CGPSC 2024 टॉपर देवेश साहू की अनकही सफलता: रोज 6 घंटे की तैयारी, जानिए कैसे AI नोट्स ने बदल दी किस्मत
MP News: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2024 के परिणाम ने एक बार फिर दुर्ग जिले का नाम रोशन कर दिया। राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल करने वाले देवेश साहू (25 वर्ष) ने अपनी सफलता का राज खोला तो हर कोई हैरान रह गया।
देवेश ने कहा, "इसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्व निरंतरता थी। मेरी तैयारी कभी भी छह घंटे से कम नहीं होती थी। कभी-कभी 12-14 घंटे भी लग जाते थे। लेकिन सबसे बड़ा गेम-चेंजर रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल।"

देवेश ने बताया कि पहले जहां घंटों किताबों और अखबारों से जानकारी इकट्ठा करनी पड़ती थी, फिर उसे फ़िल्टर करना पड़ता था, अब AI टूल्स ने यह काम मिनटों में कर दिया। "ChatGPT, Grok, Perplexity जैसे टूल्स ने मुझे फ़िल्टर की गई, सटीक और अपडेटेड जानकारी दी। मैं एक टॉपिक डालता था, और 2 मिनट में पूरा संक्षिप्त नोट्स तैयार हो जाता था। इससे मैंने समय बचाया और रिवीजन पर फोकस किया," देवेश ने मुस्कुराते हुए कहा। उन्होंने AI का इस्तेमाल खासकर करेंट अफेयर्स, छत्तीसगढ़ GK और नीतिगत मुद्दों के लिए किया।
माता-पिता ही असली गुरु
देवेश के पिता रिटायर्ड बैंक मैनेजर और मां गृहिणी हैं। उन्होंने बताया, "मेरे माता-पिता ने सबसे बड़ा योगदान दिया। पापा रोज सुबह 4 बजे उठकर मेरे लिए छत्तीसगढ़ GK के सवाल तैयार करते थे। मम्मी खाना बनाते समय भी रेडियो पर न्यूज़ सुनाती थीं और बाद में उस पर डिस्कस करती थीं। घर में मेरा एक अलग कमरा था, जहां कोई डिस्टर्ब नहीं करता था।"
देवेश ने 2022 में बीटेक (कंप्यूटर साइंस) पूरा किया और उसी साल से तैयारी शुरू कर दी। यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था। पहले दो प्रयासों में प्रीलीम्स क्लियर किया, लेकिन मेन्स में रह गए। इस बार उन्होंने स्ट्रैटेजी बदली - ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन चुना और AI की मदद से रोज 100+ करेंट अफेयर्स क्वेश्चन सॉल्व किए।
"सेवा की भावना पहले, पद बाद में"
सफलता के बाद जब उनसे पूछा गया कि IAS बनने के बाद क्या करेंगे, तो देवेश ने गंभीर स्वर में कहा, "इन सेवाओं में शामिल होने से पहले आपके अंदर सेवा की भावना होनी चाहिए। अगर हम प्रशासनिक सेवा में आते हैं तो सिर्फ कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए। मैं छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में काम करना चाहता हूं, जहां आज भी बिजली-पानी की मूल सुविधाएं नहीं हैं।"
देवेश की सफलता की खबर जैसे ही दुर्ग पहुंची, उनके मोहल्ले में बधाइयों का तांता लग गया। स्थानीय कोचिंग संचालक कहते हैं, "देवेश ने साबित कर दिया कि टेक्नोलॉजी और मेहनत का सही मेल कितना खतरनाक हो सकता है। आज के बच्चे AI को सिर्फ रील्स बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन देवेश ने इसे हथियार बनाया।"
देवेश के टॉप 5 टिप्स
- रोज कम से कम 6 घंटे पढ़ाई, बिना छुट्टी के
- AI टूल्स से करेंट अफेयर्स और नोट्स बनाएं
- मॉक इंटरव्यू जरूर दें - आत्मविश्वास बढ़ता है
- छत्तीसगढ़ GK को कभी नजरअंदाज न करें
- परिवार का सहयोग सबसे बड़ा मोटिवेशन है
आज दुर्ग का यह लड़का न सिर्फ टॉपर बना, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल बन गया - कि मेहनत, टेक्नोलॉजी और सेवा भावना का कॉकटेल कितना ताकतवर होता है।












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