पांच राज्यों में करारी हार का सामना करने वाली कांग्रेस के पास जानिए देश भर में कितने हैं विधायक
नई दिल्ली, 13 मार्च। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस का परिणाम बहुत ही निराशाजनक रहा। पांचों राज्यों में चुनाव के पहले बड़ी संख्या में कांग्रेस के भारी संख्या में विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा या अन्य पार्टियों में शामिल हो गए। इसके बावजूद वर्तमान समय में भी कांग्रेस विधायकों की संख्या में मामले में मजबूत स्थिति में है।

कांग्रेस के विधायकों की संख्या 700 है
आपको जानकर हैरानी होगी पांच राज्यों में बुरी तरह चुनाव हारने के बावजूद भी देश भर में अभी कांग्रेस के विधायकों की संख्या 700 है। कांग्रेस के पास विपक्ष के कुल वोट शेयर का 20% है।

जानिए भाजपा के देश भर में कितने हैं विधायक
वहीं अगर वर्तमान समय में देश की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी भारतीय जतता पार्टी के देश भर में 1300 विधायक है। इससे साफ है कि कांग्रेस की स्थिति जितनी खराब नजर आ रही है वैसा असल में कुछ नहीं है। अभी भी कांग्रेस विधायकों के मामले में मजबूत स्थिति में हैं।

इतनी बड़ी संख्या में छोड़ दी कांग्रेस
देश के पांच राज्यों के चुनाव 2022 के पहले बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया जिसमें कुछ विधायक भी शामिल थें। अगरन अधिकारिक आंकड़ों की बात की जाए तो 2016-2020 के बीच हुए चुनावों मे 170 विधायक कांग्रेस छोड़कर अन्य पार्टियों में शामिल हो गए। 405 फिर से चुनाव लड़ने वाले विधायकों में से 182, जिन्होंने अपने राजनीतिक दलों को बदल कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए, इसके बाद 38 जो कांग्रेस में शामिल हुए और 25 जो पार्टी में शामिल हुए।

7 राज्यसभा सांसदों ने 2016-2020 के बीच चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस छोड़ दी
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान पांच लोकसभा सांसदों ने भाजपा को छोड़ दिया, जबकि सात राज्यसभा सांसदों ने 2016-2020 के बीच चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस छोड़ दी।

क्या कांग्रेस के फिर से उबरने की संभावना है
कांग्रेस के देश भर में अभी भी 700 विधायक हैं ऐसे में क्या कांग्रेस के फिर से उबरने की संभावना है, इसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी ने कहा
कांग्रेस की अभी भी बड़ी स्थिति है वह भाजपा के विरुद्ध खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा दिक्कत कांग्रेस के नेतृत्व की है, जो अप्रभावी दिखाई देता है। नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस को किसी तरह 'एक' तो रख पाया है लेकिन वह चुनावी राजनीति में कतई विफल साबित हो रहा है। जरूरत यह है कि कांग्रेस भाजपा के उग्र हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के सामने 'भारत के विचार' की विश्वसनीय राजनीति खड़ी करे।भाजपा के खौफ में वह जिस 'उदार हिंदुत्व' का रास्ता पकड़ रही है वही उसकी भटकन है। एक सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व ही कांग्रेस को फिर से खड़ा कर सकता है। वह नेतृत्व कहां से आएगा?












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