Kerala Nuns Row: 'हमसे जबरन बयान लिया गया', धर्मांतरण मामले में महिला ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
Kerala Nuns Row: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों के मामले ने प्रदेश की राजनीति से लेकर समाज तक में हलचल मचा दी है। दुर्ग रेलवे स्टेशन से हुई गिरफ्तारी के बाद बजरंग दल की शिकायत पर पुलिस ने ननों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। लेकिन अब इस केस में चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। जिस महिला को आधार बनाकर पुलिस ने यह कार्रवाई की थी, उसने सामने आकर पुलिस और एक हिंदूवादी संगठन की महिला कार्यकर्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का कहना है कि उसे पुलिस स्टेशन के अंदर धमकाया गया, मारा गया और मजबूर किया गया कि वह ननों के खिलाफ बयान दे। यही नहीं, उसने साफ कहा कि दोनों नन निर्दोष हैं और वह अपनी मर्जी से उनके साथ नौकरी के लिए जा रही थी। उसने साफ कहा कि दोनों नन निर्दोष हैं और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। इस खुलासे के बाद इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं और पुलिस की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं।

दुर्ग रेलवे स्टेशन से हुई थी गिरफ्तारी
पिछले शुक्रवार को दुर्ग रेलवे स्टेशन से केरल की 2 नन, प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस और उनके साथ सुखमन मंडावी को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई बजरंग दल के एक कार्यकर्ता की शिकायत पर की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ननों ने नारायणपुर की तीन महिलाओं को जबरन धर्मांतरण कराया और उनकी तस्करी करने की कोशिश की। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और अनैतिक व्यापार अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी।
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'पुलिस और कार्यकर्ताओं ने दबाव डाला'
नारायणपुर जिले की 21 साल की आदिवासी महिला, जिसे इस मामले में पीड़ित बताया जा रहा है, ने अंग्रेजी अखबार से बातचीत में खुलासा किया कि पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी। महिला का कहना है कि ज्योति शर्मा नाम की एक महिला, जो एक हिंदूवादी संगठन से जुड़ी है, उसे पुलिस स्टेशन के अंदर लेकर गई और दो बार उसके चेहरे पर मारा। महिला ने बताया, "ज्योति शर्मा ने धमकी दी कि अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी तो वे मेरे भाई-बहनों को जेल में डाल देंगे और उन पर हमला करेंगे। इसी डर से पुलिस ने ननों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी।" महिला ने आरोप लगाया कि GRP ने उसका बयान दर्ज ही नहीं किया। पुलिस ने जो रिपोर्ट दर्ज की, वह बजरंग दल के सदस्यों के बताए गए तथ्यों के आधार पर ही थी।
ज्योति शर्मा ने दी सफाई
इस मामले में जब ज्योति शर्मा से सवाल किया गया तो उन्होंने सभी आरोपों से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैंने किसी को हाथ नहीं लगाया। मैं जब वहां पहुंची तो सभी पहले से ही पुलिस स्टेशन के अंदर थे। क्या पुलिस मुझे किसी को छूने देगी? यह सब झूठ है। पहले कहा गया कि मैंने ननों को मारा, अब कहा जा रहा है कि मैंने महिलाओं को धमकाया, यह भी गलत है।"
महिला ने बताई गिरफ्तारी की कहानी
महिला ने बताया कि गिरफ्तारी वाले दिन वह और नारायणपुर के ओरछा की दो अन्य महिलाएं सुबह छह बजे दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचीं। उनके साथ सुखमन मंडावी भी था। मंडावी उनके चर्च से जुड़ा है और भाई जैसा है। महिला के मुताबिक, "हम वहां नौकरी के लिए जा रहे थे। मैंने अपने माता-पिता से भी इसकी अनुमति ली थी। सुबह नौ बजे ननें स्टेशन पर आईं। तभी अचानक बजरंग दल के लोग और GRP पुलिस वहां आ गए और हमें पकड़कर थाने ले गए।"
महिला ने बताया कि थाने में उनसे काफी सख्ती से पूछताछ की गई। उसने बताया, "हमें बहुत डांटा गया और ज्योति शर्मा ने मुझे दो बार चेहरे पर मारा। उन्होंने कहा कि जो हम कह रहे हैं वही कहो, वरना तुम्हारे परिवार को नहीं छोड़ेंगे।"
ननों को बचाने की अपील
महिला ने साफ कहा कि नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस पूरी तरह निर्दोष हैं। उसने कहा, "कृपया उन्हें रिहा कर दो, उन्होंने कोई गलती नहीं की है। मैं अपनी इच्छा से उनके साथ जा रही थी। मुझे नौकरी चाहिए थी और मेरे माता-पिता भी इसके लिए राजी थे।"
महिला ने आगे बताया कि गिरफ्तारी के बाद उसे दुर्ग में एक शेल्टर होम में रखा गया। वहां पांच दिन रहने के बाद वह अपने घर लौटी। उसने कहा, "पुलिस ने मेरी कोई बात नहीं सुनी। उन्होंने मेरे सामने केवल बजरंग दल के लोगों की बातों के आधार पर FIR दर्ज कर दी।"
महिला की आर्थिक स्थिति
महिला ने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में भी बताते हुए कहा, "मैं अपने माता-पिता और चार बहनों के साथ रहती हूं। मैं दिहाड़ी मजदूरी करके हर दिन करीब 250 रुपये कमाती हूं। मंडावी ने मुझे ननों के लिए खाना बनाने और मरीजों की देखभाल करने की नौकरी का ऑफर दिया था। उन्होंने कहा था कि 10 हजार रुपये के साथ खाना, कपड़े और रहने की व्यवस्था भी दी जाएगी। मुझे यह नौकरी अच्छी लगी, इसलिए मैं उनके साथ जाने के लिए तैयार हो गई।"
महिला ने कहा कि उसने दसवीं तक पढ़ाई की है और रोज़ाना 9 किलोमीटर साइकिल चलाकर काम पर जाती थी। उसने बताया कि गिरफ्तारी के दिन जब ज्योति शर्मा ने उसे मारा तो ननों में से एक ने उसे ढांढस बंधाया और कहा, "डर मत, मैं तुम्हारे साथ हूं।' महिला ने बताया कि नन ने ज्योति शर्मा से कहा, "हमें मारो, लेकिन इन लड़कियों को मत मारो।"
'कानून अपना काम कर रहा है'
मानव तस्करी और धर्म परिवर्तन के आरोप में छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार की गई केरल की दो ननों के बारे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने कहा, "कानून अपना काम कर रहा है।"
#WATCH | Delhi: On two Kerala nuns arrested in Chhattisgarh on charges of trafficking and religious conversion, Chhattisgarh Chief Minister Vishnu Deo Sai says, "The law is doing its job." pic.twitter.com/1H9KMrQOgV
— ANI (@ANI) August 1, 2025
DGP ने कुछ कहने से किया इनकार
इस पूरे मामले में जब छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण गौतम से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
महिला के आरोपों के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसने दावा किया कि जीआरपी ने उसकी बात को पूरी तरह अनदेखा कर दिया और बजरंग दल के लोगों की शिकायत को ही आधार बना लिया। यह मामला अब केवल पुलिस जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। कई नेता ननों से जेल में जाकर मुलाकात कर चुके हैं और इस पूरे प्रकरण को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।
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