CID ने किया 1000 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, दिल्ली से UP तक फैला है ये गैंग, जानें कैसे करता है जालसाजी
CID News: पश्चिम बंगाल में सीआईडी (CID) ने देश के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह में एक का भंडाफोड़ किया है। वहीं 2 मास्टरमाइंड को गिरफ्तार भी किया गया है। ये साइबर फ्रॉड का गैंग हजारों करोड़ों के घोटाले में शामिल है। इस गैंग का साम्राज्य उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-हरियाणा तक फैला हुआ है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ये गिरोह लोगों से पैसा ठगते थे। सीआईडी ने गिरोह के दो मास्टरमाइंड को दिल्ली और हरियाणा से गिरफ्तार किया है। इन दोनों आरोपियों को मंगरवार (23 जुलाई) को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से इन्हें 12 दिनों की सीआईडी हिरासत में भेज दिया गया है।

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कैसे करता था ये गिरोह पैसों की ठगी
इंडिया टुडे के मुताबिक, सीआईडी के सूत्रों का दावा है कि है कि आरोपी का गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम, फेसबुक, मैसेंजर और व्हाट्सएप पर एक्टिव रहता था। वे सोशल मीडिया पर पहले लोगों की रैकी करते थे और फिर टारगेट करके उन प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाते थे और पैसे ठगते थे।
सूत्रों के मुताबिक, रैकी के बाद जिन सोशल मीडिया ग्रुप को कई अन्य ग्रुप्स में जोड़ा जाता और फिर क्रिप्टो में इन्वेस्टमेंट करने के लिए बोला जाता है। उन्हें साझा दिया जाता है कि वो ऐसा करके कम वक्त में बहुत सारा पैसा कमा सकते हैं। जिससे लोग इसके झासे में आ जाते हैं और फिर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर फंस जाते हैं।
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क्यों क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करते थे जालसाज
सीआईडी के मुताबिक ये सारा काम एक बनी बनाई प्लानिंग के तहत की जाती है। सबकुछ स्क्रिप्ट के मुताबिक चलता है। ग्रुप का एडमिन सबसे पहले इन्वेस्ट प्लान देते हैं। इनके कुछ सेट किए हुए मेंबर से इसमें अच्छे रेटिंग भी लिखवाए जाते हैं ताकि प्रॉफिट की बात सोचकर लोग इसके झासे में आ जाए। एक बार जब कोई इच्छुक सदस्य क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट कर देता है तो यह पैसा विदेश में चला जाता है। घोटालेबाजों ने यह तरीका इसलिए चुना है क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसा इन्वेस्ट करना बहुत मुश्किल है।












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