Chunavi Kisse: 1971 के चुनावों में भी दिल्ली का मुद्दा थी 'शराब', जब वाजपेयी की फोटो के साथ लगे थे ऐसे पोस्टर
1971 Election Chunavi Kisse: लोकसभा चुनाव 2024 में दिल्ली के अंदर एक बार शराब का मुद्दा जमकर उठाया जा रहा है। दिल्ली की सत्तारूढ़ दल आम आदमी पार्टी (AAP) को भाजपा कथित शराब नीति घोटाले में घेरने में जुटी है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है, जब चुनावों में शराब का मुद्दा उठा हो।
इससे पहले 1971 के चुनावों में भी ऐसी ही गूंज दिल्ली की चारों ओर सुनाई दे रही थी, जब राजधानी में भारतीय जनसंघ ने शराब बिक्री का मुद्दा उठाकर कांग्रेस को घेरने का काम किया था।

चुनावी किस्सों की इस सीरीज में आज बात उसी शराब के मुद्दों पर होगी, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पोस्टरों से दिल्ली की गलियां पटी हुई थी और शराब बिक्री को लेकर उस वक्त की इंदिरा सरकार से जमकर सवाल पूछे थे।
हालांकि उस वक्त का मुद्दा शराब घोटाला नहीं बल्कि दिल्ली की गली-गली और मोहल्लों में बिकने वाली शराब थी। और भारतीय जनसंघ शराब बिक्री को बंद करने के ऐलान के साथ दिल्ली की जनता से वोट मांग रही थी।
अटल जी के पोस्टरों से पटा था पूरा दिल्ली
1971 के उस चुनावी सरगर्मियों के बीच भारतीय जनसंघ ने धड़ल्ले से शराब बिक्री को बड़ा मुद्दा बनाया था और अटल बिहारी बाजपेयी की फोटो और अपील के साथ पोस्टर चस्पा किए थे, जिसमें वोटरों से अपील करते हुए कहा गया था कि "वोट देने से पूर्व आप सब उम्मीदवारों से पूछिए, आपके क्षेत्र की शराब की दुकान को तत्काल बंद करने के लिए क्या करेंगे?"
जानकारों की मानें तो उस दौरान जनसंघ ने इसे चुनावी मुद्दा बनाते हुए दिल्ली की गली-मोहल्लों में खुलने वाली शराब की दुकानों का विरोध किया था। साथ ही शराब के ठेकों को बंद कराने का वादा किया था। इसके अलावा जो दुकानें होगी उनके जल्द बंद होने के समय को लेकर भी ऐलान किया था।
वहीं 25 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए शराब बिक्री पर पाबंदी और धार्मिक स्थलों से शराब की दुकानों की दूरी की भी बात कही गई थी।
महिलाओं का मिला समर्थन
बता दें कि शराब के कारण परिवारों को नुकसान हो रहा था। महिलाएं परेशान हो रही थीं। जिसके बाद शराब बिक्री को बंद करने का मुद्दा उठा तो महिलाओं का भरपूर समर्थन मिलना शुरू हुआ।
जानिए कैसा रहा था 1971 का चुनावी परिणाम
देश में साल 1971 में 518 सीटों पर पांचवां चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस ने फिर एक बार बड़ी जीत हासिल की। कांग्रेस को 352 सीटें मिलीं थी, जबकि सीपीएम को 25, सीपीआई को 24, डीएमके को 23 और जनसंघ को 21 सीटों पर जीत हासिल हुई।












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