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CJI BR Gavai: अपने रिटायरमेंट को लेकर क्यों भड़के चीफ जस्टिस गवई? खुलेआम सरकार की लगा दी क्लास

CJI BR Gavai: ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की ओर से मामले में स्थगन की मांग को सख्ती से खारिज किया। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने इस मामले को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने अदालत के समक्ष रखा। इस पर सीजेआई गवई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या सरकार उनके रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है?

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत पहले ही दो बार केंद्र के अनुरोध पर सुनवाई आगे बढ़ा चुकी है, लेकिन अब हर बार नई वजह बताकर केस को खींचना न्याय के साथ अन्याय है। इस दौरान उन्होंने सरकार के रवैये को 'कोर्ट के साथ अनुचित' बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गंभीरता से काम किया है ताकि जल्द से जल्द फैसला सुनाया जा सके।

CJI BR Gavai

"कितनी बार और मानें आपकी बात?"

सीजेआई बीआर गवई ने कहा, "हम दो बार पहले ही आपकी बात मान चुके हैं, अब और कितनी बार? अगर आप सुनवाई 24 नवंबर के बाद करना चाहते हैं, तो साफ-साफ बताइए। यह कोर्ट के साथ अन्याय है। हर बार आप नई वजह लेकर आते हैं और सुनवाई टालने की कोशिश करते हैं। आपके पास इतने वकील हैं, फिर भी आप आधी रात को बड़ी बेंच की मांग करते हैं।"

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उन्होंने आगे कहा कि यह रवैया अदालत के समय और गंभीर मामलों के साथ न्याय नहीं करता। "हमने इस केस को ध्यान से सुनने के लिए अन्य सभी मामले स्थगित कर दिए थे। हमने सोचा था कि वीकेंड पर फैसला लिख देंगे, लेकिन अब आप फिर से देरी कर रहे हैं," सीजेआई ने टिप्पणी की।

पहले भी जताई थी नाराजगी

इससे पहले सोमवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अर्जी पर नाराजगी जताई थी, जिसमें ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 से जुड़ी याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजने की मांग की गई थी। सीजेआई गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा था कि सरकार ने यह मांग सुनवाई के आखिरी चरण में उठाई, जो बेहद अनुचित है। अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी जब पूरा मामला लगभग सुनवाई के अंत तक पहुंच चुका था।

बड़ी बेंच की मांग पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब याचिकाकर्ताओं की अंतिम दलीलें सुन ली गई हैं, तब बड़ी बेंच की मांग करना अदालत की प्रक्रिया को कमजोर करने जैसा है। पीठ ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में अटॉर्नी जनरल ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी और निजी कारणों से स्थगन मांगा था। अब सुनवाई पूरी होने के बाद इस तरह की मांग अस्वीकार्य है।

सीजेआई बीआर गवई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे केंद्र सरकार मौजूदा पीठ से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "जब हमने एक पक्ष की पूरी दलीलें सुन लीं और अटॉर्नी जनरल को निजी कारणों से राहत दी, तब इस तरह की नई मांग अदालत की कार्यवाही को बाधित करती है।"

23 नवंबर को रिटायर होंगे CJI गवई

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके कार्यकाल के आखिरी दिनों में यह मामला अदालत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब इस पर जल्द अंतिम सुनवाई कर सकता है ताकि निर्णय में और देरी न हो।

यह पूरा मामला ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 से जुड़ा है, जिसके प्रावधानों को लेकर कई बार अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा है। अब देखना होगा कि कोर्ट इस पर अंतिम फैसला कब सुनाती है और केंद्र सरकार की दलीलों पर उसका रुख क्या रहता है।

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