ISRO चेयरमैन के K Sivan की जानिए उपलब्धियां, जो मोदी से गले लगकर रो पड़े

बेंगलुरु। इंडियन स्‍पेस एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चीफ के सिवन शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने के बाद अपने आंसूओं को नहीं रोक पाए। चंद्रयान-2 वह सपना था जिसे सिर्फ इसरो और देश ने नहीं बल्कि इसके मुखिया के सिवन ने अपनी आंखों में संजोया था। एक कुशल नेतृत्‍वकर्ता की तरह वह पिछले एक साल से अपनी पूरी टीम को इस सपने को पूरा करने की दिशा में उनका उत्‍साहवर्धन करते आ रहे थे। के सिवन कई रातों से सो नहीं पा रहे थे और अपने सपने के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। जब शनिवार को सपना टूटा तो वह खुद को रोक नहीं सके। आइए आपको बताते हैं कि इस 'मामूली' असफलता के बाद भी इसरो चीफ युवाओं के आदर्श बनकर उभरे हैं और उनकी हर बात को लोग ढूढ़-ढूढ़ कर पढ़ रहे हैं।

मजबूत इच्‍छाशाक्ति वाले सिवन

मजबूत इच्‍छाशाक्ति वाले सिवन

सिवन की पीएम मोदी से गले लगते और फफक फफक कर रोने की तस्‍वीरों से आप भी इमोशनल हो गए होंगे लेकिन वह खुद यह बात मानते हैं कि जिंदगी में अहम और बड़ी शिक्षाएं तभी हासिल होती हैं जब योजनाएं असफल हो जाती हैं। इसरो के चेयरमैन ने एक बार कहा था, 'स्‍पेस मिशन बहुत ही जटिल होते हैं और बाकी मिशन से एकदम अलग होते हैं। वैज्ञानिकों को कई बार एक अति सख्‍त माहौल में काम करना पड़ता है। हमारे पूर्वजों ने हमेशा बताया है कि असफलताओं के बाद आप कैसे एक सकारात्‍मक सोच के साथ चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।' सिवन ने जनवरी 2018 में इसरो चीफ का जिम्‍मा संभाला था।

ग्रेजुएशन करने वाले पहले व्‍यक्ति

ग्रेजुएशन करने वाले पहले व्‍यक्ति

जो लोग इसरो चीफ को जानते हैं, उन्‍हें यह भी मालूम है कि वह इस पद पर पहुंचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए इंसान हैं। शायद यह सीख उन्‍हें विरासत में अपने माता-पिता से मिली। के सिवन का जन्‍म तमिलनाडु राज्‍य के कन्‍याकुमार जिले में आने वाले छोटे से गांव साराकक्‍लाविलाई में 14 अप्रैल 1957 को हुआ था। उनके पिता एक किसान थे लेकिन उन्‍होंने अपने बेटे को हमेशा शिक्षा की अहमियत के बारे में बताया। शायद इसका नतीजा था कि के सिवन अपने परिवार में पहले ऐसे व्‍यक्ति बने जिसके पास ग्रेजुएशन की डिग्री आई।

गांव में मिली पांचवीं तक की शिक्षा

गांव में मिली पांचवीं तक की शिक्षा

अपने गांव में पांचवीं तक की शिक्षा हासिल करने के बाद के सिवन ने पड़ोसी जिलने वालानकुमाराविलाई से स्‍कूल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद नागेक्‍वाइल के एसटी हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की। के सिवन ने इसके बाद सन् 1980 में मद्रास आईआईटी में एडमिशन लिया और यहां से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। फिर सन् 1982 में वह बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस पहुंचे और यहां से एरोस्‍पेस इंजीनियरिंग में मास्‍टर्स किया। मास्‍टर्स तक पढ़ाई करने के बाद उन्‍होंने आईआईटी बॉम्‍बे से साल 2006 में एरोस्‍पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री ली। सिवन 104 सैटेलाइट को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने में भी इसरो की मदद कर चुके हैं।

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    अपनी पसंद का कॉलेज नहीं मिला

    अपनी पसंद का कॉलेज नहीं मिला

    पीएचडी करने के बाद वह इसरो के पोलर सैटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल प्रोजेक्‍ट यानी पीएसएलवी से जुड़े। यहां पर उन्‍होंने मिशन की प्‍लानिंग, इसकी डिजाइन, इंटीग्रेशन और इसकी एनालिसिस में अपना योगदान दिया। इसरो के मुखिया बनने से पहले उन्‍होंने इसरो में कई प्रोजेक्‍ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया। कुछ माह पहले इसरो चीफ छात्रों से बात कर रहे थे और यहां पर उन्‍होंने छात्रों का अलग तरह से उत्‍साह बढ़ाया। सिवन ने यहां पर छात्रों को बताया, 'कॉलेज हो या करियर, मुझे हमेशा ही मेरी पहली पसंद नहीं हासिल हो सकी। हाई स्‍कूल के बाद मैं इंजीनियरिंग पढ़ना चाहता था लेकिन मैथमैटिक्‍स में बीएससी करनी पड़ी।'

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