केंद्र सरकार ने कुश्ती फेडरेशन की सभी गतिविधियों को किया स्थगित
पहलवान विवाद के बीच केंद्र सरकार ने कुश्ती फेडरेशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कुश्ती फेडरेशन की सभी गतिविधियों को स्थगित कर दिया है।

कुश्ती फेडरेशन के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से कुछ पहलवान आंदोलन कर रहे थे। इस बीच केंद्र सरकार ने कुश्ती फेडरेशन को लेकर कई कड़े एक्शन लिए हैं। केंद्र सरकार ने कुश्ती फेडरेशन की सभी गतिविधियों को तब तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है जब तक कि ओवरसाइट कमेटी औपचारिक रूप से नियुक्त नहीं होती। इसमें चल रही रैंकिंग प्रतियोगिता का निलंबन और चल रही गतिविधियों के लिए प्रतिभागियों से लिए गए प्रवेश शुल्क की वापसी शामिल है।
यह घोषणा 20 जनवरी, 2023 को सरकार द्वारा एक निगरानी समिति नियुक्त करने के फैसले के बाद की गई है। जो डब्ल्यूएफआई की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को संभालेगी। डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के तुरंत बाद केंद्र सरकार की ओर से यह फैसला आया है। निलंबित डब्ल्यूएफआई अधिकारी विनोद तोमर ने अपने निलंबन के संबंध में किसी भी संचार से इनकार किया है।
तोमर ने कहा कि, मुझे इस बारे में पता नहीं है। मुझे एएनआई के एक कॉल से ही पता चला कि मुझे सस्पेंड कर दिया गया है। इस बारे में मुझे पहले से कोई जानकारी नहीं मिली है। मैंने कुछ गलत नहीं किया है। विनोद तोमर ने शनिवार शाम ही बृजभूषण शरण सिंह के पक्ष में बयान देते हुए कहा था कि फेडरेशन के ज्यादातर लोग बृजभूषण शरण सिंह के साथ हैं और व्यक्तिगत तौर पर भी मुझे खिलाड़ियों के आरोप सही नहीं लगते हैं।
तोमर ने कहा कि जो पहलवानों दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे है और डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है।
भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर लगे यौन आरोपों के बीच कल संघ की बैठक होनी है। बैठक में जनरल काउंसिल के 54 सदस्य भाग लेंगे।वहीं, खुद आरोपों से घिरे बृज भूषण सिंह बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैठक खत्म होने के बाद वह अपना पक्ष रखने आ सकते हैं।












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