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Defence Budget 2026: मोदी राज का 'महा-बजट', 10 साल में 3 गुना बढ़ी ताकत, 2014 से अब तक कितने अरब खर्च

India Defence Budget 2026: भारत की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और सीमाओं पर बढ़ते तनाव ने देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। पिछले एक दशक का विश्लेषण करें तो भारत का रक्षा बजट महज वित्तीय आवंटन न रहकर एक सशक्त रणनीतिक हथियार बनकर उभरा है।

2015-16 के ₹2.46 लाख करोड़ से लेकर 2025-26 में ₹6.81 लाख करोड़ के पार पहुँचने तक का यह सफर सैन्य आधुनिकीकरण और 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह ढाई गुना वृद्धि न केवल चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से जुड़ी चुनौतियों का जवाब है, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात में भारत को एक 'हब' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

India Defence Budget 2026
(AI Image)

Defence Budget 2013 to 2026: 10 साल में 3 गुना से ज्यादा का उछाल

  • 2025-26: ₹6.81 लाख करोड़ (ऐतिहासिक उच्च स्तर)
  • 2024-25: ₹6.21 लाख करोड़
  • 2023-24: ₹5.93 लाख करोड़
  • 2022-23: ₹5.25 लाख करोड़
  • 2021-22: ₹4.78 लाख करोड़
  • 2020-21: ₹4.71 लाख करोड़
  • 2019-20: ₹4.31 लाख करोड़
  • 2018-19: ₹4.04 लाख करोड़
  • 2017-18: ₹3.59 लाख करोड़
  • 2016-17: ₹2.58 लाख करोड़
  • 2015-16: ₹2.46 लाख करोड़
  • 2014-15: ₹2.29 लाख करोड़ (मोदी सरकार का प्रथम बजट)
  • 2013-14: ₹2.03 लाख करोड़ (कांग्रेस सरकार)

एक दशक में रक्षा बजट की छलांग

साल 2015-16 से लेकर 2025-26 के बीच भारत ने रक्षा खर्च में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। 2.46 लाख करोड़ से शुरू हुआ यह सफर अब 6.81 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, 2020 के बाद से बजट में तेजी से इजाफा हुआ, जिसका मुख्य कारण चीन के साथ एलएसी (LAC) पर बढ़ा तनाव और सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की जरूरत थी। हर साल औसतन 10-12% की यह वृद्धि भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाले देशों की सूची में शीर्ष पर बनाए हुए है।

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सैन्य आधुनिकीकरण पर ज्यादा खर्च

बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'कैपिटल आउटले' (Capital Outlay) यानी पूंजीगत व्यय है। यह वह पैसा है जो नए राफेल विमान, युद्धपोत, मिसाइल सिस्टम और घातक ड्रोन खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इस मद में बड़ी राशि आवंटित की है ताकि सेना की मारक क्षमता को आधुनिक युद्ध के अनुकूल बनाया जा सके। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ी है, बल्कि पुराने पड़ चुके सैन्य उपकरणों को बदलने की प्रक्रिया में भी तेजी आई है।

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स्वदेशी निर्माण पर जोर

रक्षा बजट में बढ़ोतरी का एक बड़ा फायदा घरेलू रक्षा उद्योगों को मिल रहा है। सरकार अब बजट का एक बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों से हथियार खरीदने के लिए सुरक्षित रखती है। इससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और डीआरडीओ (DRDO) जैसी संस्थाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। 'मेक इन इंडिया' के तहत अब भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि रक्षा निर्यात (Defence Export) में भी नए रिकॉर्ड बना रहा है।

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पेंशन और ऑपरेशनल तैयारियों पर खर्च

कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और सेना के रखरखाव (Maintenance) पर भी खर्च होता है। 'वन रैंक वन पेंशन' (OROP) लागू होने के बाद पेंशन बिल में काफी वृद्धि हुई है, जो बजट का एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, सीमा पर तैनात जवानों के लिए रसद, ईंधान और दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (सड़कें और सुरंगें) के निर्माण पर भी भारी निवेश किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में सेना की पहुंच तेज और आसान हो सके।

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