्ट्र का संकट है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+