केंद्र ने SC में दायर किया 375 पेज का हलफनामा, बताया ब्लैक फंगस से निपटने का प्लान
नई दिल्ली, 27 जून। कोरोना वायरस महामारी के बीच मरीजों में मिल रहे फंगस के मामलों ने केंद्र और राज्य सरकारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बीच केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि दुनियाभर में चलाए जा रहे भारतीय अभियानों के माध्यम से कोविड संबंधित म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस) की बीमारी के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन जैसी दवाओं या इसके अतरिक्त वैकल्पिक दवाओं की सोर्सिंग के लिए 'युद्धस्तर' पर काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि कैसे वह ब्लैक फंगस से निपटने की तैयारी कर रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते शनिवार सुप्रीम कोर्ट में दायर 375 पन्नों के एक हलफनामे में म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस) के लिए दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में न्यायालय को अवगत कराया। हलफनामे में कहा गया कि अगस्त में घरेलू निर्माताओं द्वारा एल-एम्फोटेरिसिन बी का अनुमानित उत्पादन 5.525 लाख यूनिट इंजेक्शन होने की संभावना है। राज्यों को उनके द्वारा रिपोर्ट किए गए फंगस के मामलों के आधार पर दवाएं दी जाती हैं।
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एम्फोटेरिसिन जैसी दवाओं की घरेलू उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने के अलावा, सरकार ने कहा कि दवा के उपयोग पर भी गाइडलाइन जारी किया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निजी और सरकारी अस्पतालों को आवंटन के लिए पारदर्शी व्यवस्था अपनाने के लिए कहा गया है। "एम्फोटेरिसिन दवा घरेलू उत्पादन और आयात दोनों के माध्यम से उपलब्ध है, इसके अलावा दोनों ही कामों में तेजी लाई गई है। मई और जून 2021 में पहली बार मांग में वृद्धि से निपटने के लिए क्षमता और आपूर्ति को बहुत ही कम समय में कई गुना बढ़ाना पड़ा है। इसके अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बनाए गए पोर्टल से म्यूकोर्मिकोसिस के रोगी डेटा का उपयोग, राज्यों में समान वितरण को सक्षम करने के लिए एक अंतरिम उपाय के रूप में आवंटन किया जा रहा है।












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