25 हजार करोड़ के अनुपूरक बजट में 6 हजार करोड़ शिवपाल के विभागों को
लखनऊ। 17 अगस्त की शाम को लखनऊ के ताज होटल में एक मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिवपाल भी शिरकत करने पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश सम्मान समारोह- 2016 की ट्रॉफियां जब मीडिया के होनहारों को थमाईं गईं तो उनसे कमेंट भी लिए गए। जिसमें से कई ने खुद ब खुद जवाब दे दिया कि शिवपाल ने एक मुद्दा तो दे ही दिया है....हेडलाइन्स के लिए, एनालिसिस के लिए।
शिवपाल के चेहरे पर मुस्कान पर जवाब नहीं

उस कार्यक्रम में मैं भी मौजूद था। शिवपाल के चेहरे पर हल्की-हल्की मुस्कान थी पर कोई जवाब नहीं था। मतलब साफ है कि विवाद है, जिसे दबाने की, छिपाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि सूबे के मुखिया अखिलेश यादव ऑल इज वेल बता रहे हैं। हो भी सकता है।
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लेकिन अनुपूरक बजट में शिवपाल के विभागों पर इस कदर मेहरबानी चाचा भतीजे के बीच मचे सियासी घमासान का असर है या फिर सत्ता के करीब पहुंचने के लिए रास्ते सुधारने का प्रयास। कवायद की वजह जो भी है ये तो सूबे के मुखिया जानते हैं या फिर उनके चाचा यानि की शिवपाल।
कल पेश होगा अनुपूरक बजट
जी हां कल यानि की 23 अगस्त को पेश होने जा रहे अनुपूरक बजट में पच्चीस हजार करोड़ के प्रस्तावों को शामिल किया गया है। जिसमें राज्य सरकार के संसाधनों के जरिए 14 हजार करोड़ आएंगे, शेष रकम केंद्रीय सहायता एवं अन्य माध्यमों से आएगी।
'अब याद आईं खस्ता हाल सड़कें'
वर्ष 2016-17 में तकरीबन 25 हजार करोड़ के अनुपूरक बजट में सपा सरकार करीबन 5 हजार करोड़ सड़कों के लिए ही आवंटित करने जा रही है। दरअसल समीकरण सुधारने के लिए तमाम रास्तों पर सूबे की सरकार राजनीति का रंगरोगन करना चाहती है। लेकिन सवाल उठ चुका है कि पारी के आखिरी दौर में याद आया? महज सियासत के इतर इसे क्या कहा जाए?
'नदियों के सुधार के लिए लगभग 1000 करोड़'
दूसरी ओर लखनऊ की गोमती, वाराणसी में वरुणा एवं मथुरा में यमुना नदियों में सुधारात्मक कार्यों के लिए तकरीबन 1000 करोड़ से भी अधिक मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आपको बताते चलें कि ये तमाम काम भी शिवपाल यादव के दूसरे महकमों सिंचाई के निर्देशन में ही हो रहे हैं।












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