चंद्रयान-3: चांद पर काम खत्‍म होने के 14 दिनों के बाद विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर का क्या होगा?

Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (ISRO) चंद्रयान-3 को चांद के साउथ पोल पर उतार चुका है। चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर उतारने से पहले के 20 मिनट बहुत ही डराने वाला पल था। वैज्ञानिक अपनी सांसे थामे हुए थे, आखिरकार उन्‍हें वो ऐतिहसाहिक कामयाबी मिली जिसके लिए भारत पिछले 15 साल से इंतजार कर रहा था और एक के एक बाद प्रयास कर रहा था।

Chandrayaan-3

चांद की जमीन पर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की सफल और सेफ लैंडिग के कुछ ही समय बाद लैंडर में मौजूद प्रज्ञान रोवर भी सफलता पूर्वक बाहर निकला और चांद के साउथ पोल की यात्रा शुरू कर दी। प्रज्ञान रोवन चंद्रमा पर 14 दिनों (एक चंद्रदिवस) तक धरती पर बैठे दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए चांद की सतह से पर्याप्‍त डेटा एकत्र करेगा और वहां के कई रहस्‍य खोजेगा। ऐसे में ये जानना रुचिकर होगा कि प्रज्ञान रोवर कैसे 14 दिन पर कैसे काम करेगा उसके सामने क्‍या चुनौतियां होगी? इसके साथ ही जानिए 14 दिनों के बाद विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर का क्या होगा?

चांद पर ये 14 दिन बेहद अहम क्‍यों हैं?

बता दें प्रज्ञान रोवर 23 अगस्‍त को विक्रम लैंडर से अलग होते ही चांद पर वॉक पर निकलकर अपना काम करने में जुट चुका है। इसरो ने दुनिया के साथ मैसेज शेयर किया "भारत चंद्रमा पर सैर कर रहा है"। याद रहे प्रज्ञान रोवर जो चंद्रयान-3 मिशन का सबसे अहम हिस्‍सा है उसके लिए चांद पर ये 14 दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रज्ञान रोवर सौर ऊर्जा से चलता है और ये ही 15 दिन ऐसे होंगे जिस समय चंद्रमा की सतह (lunar surface) पर 'सूरज की रोशनी' (sunlight cycle) सबसे अधिक होती है। इस समय के बाद प्रज्ञान रोवर की गति धीमी हो जाएगी क्‍योंकि उसे चलने के लिए सौर्य ऊर्जा नहीं मिल पाएगी।

विक्रम, प्रज्ञान के पास चंद्रमा पर कितना समय है?

चंद्रमा का एक दिन जिसे चंद्र दिवस कहते है, वो धरती के 14 दिन के बराबर होता है। ऐसे में चंद्रमा पर रात होने से पहले विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के 14 दिन होंगे। सरल भाषा में समझे तो 14 पृथ्वी दिनों के बाद चंद्रमा पर एक रात होगी। चंद्रमा पर रात होने पर रोवर काम नहीं कर सकेगा क्योंकि वहां कोई उसे रात होने पर सूर्य ऊर्जा नहीं मिलेगी।

विक्रम, रोवर के लिए क्‍या होगी चुनौती

चांद की रात बहुत ही खतरनाक और विनाशकारी होती है जब 208 डिग्री फ़ारेनहाइट या -133 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। ऐसे समय में रोवर, लैंडर और पेलोड को वहां पर गंभीर परेशानी होने की संभावना होगी, हालांकि तब तक चंद्रयान मिशन के अहम 14 दिन बीत चुके होंगे।

रोवर के साथ क्‍या विक्रम लैंडर भी 14 दिन काम करेगा ?

चांद की सतह पर वॉक करत सयम रोवर लैंडर के संपर्क में रहेगा और रोवर जो डेटा एकत्र करेगा उसे वो इसरो के मिशन कमांड सेंटर में भेजेगा जिसका पूरी दुनिया इंतजार कर रही है। इस दौरान इसरो के वैज्ञानिकों का प्रज्ञान रोवर से कोई सीधा संबंध नहीं होगा वो विक्रम लैंडर के जरिए ही रोवर का भेजा हुआ डाटा एकत्र कर पाएगा। यानी चांद की सतह पर रोवर को अपने पेट के अंदर रखकर चांद पर लैंड करने वाला विक्रम पूरे 14 दिनों तक बेहद अहम है।

चंद्रयान -3 मिशन पूरा होने के बाद विक्रम और रोवर का क्या होता है?

14 दिन बाद जब विक्रम लैंडर ओर रोवर अपना काम पूरा कर लेंगे इसके बाद इनका क्‍या होगा। जैसा की पहले बताया कि चंद्रमा पर रात होने पर ये काम नहीं कर पाएंगे। इस अवधि के बाद इसरो की इन्‍हें पुर्नजीवित करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि इसरो उम्‍मीद हे कि चांद के दक्षिणी पोल पर जाने वाले ये भारत का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर चांद पर लंबी खतरनाक रात तक जीवित रहेंगे और फिर से शुरू होंगे। अगर ऐसे होता है तो ये भारत के लिए किसी सोने पर सुहागा से कम नहीं होगा।

इसरो के पास था बैकअप प्‍लॉन भी

बता दें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ये चंद्रयान-3 की लैंडिंग की तारीख ये सब ध्‍यान में रखकर ही तय की ही है। जिसकी बदौलत धरती से 400,000 किमी दूर 1,752 किलोग्राम वजनी विक्रम लैंडर (अंदर प्रज्ञान रोवर के साथ) को उतारने में इसरो के वैज्ञानकों को मदद मिली। इतना ही नहीं अगर 23 अगस्‍त को व्रिकम लैंडर नही उतार पाते तो इसरो के पास अन्‍य दो तारीखों का बैकअप प्‍लॉन था।

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