Cyber crime Registry: भारत की बड़ी कामयाबी! सिर्फ 90 दिनों में साइबर जालसाजों से 1,800 करोड़ की बचत
Cyber Crime Registry: पिछले तीन महीनों में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन 'संदिग्ध रजिस्ट्र्री' ने साइबर अपराधों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। इस रजिस्ट्र्री की मदद से 6 लाख फर्जी लेन-देन को रोका गया है, जिससे देश को ₹1,800 करोड़ की बड़ी बचत हुई है।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह रजिस्ट्र्री साइबर अपराधियों से जुड़े वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 'संदिग्ध रजिस्ट्र्री' को 10 सितंबर 2023 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लॉन्च किया था।

यह रजिस्ट्र्री राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर आधारित है और इसमें अब तक 14 लाख से अधिक साइबर अपराधियों का डेटा संग्रहीत है। इसका उद्देश्य न केवल वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना है, बल्कि देश की वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाना भी है।
ये भी पढ़ें: naukri.com पर सर्च की नौकरी, साइबर फ्रॉड ने बेरोजगार से ऐसे ठगे लाखों रुपए, जानिए क्या है पूरा खेल
क्या है संदिग्ध रजिस्ट्र्री?
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आधार पर बनाई गई यह रजिस्ट्र्री 14 लाख साइबर अपराधियों का डेटा रखती है, जिनका संबंध वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों से है।
यह रजिस्ट्र्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 10 सितंबर को लॉन्च की गई थी। इसे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने विकसित किया है और इसका उपयोग राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय जांच व खुफिया एजेंसियों द्वारा किया जा सकता है।
कैसे काम करती है रजिस्ट्र्री?
यह रजिस्ट्र्री बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से तैयार की गई है और इसमें साइबर अपराधियों का समेकित डेटा उपलब्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की वित्तीय प्रणाली में धोखाधड़ी को रोकने और जोखिम प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाना है।
अब तक क्या-क्या हुआ फायदा?
₹1,800 करोड़ की बचत: 10 सितंबर से 1 दिसंबर तक 6.10 लाख फर्जी लेन-देन को रोका गया।
फ्रॉड खातों पर कार्रवाई: 8.67 लाख 'म्यूल अकाउंट' बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा फ्रीज किए गए।
सिम और मोबाइल ब्लॉक: 7 लाख सिम कार्ड और 1.4 लाख मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए।
साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC)
10 सितंबर को 'साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर' (CFMC) भी लॉन्च किया गया, जिसमें देश के प्रमुख बैंक, वित्तीय संस्थान, सभी चार टेलीकॉम सेवा प्रदाता और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर ऑनलाइन वित्तीय अपराधों पर तत्काल कार्रवाई के लिए काम कर रही हैं। यह "सहकारी संघवाद" का उदाहरण है।
पुरानी पहल और उनके नतीजे
2021 में शुरू हुए 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड्स रिपोर्टिंग और मैनेजमेंट सिस्टम' के तहत अब तक 11.51 लाख शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके माध्यम से ₹3,850 करोड़ के फर्जी वित्तीय लेन-देन को रोका गया है। सरकार की यह पहल साइबर अपराधों के खिलाफ मजबूत कदम उठाने और देश की वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
ये भी पढ़ें: गुजरात पुलिस ने 17 लाख के साइबर फ्रॉड के मामले में रूसी नागरिक को किया गिरफ्तार, चीनी नागरिक चला रहा था गिरोह












Click it and Unblock the Notifications