सेलिब्रिटिज के लिए बुरी खबर, विज्ञापनों में लंबे-चौड़े झूठे वादे करने पर हो सकती है जेल
नई दिल्ली: विज्ञापनों में गलत जानकारी देने पर मैन्युफैक्चरर्स, सर्विस प्रोवाइडर और उस विज्ञापन को एंडोर्स करने वाले सेलिब्रिटीज को सजा हो सकती है। मंगलवार को लोकसभा में इसे लेकर बिल पारित किया गया। इसमें भ्रामक दावे करने पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2019 में प्रावधान रखा गया है कि कोई भी विज्ञापन चाहे वो- प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, आउटडोर, ई-कॉमर्स, डायरेक्ट सेलिंग या टेलीमार्केटिंग किसी भी माध्यम से किया जा रहा हो, अगर इसमें गलत जानकारी दी जाएगी तो ये अपराध की श्रेणी में आएगा।

ये बिल अभी तक कानून नहीं बना है। अभी विज्ञापनों पर नियंत्रण रखने के लिए 'एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया' बनी है। ये बिल उससे अलग है। इस बिल में ऐसे विज्ञापन या मिसलीडिंग विज्ञापन को ऐसे परिभाषित किया गया है, जिसमें किसी भी प्रॉडक्ट या सर्विस की झूठी जानकारी देना, झूठी गारंटी देना, कंज्यूमर्स को प्रॉडक्ट के नेचर, सब्सटेंस, क्वांटिटी या क्वालिटी को लेकर फुसलाना या जानबूझकर सर्विस प्रोवाइडर या मैन्युफैक्चरर की ओर से कोई जानकारी छुपाई जाए।
केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त मुख्य आयुक्त की अध्यक्षता में एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना दिल्ली में की जाएगी। ये प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और झूठे या भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामले को देखेगी। दोषी पाये जाने पर मैन्युफैक्चरर्स और सर्विस प्रोवाइडर को दस लाख के जुर्माने के साथ अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है। भ्रामक विज्ञापनों का प्रचार करने वाले सेलिब्रिटी पर।10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार बार अपराध दोहराने पर प्राझिकरण 50 लाख के जुर्माना और 5 साल की सजा सुना सकता है। वो सेलिब्रेटी को एक साल किसी भी विज्ञापन का प्रचार करने से रोक सकता है। इसे दोहराने पर इसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।












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