Rajasthan Ebola Case: राजस्थान में पहली बार इबोला का संदिग्ध मामला, युगांडा से आई महिला अस्पताल में भर्ती
Rajasthan Ebola Case: बेंगलुरु और अहमदाबाद के बाद अब राजस्थान में भी खतरनाक इबोला वायरस (Ebola Virus) का एक बेहद संदिग्ध मामला सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। युगांडा (Uganda) से राजस्थान घूमने आई एक विदेशी महिला में इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते गंभीर लक्षण पाए गए हैं।
यह महिला शुक्रवार 5 जून 2026 को सुबह एयर अरेबिया एयरलाइंस (Air Arabia Airlines) की फ्लाइट से शारजाह के रास्ते जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी। एयरपोर्ट पर थर्मल स्कैनिंग और रूटीन मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान डॉक्टरों की टीम को उसमें संदिग्ध लक्षण दिखे, जिसके बाद तुरंत हरकत में आते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

RUHS अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में निगरानी
संदिग्ध महिला को तुरंत जयपुर के राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे अन्य मरीजों से पूरी तरह अलग (आइसोलेशन वार्ड) में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा विभाग विशेष प्रोटोकॉल के तहत महिला की निगरानी कर रहे हैं।
अस्पताल के अनुसार, महिला के रक्त के नमूने (Samples) तुरंत विशेष विमान या कूरियर के जरिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे की लैब में जांच के लिए भेज दिए गए हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि इस जांच की अंतिम रिपोर्ट आज देर रात या कल (शनिवार) सुबह तक आ जाएगी।
WHO ने क्यों घोषित की है 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी'? दुनिया में बढ़ रहा इबोला का खतरा
अफ्रीकी देशों में इस वक्त इबोला का बेहद खतरनाक और नया 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) वेरिएंट तेजी से पैर पसार रहा है। इस वेरिएंट की गंभीरता को देखते हुए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' (PHEIC) घोषित किया है। वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में इबोला संक्रमित मरीजों की संख्या 900 के करीब पहुंच चुकी है।
खासतौर पर अफ्रीकी देशों में इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। कांगो में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई हैं। इबोला वायरस का 'बुंडीबुग्यो वेरिएंट' तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय माना है। हालांकि भारत में अब तक इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला दर्ज नहीं किया गया है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक बेहद गंभीर और कई मामलों में जानलेवा वायरल बीमारी है। यह वायरस इंसानों और कुछ जंगली जानवरों को संक्रमित कर सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से यह बीमारी फैलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला कोविड-19 या फ्लू की तरह हवा के जरिए आसानी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, मल, पेशाब, लार, पसीने या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इबोला के प्रमुख लक्षण के रुप में तेज बुखार, गंभीर कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, उल्टी और दस्त, पेट दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में दिखाएं। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव
कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इबोला वायरस की मृत्यु दर 25 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक हो सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस का कौन सा स्ट्रेन है और मरीज को कितनी जल्दी इलाज मिल पाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और उचित इलाज मिलने पर मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
भारत सरकार की एडवाइजरी
इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार पहले ही कई अहम दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। सरकार ने लोगों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे प्रभावित देशों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। इसके अलावा एयरपोर्ट और अन्य एंट्री प्वाइंट्स पर निगरानी बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की जांच करने और अज्ञात बुखार वाले मरीजों की विशेष स्क्रीनिंग के निर्देश दिए गए हैं।
1976 में पहली बार सामने आया था इबोला
इबोला वायरस पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले दर्ज किए गए थे। कांगो में जिस क्षेत्र के पास यह वायरस पाया गया था, वहां बहने वाली इबोला नदी के नाम पर ही इस बीमारी का नाम रखा गया।
तब से लेकर अब तक इबोला कई बार विभिन्न अफ्रीकी देशों में बड़े प्रकोप का कारण बन चुका है। फिलहाल राजस्थान में सामने आया मामला केवल संदिग्ध है और स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिला वास्तव में इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं।














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