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कर्नाटक में धर्मस्थल कैसे बना मौत का तीर्थ? दफन 100 से ज्यादा महिलाओं की चीखें! 4‑फीट गहराई में कंकाल ही कंकाल

Karnataka Dharmasthala Mass Graves: कर्नाटक के मंगलुरु जिले स्थित पवित्र तीर्थस्थल 'धर्मस्थल' में सामूहिक दफन कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। एक पूर्व सफाई कर्मचारी के सनसनीखेज खुलासे के बाद शुरू हुई विशेष जांच दल (SIT) की जांच में गुरुवार, 31 जुलाई 2025 को बड़ी सफलता मिली। नेत्रावती नदी के स्नान घाट के पास साइट नंबर 6 पर 4 फीट गहराई में आंशिक मानव कंकाल के अवशेष बरामद हुए।

यह पहली बार है जब इस मामले में ठोस फोरेंसिक साक्ष्य मिले हैं। शिकायतकर्ता के दावों ने धर्मस्थल को सुर्खियों में ला दिया है, जहां उसने 1998 से 2014 के बीच सैकड़ों महिलाओं और नाबालिगों के शव दफनाने की बात कही थी। आइए, इस मामले की पूरी टाइमलाइन और जांच के ताजा अपडेट्स को जानें...

Karnataka Dharamsthal Mass Grave

Karnataka Dharmasthala Mass Graves Timeline: धर्मस्थल सामूहिक दफन कांड टाइमलाइन

1998-2014: सनसनीखेज दावे और गायब होती जिंदगियां

एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया कि 1998 से 2014 के बीच उसे धर्मस्थल और आसपास के इलाकों में सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि ज्यादातर शव महिलाओं और नाबालिगों के थे, जिन पर यौन उत्पीड़न और हिंसक हमले के निशान थे। इस दौरान धर्मस्थल में कई लोग, खासकर महिलाएं, लापता हुईं, लेकिन कोई ठोस जांच नहीं हुई। 2012 का सौजन्या बलात्कार और हत्या मामला भी सुर्खियों में रहा, जहां 17 साल की छात्रा का शव सुनसान जगह पर मिला था।

4 जुलाई 2025: शिकायत दर्ज, खुलासा हुआ

शिकायतकर्ता ने धर्मस्थल पुलिस स्टेशन और दक्षिण कन्नड़ के SP को अपनी शिकायत दी। उसने बताया कि उसे बलात्कार और हत्या के शिकार लोगों के शव दफनाने के लिए धमकाया गया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 211(ए) के तहत FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने कुछ कंकाल अवशेष भी पेश किए, जिन्हें उसने खुद खोदकर निकाला था।

11 जुलाई 2025: शिकायतकर्ता का कोर्ट में बयान

  • शिकायतकर्ता बेलथांगडी कोर्ट में पेश हुआ और भारतीय न्याय संहिता (BNS) धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराया।
  • उसने दावा किया कि उसने 13 संदिग्ध दफन स्थलों की पहचान की है, जहां शव दफनाए गए। उसने अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग की।


19 जुलाई 2025: SIT का गठन

  • कर्नाटक सरकार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) गठन किया।
  • SIT का नेतृत्व DGP (आंतरिक सुरक्षा) प्रणब मोहंती कर रहे हैं, जिसमें DIG एमएन अनुचेथ, DCP सौम्यलता, और SP जितेंद्र कुमार दयामा शामिल हैं।
  • 20 पुलिसकर्मियों को जांच में सहायता के लिए तैनात किया गया। SIT को धर्मस्थल और पूरे राज्य में इससे जुड़े सभी मामलों की जांच का जिम्मा दिया गया।

25-27 जुलाई 2025: जांच शुरू, शिकायतकर्ता से पूछताछ

  • SIT ने मंगलुरु के कादरी, मल्लिकट्टे में PWD बंगले पर कैंप कार्यालय स्थापित किया।
  • शिकायतकर्ता को 26 और 27 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उसने 15 संदिग्ध स्थलों की जानकारी दी, जिनमें से 8 नेत्रावती नदी के किनारे, 4 हाईवे के पास, और 2 कण्याडी इलाके में हैं। शिकायतकर्ता ने चेहरा ढककर और वकीलों के साथ बयान दर्ज कराए, ताकि उसकी पहचान गोपनीय रहे।

28 जुलाई 2025: खोदाई शुरू

SIT ने नेत्रावती स्नान घाट के पास पहले संदिग्ध स्थल पर खोदाई शुरू की। 8 फीट गहरा और 15 फीट चौड़ा गड्ढा खोदा गया, लेकिन कोई कंकाल नहीं मिला। जगह को दोबारा भर दिया गया।

29-30 जुलाई 2025: साइट 2, 3, 4 और 5 की जांच

  • SIT ने साइट नंबर 2, 3, 4, और 5 पर खोदाई की। भारी बारिश और जंगल की मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद, मजदूरों ने काम जारी रखा।
  • इन स्थलों पर भी कोई मानव अवशेष नहीं मिले।

31 जुलाई 2025: साइट 6 पर बड़ी सफलता

  • तीसरे दिन, SIT को साइट नंबर 6 पर 4 फीट गहराई में आंशिक मानव कंकाल मिले।
  • खोदाई में मिनी अर्थमूवर, वाटर पंप, और प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल किया गया ताकि बारिश से बचाव हो।
  • अवशेषों को फोरेंसिक लैब (FSL) विश्लेषण के लिए भेजा गया। शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद था।
  • बरामद सामग्री में एक पैन कार्ड और दो एटीएम कार्ड (एक पुरुष के नाम और एक 'लक्ष्मी' के नाम) शामिल हैं, जो जांच में नया मोड़ ला सकते हैं।

शिकायतकर्ता का दावा: क्या है सच?

  • शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे 1998-2014 के बीच धर्मस्थल में सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया।
  • उसने दावा किया कि शवों पर यौन उत्पीड़न और हिंसक चोटों के निशान थे, और कई शव बिना कपड़ों के थे।
  • शिकायतकर्ता ने 15 दफन स्थल चिह्नित किए, जिनमें से 13 की जांच चल रही है। एक अतिरिक्त स्थल की भी बात है, जहां सबसे ज्यादा शव दफन होने का दावा है।


SIT की जांच और चुनौतियां

  • SIT ने नेत्रावती नदी के किनारे जंगल में 13 संदिग्ध स्थलों की पहचान की, जो आरक्षित वन क्षेत्र में हैं।
  • भारी बारिश और संकरे रास्तों के कारण खुदाई में जेसीबी मशीन का सीमित इस्तेमाल हुआ। ज्यादातर काम मैन्युअल करना पड़ा।
  • शिकायतकर्ता को गवाह संरक्षण योजना के तहत सुरक्षा दी गई है। उसकी पहचान गोपनीय रखने के लिए मास्क और सूट पहनाकर जांच स्थल पर ले जाया जाता है।
  • SIT ने मंगलुरु में हेल्पलाइन (0824-2005301, 8277986369) और ईमेल ([email protected]) जारी किया है, ताकि लोग जानकारी साझा कर सकें।

धर्मस्थल और सौजन्या कांड का कनेक्शन

यह मामला 2012 के सौजन्या बलात्कार और हत्या केस से भी जुड़ा है। सौजन्या की मां कुसुमावती ने SIT से इस मामले को भी जांच में शामिल करने की मांग की। 1986 में पद्मलता और अन्य लापता मामलों ने भी स्थानीय लोगों में गुस्सा भड़काया है। नागरिक समाज और सौजन्या न्याय समिति ने पुराने केस दोबारा खोलने की मांग की है।

SIT प्रमुख पर सवाल और गृह मंत्री का बयान

  • अफवाहें हैं कि SIT प्रमुख प्रणब मोहंती को केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति के कारण हटाया जा सकता है।
  • गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा, "कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हम सिर्फ सच सामने लाना चाहते हैं। इसमें कोई राजनीति नहीं है।" उन्होंने जांच को पारदर्शी बताया और कहा कि SIT की रिपोर्ट के बाद ही तथ्य सामने आएंगे।

क्या होगा आगे?

SIT की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। कंकाल अवशेषों की फोरेंसिक जांच से मृत्यु का कारण, पहचान, और लापता लोगों से संबंध का पता चल सकता है। अनन्या भट जैसे लापता मामलों के परिवारों को उम्मीद है कि यह जांच उनके सवालों का जवाब देगी। धर्मस्थल, जो कर्नाटक का पवित्र तीर्थस्थल है, अब सवालों के घेरे में है। क्या यह कांड दशकों पुराने अपराधों का पर्दाफाश करेगा, या रहस्य और गहरा होगा?

आपके मुताबिक, इस मामले का सच क्या है? कमेंट्स में अपनी राय दें!

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