दक्षिणेश्वर मंदिर के बाहर लगे 'Go Back Gyanesh Kumar' के नारे, CEC के होटल स्टे पर TMC ने क्यों काटा बवाल?
CEC Gyanesh Kumar: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के मिशन पर निकले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
मंगलवार, 10 मार्च को जब वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर और 'गो बैक' के नारों के साथ उनका विरोध किया। यह तनावपूर्ण स्थिति राज्य की मतदाता सूची में करीब 61 लाख नामों के बड़े बदलाव को लेकर विवाद के वजह से पैदा हुई है। चुनाव आयोग की टीम की इस सक्रियता ने सत्ताधारी दल और आयोग के बीच टकराव को और स्पष्ट कर दिया है, जिससे चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया है।

दक्षिणेश्वर और कालीघाट में विरोध के बीच पूजा-अर्चना
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी बंगाल के दौरे पर हैं। मंगलवार को दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन के बाद ज्ञानेश कुमार ने कहा, "चुनाव आयोग का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में बिना किसी हिंसा और दबाव के चुनाव संपन्न कराना है। हम इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
ये भी पढ़ें: West Bengal SIR: 'क्या सुप्रीम कोर्ट के पास सिर्फ बंगाल के ही केस हैं' SIR मामले पर क्यों भड़के CJI?
इससे पहले सोमवार को कालीघाट मंदिर के बाहर भी उन्हें इसी तरह के कड़े विरोध और काले झंडों का सामना करना पड़ा था। सुरक्षाबलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
West Bengal SIR Controversy: मतदाता सूची पर क्यों मचा है बवाल?
TMC के विरोध की मुख्य जड़ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया है। चुनाव आयोग द्वारा 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार:
- कुल मतदाताओं की कमी: राज्य में मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 से घटकर अब 7,04,59,284 रह गई है।
- हटाए गए नाम: फॉर्म-7 के जरिए लगभग 5,46,053 नाम हटाए गए हैं।
- जांच के घेरे में: करीब 60,06,675 मतदाताओं के नाम अभी भी जांच के दायरे में हैं।
अभिषेक बनर्जी के तीखे सवाल और आरोप
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस दौरे और SIR प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुई मौतों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग का रवैया "तुगलकी" है। अभिषेक ने ज्ञानेश कुमार के उस होटल में ठहरने पर भी सवाल उठाए, जहां अक्सर भाजपा के बड़े नेता रुकते हैं।
सुरक्षा और तैयारियों की समीक्षा
चुनाव आयोग की टीम लगातार राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकें कर रही है। आयोग का पूरा ध्यान इस बार चुनाव पूर्व हिंसा को रोकने और मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने पर है। हालांकि, जिस तरह से मंदिर के बाहर और राजनीतिक गलियारों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी जंग और भी आक्रामक होने वाली है।
With AI Inputs
ये भी पढ़ें: West Bengal Election 2026: 1-2 फेज में वोटिंग, बूथ से हटे ममता के पुलिस, बंगाल चुनाव पर BJP की EC से मांगें












Click it and Unblock the Notifications