'क्या वो आपके दोस्त हैं, अब भी जज है' –CJI गवई ने वकील को लगाई फटकार, कहा- जस्टिस वर्मा कहिए, सिर्फ वर्मा नहीं
Justice Yashwant Varma: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (21 जुलाई) को एक दिलचस्प बहस देखने को मिली जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने वकील मैथ्यू जे. नेडुमपारा को सार्वजनिक रूप से टोका। वजह थी -उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को केवल "वर्मा" कहकर संबोधित किया था।
दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा इस समय एक विवाद में फंसे हुए हैं, जिसमें मार्च 2025 में उनके लुटियंस स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद सैकड़ों नोटों के आधे जले हुए बंडल बरामद हुए थे। उसी मामले में वकील नेडुमपारा ने एक याचिका लगाई थी जिसमें उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

जब वकील ने कहा- 'अब वर्मा तो खुद यही चाह रहे हैं कि FIR हो'
जब नेडुमपारा ने कोर्ट में कहा, ''अब वर्मा तो खुद यही चाह रहे हैं कि एफआईआर हो, जांच हो...'', तब CJI गवई ने तुरंत उन्हें टोका और कहा, ''क्या वो आपके दोस्त हैं? वो अभी भी जज हैं। कैसे संबोधित कर रहे हैं आप उन्हें? कुछ शिष्टाचार रखिए। वो अब भी न्यायाधीश हैं। जस्टिस वर्मा कहिए, सिर्फ 'वर्मा' नहीं।''
वकील नेडुमपारा ने पलटकर जवाब दिया, ''मुझे नहीं लगता कि उस पद की महानता उन पर लागू होती है। लेकिन मामला लिस्ट होना चाहिए।'' इस पर CJI गवई नाराज हो गए और बोले, "कोर्ट को निर्देश मत दीजिए।"
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस याचिका को खारिज कर दिया था
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जो मार्च में नेडुमपारा ने दायर की थी लेकिन तब सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था क्योंकि उस समय इन-हाउस जांच चल रही थी। इसके बाद मई में सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी याचिका भी निपटा दी और सलाह दी कि पहले केंद्र सरकार के सामने FIR के लिए अनुरोध किया जाए।
जस्टिस यशवंत वर्मा की कोठी में आग लगने की घटना के बाद जब उनके आवास की तलाशी ली गई तो वहां से संदिग्ध नकदी के बंडल मिले, जिससे यह पूरा मामला सुर्खियों में आया।
जस्टिस यशवंत वर्मा कैशकांड की टाइमलाइन
- दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले (30, तुगलक क्रेसेंट) में 14 मार्च 2025 की देर रात आग लग गई। फायर ब्रिगेड और पुलिस ने पहुंचकर आग बुझाने के बाद कमरे में रखे जले हुए नोटों का ढेर देखा -जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया।
- CJI ने 22 मार्च को 3 सदस्यीय जजों की संस्कृति समिति गठित की, जिसमें पंजाब-हरियाणा HC के CJI शील नागु, हिमाचल के CJI जी.एस. संधावालिया और कर्नाटक HC की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली HC 24 मार्च को जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्यों से हटा दिया।
- समिति ने 6 मई को रिपोर्ट CJIको सौंप दी। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि आग वाली जगह से नकद को इधर‑उधर ले जाया गया था।
- 19 जून को रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि इस तरह के दावे "सीरियस मिसकंडक्ट" हैं और ऐसी परिस्थितियों में जस्टिस वर्मा को हटा देना ही उचित है।
- जस्टिस यशवंत वर्मा ने दावा किया कि वह अंदरूनी प्रक्रियाओं की वैधानिकता पर संदेह करते हैं और उचित सुनवाई का हक नहीं मिला। उन्होंने कहा, नोट मैंने नहीं रखे थे, नकदी सरकारी रखरखाव वाले कमरे में कैसे पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए। यह भी आरोप लगाया कि कई विवरण लीक कर उनकी गरिमा को हानि पहुंचाई गई है।












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