देश के 52वें CJI BR Gavai के पास है कौन-कौन सी डिग्री, कहां से की है पढ़ाई? आसान नहीं था चीफ जस्टिस तक का सफर!
CJI BR Gavai Academic Profile: भारत के एक वकील ने देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर एक जूता फेंक दिया। वकील न्यायाधीश द्वारा हिंदू भगवान के बारे में किए गए बयान से नाराज थे। राकेश किशोर ने यह हमला दिल्ली की अदालत में किया, जिसे पूरे भारत में गंभीर सार्वजनिक अपमान और सुरक्षा उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
तीन वकीलों ने बीबीसी को अदालत में मौजूद होने की पुष्टि की और बताया कि जूता न्यायाधीश पर फेंका गया। जिसमें से एक ने कहा कि यह "मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायाधीश के पास से टकराया और उनके पीछे गिर गया।" इस विवाद ने देश के 52वें CJI को चर्चाओं में ला दिया है।

न्यायमूर्ति गवई का जीवन और करियर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन रास्तों पर चल रहे हैं। उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण फैसले, उनकी शिक्षा और न्यायपालिका में उनके योगदान ने उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
न्यायमूर्ति भुशन रामकृष्ण गवई (B R Gavai), जिन्होंने 14 मई 2025 को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, भारतीय न्यायपालिका में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। उनकी शपथ ग्रहण एक ऐतिहासिक पल है, क्योंकि वे पहले बौद्ध समुदाय से आने वाले और अनुसूचित जाति से संबंधित दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं, जिन्होंने यह उच्चतम पद प्राप्त किया।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई का जीवन परिचय और शिक्षा
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ। एक सामान्य परिवार से आने वाले गवई जी ने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय न्यायपालिका में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने 16 मार्च, 1985 को वकालत की शुरुआत की और अपना करियर कानूनी क्षेत्र में स्थापित किया।
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न्यायमूर्ति गवई ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमरावती में पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए नागपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने Bachelor of Arts और Bachelor of Laws (B.A.LL.B.) की डिग्री प्राप्त की। उनके शिक्षा जीवन में स्पष्टता और समर्पण था, जो आगे चलकर उनके पेशेवर जीवन में झलका।
संघर्ष और सफलता की शुरुआत
गवई ने 1987 से 1990 तक बंबई हाईकोर्ट में स्वतंत्र वकील के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने नागपुर बेंच में मुख्य रूप से वकालत करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक और संविधानिक कानून में गहरी समझ और अनुभव हासिल किया। गवई जी का मानना था कि कानूनी पेशे में सच्चाई और न्याय की रक्षा करना सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।
गवई का पेशेवर जीवन
न्यायमूर्ति गवई ने न केवल न्यायालय में अपने काम से नाम कमाया, बल्कि वे कई सरकारी और स्वायत्त निकायों के लिए भी वकील रहे। नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील के रूप में उनके योगदान ने उन्हें एक भरोसेमंद और ईमानदार वकील के रूप में पहचान दिलाई। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न निगमों और स्वायत्त निकायों के लिए कानूनी सलाह दी और उनके अधिकारों की रक्षा की।
उच्च न्यायालय में एक नई शुरुआत
गवई को 17 जनवरी 2000 को नागपुर बेंच का सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों में अपनी कड़ी मेहनत और निष्ठा से न्याय दिलवाया। 14 नवंबर 2003 को बंबई उच्च न्यायालय में उन्हें अतिरिक्त न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया, और 12 नवंबर 2005 को वे स्थायी न्यायधीश बने।
न्यायमूर्ति गवई ने मुंबई, नागपुर, और औरंगाबाद बेंचों में कई प्रमुख मामलों की सुनवाई की और समाज के विभिन्न तबकों के हितों की रक्षा की। उनके फैसले हमेशा न्याय के पक्ष में रहे, चाहे वह किसी भी मामले से जुड़ा हो।
CJI तक का सफर
24 मई 2019 को न्यायमूर्ति गवई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश नियुक्त किया गया। उनका न्यायिक सफर अब तक अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है, और उन्हें कई ऐतिहासिक फैसलों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिला। उनके द्वारा लिखे गए करीब 300 निर्णय भारतीय न्यायपालिका के विकास में मील का पत्थर साबित हुए हैं।
न्यायमूर्ति गवई ने लगभग 700 बेंचों का हिस्सा बनते हुए संविधान, नागरिक अधिकारों, वाणिज्यिक विवादों और पर्यावरण कानून जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। वे हमेशा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और न्याय की स्थापना में विश्वास करते हैं। जस्टिस संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के बाद बी आर गवई ने देश के 52वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली।
न्यायमूर्ति गवई के महत्वपूर्ण फैसले
अनुच्छेद 370 की समाप्ति
न्यायमूर्ति गवई ने पांच न्यायधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा बनकर अनुच्छेद 370 की समाप्ति पर ऐतिहासिक निर्णय दिया। इस फैसले ने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया और क्षेत्र के पुनर्गठन की प्रक्रिया को मंजूरी दी। यह निर्णय भारतीय राजनीति और न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
प्रशांत भूषण मामले में निर्णय
न्यायमूर्ति गवई ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मामला स्वतंत्रता व्यक्त और न्यायिक जवाबदेही से संबंधित था, और गवई जी ने इसमें न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच सही संतुलन स्थापित किया।
नोटबंदी योजना का समर्थन
2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी योजना को लेकर न्यायमूर्ति गवई ने बहुमत के फैसले में इसका समर्थन किया। उन्होंने इसे संविधानिक रूप से वैध ठहराया, यह साबित करते हुए कि केंद्र सरकार का यह कदम राष्ट्रहित में था।
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