जानिए कैसे लालू के परिवार को जमीन और कंपनी दे दी गई कौड़ियों के भाव
लालू प्रसाद यादव की संपत्ति का पूरा ब्योरा, कैसे कंपनी को धीरे-धीरे किया गया परिवार के हवाला, सीबीआई का शिकंजा कसा
नई दिल्ली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद और उनका परिवार अवैध संपत्ति के मामले में सीबीआई और ईडी के निशाने पर है, लगातार उनके ठिकानों पर छापेमारी चल रही है, पटना में जमीन को लेकर की गई डील में पूरा परिवार घिरा हुआ है। पटना में लालू प्रसाद का जो शॉपिंग मॉल बन रहा है वह यहां का सबसे बड़ा मॉल है, जिसे मेरीडियन कॉस्ट्रक्शन लिमिटेड नाम की कंपनी बना रही है, जोकि सैयद अबू दोजान की कंपनी है। सैयद अबू दोजान सीतामढ़ी के सुरसंड विधानसभा सीट से आरजेडी विधायक हैं।

57 फीसदी हिस्सेदारी लालू के परिवार की
सीबीआई ने जिन दस्तावेजों की पड़ताल की है उसमें दोजान और लालू की बेटी चंदा के बीच एक कॉट्रैक्ट भी सामने आया है। दस्तावेज के अनुसार शॉपिंग मॉल का 57 फीसदी हिस्सा अभी निर्माणाधीन है, जोकि दानापुर के सगुना मोरे पर है। यह 57 फीसदी हिस्सा चंदा का है जबकि 43 फीसदी इस मॉल को बनाने वाली कंपनी का होगा। जो करार 5 मई 2015 को दोजान ने किया है उसमें कहा गया है कि निर्माणकर्ता जमीन के मालिक को 5 करोड़ रुपए देगा, जिसे बाद में वापस नहीं किया जाएगा, जिसमें से एक करोड़ रुपए तुरंत देने होंगे, जबकि बाकी के चार करोड़ अलग-अलग किश्तों में दिए जा सकते हैं। लेकिन अगर निर्माणकर्ता यह किश्तें देने में विफल रहता है तो उसे विलंब के लिए 18 फीसदी ब्याज देना होगा।

48 महीने पर पूरा होना था मॉल का काम
करार में आगे कहा गया है कि अगर निर्माणकर्ता 48 महीनों के भीतर मॉल बनाने में विफल रहता है तो उसे छह महीने का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है, लेकिन उसका एक फीसदी हिस्सा हर वर्ष कम हो जाएगा, ऐसे में निर्माणकर्ता का हिस्सा 43 फीसदी से कम होकर 42 फीसदी ही रह जाएगा। हालांकि इस डील के बारे में दोजान ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं जब इस प्रोजेक्ट के बारे में उनसे पूछा गया तो उनका कहना है कि इसकी कुल लागत 500 करोड़ है, पर्यावरण विभाग की ओर से हरी झंडी नहीं मिलने की वजह से इश समय यह प्रोजेक्ट रूक गया है।

रेलमंत्री रहते पहुंचाई लालू ने मदद
सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि इस जमीन को बहुत कम दाम पर बेचा गया है। कंपनी को लालू प्रसाद यादव ने बतौर रेल मंत्री 2016 में मदद पहुंचाई और पुरी व रांची में सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को मेंटेनेंस का काम दिया गया। यह कंपनी पटना के व्यापारी विनय औ विजय कोचर की है। लालू प्रसाद यादव ने 2004-2009 के बीच रेल मंत्री थे।

कैसे किया गया कंपनी समय दर समय बदलाव
सीबीआई के अनुसार यह कोचर बंधुओ को डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (डीएमसीएल) कंपनी को बेचा गया था, जोकि दिल्ली की एक कंपनी है, जिसका रजिस्ट्रेशन न्यू फ्रैंड्स कॉलोनी के पते पर है। रजिस्ट्रार ऑफ (आरओसी) कंपनी के अनुसार डीएमसीएल जोकि 10 जून 1981 में रजिस्टर की गई थी, उसमें लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप व बेटी चंदा 2014 से डायरेक्टर हैं। अगस्त 2014 से 2016 के बीच लालू की दूसरी बेटी रागिनी को इस कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया। आरओसी के अनुसार लालू की पत्नी राबड़ी देवी और उनके दोनों बेटों को कंपनी में शेयर होल्डर बनाया गया। तेजस्वी यादव ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी संपत्ति के ब्योरे में इसकी जाननकारी नहीं दी थी। आरओसी के दस्तावेजों के अनुसार डीएमसीएल ने अपना नाम दो बार बदला है, पहले 2 नवंबर 2016 को इसे लारा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड फिर 14 फरवरी 2017 को लारा प्रोजेक्टस एलएलपी कर दिया गया, इसे प्राइवेट कंपनी से बदलकर पार्टनरशिप कंपनी में तब्दील कर दिया गया।

कौड़ियों के दाम दी गई बिजली लालू के परिवार को
पटना में जिस जमीन का करार किया गया उसकी सेल डीड में लिखा है कि 105 डेसिमल खेती की जमीन को 25 फरवरी 2005 को डिलाइट कंपनी को दिया गया था। इसे 15.85 लाख रुपए में कोचर बंधों को दिया गया है। दस्तावेज में इस जमीन की खरीद के वक्त डिलाइट कंपनी के डायरेक्टर का नाम मांगी लाल रुस्तगी लिखा गया है। दस्तावेज के अनुसार राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पहले डिलाइट कंपनी में 2010-11 में शेयर धारक बने, जिसे सरला गुप्ता के शेयर से दिए गए। सरला गुप्ता राज्य सभा सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी हैं। प्रेम चंद के पास भी कंपनी के शेयर हैं। लेकिन बाद में आंकड़ों ये बताते हैं कि कंपनी के 1101 शेयर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खाते में डाल दिए गए। जिस वक्त यह शेयर राबड़ी और तेजस्वी को दिए गए उस वक्त कंपनी की कुल संपत्ति 2010-11 और 2013-14 के बीच 22866748 व 22926336 रुपए थी। सीबीआई ने जिन दस्तावेजों को खंगाला है उसके अनुसार कंपनी का मालिकाना हक लालू के परिवार को महज 402000 रुपए में दे दिया गया।

कंपनी को लालू के परिवार के नाम किया गया
लालू के परिवार को डिलाइट कंपनी का पूरा मालिकाना हक दे दिया गया, दस्तावेज के अनुसार जिस वक्त कंपनी का पूरा मालिकाना हक लालू के परिवार को दिया गया उस वक्त कंपनी के डायरेक्टर देवकी नंदन तुलसयान और गौरव गुप्ता थे, जिन्होंने 11 फरवरी 2014 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जबकि कंपनी के अन्य डायरेक्टर विजय पाल त्रिपाठी ने 26 जून 2014 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 6 जनवरी 2014 को तेज प्रताप को कंपनी का अडिशनल डायरेक्टर बनाए गए, जबकि चंदा को 26 जून 2014 व रागिनी को 5 अगस्त 2016 को कंपनी में शामिल किया गया।

इसी वर्ष अलग हुई हैं लालू की बेटी
जिस वक्त कंपनी का नाम 14 फरवरी 2017 को लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपीकिया गया उस वक्त लालू की बेटी ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया, जबकि राबड़ी देवी व उनके दो बेटों को कंपनी का साझेदार बनाया गया। जांच के दौरान सीबीआई सूत्रों का कहना है कि डीएमसीएल कंपनी के उद्देश्य को भी आरओसी के आंकड़ों में बदल दिया गया। शुरुआत में कंपनी को आयात-निर्यात के लिए रजिस्टर कराया गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर निर्माण की कंपनी बना दिया गया।












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