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आजादी के वक्त लक्षद्वीप नहीं था भारत का हिस्सा, जानिए कैसे पकिस्तान को चकमा दे किया देश में शामिल

भारत-मालदीव विवाद इस वक्त चर्चाओं में बना हुआ है। इस विवाद के बीच लक्षद्वीप का जिक्र भी लगातार हो रहा है। पीएम मोदी सहित तमाम सेलिब्रिटीज भारतीय आइलैंड को प्रमोट कर रहे हैं। एक्स्प्लोर इंडियन आइलैंड ट्रेंड में बना हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये द्वीप शुरू से भारत का हिंसा नहीं था।

आजादी के वक्त इसे भारत में शामिल नहीं किया गया था। बड़े प्रांतों, जैसे पंजाब, सिंध जैसे जगहों पर दोनों राष्ट्रों की नजर बनी हुई थी। लेकिन इस छोटे द्वीप पर किसी का ध्यान नहीं गया था। इस आइलैंड पर ना भारत ना पाकिस्तान, किसी ने कब्जा नहीं जमाया था। आइए आज आपको लक्षद्वीप के भारत में शामिल होने की कहानी आपको बताते हैं।

Lakshadweep

लक्षद्वीप छोटे-छोटे 36 टापुओं का एक समूह है। इसका कुल क्षेत्रफल 32.62 वर्ग किमी का है जो कई शहरों से कम है। यहां की कुल आबादी करीब 70 हजार के करीब है। इसकी कुल आबादी का 96 फीसदी मुस्लिम हैं। यहां साक्षरता दर का औसत काफी अधिक है। पर्यटन के लिए लिहाज से यह इलाका बहुत अच्छा और एडवेंचर के भी यहां काफी साधन मौजूद हैं।

भारत-पकिस्तान बंटवारे के दौरान लक्षद्वीप मेनलैंड का हिस्सा नहीं था। भारत के तत्कालीन गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल रियासतों को एक करने की कोशिश में जुटे थे। इसी बीच पाकिस्तान की नजर लक्षद्वीप पर पड़ी। मुस्लिम बहुत इलाका होने के कारण पकिस्तान इस पर कब्जा चाहता था।

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दोनों ही देशों की ओर से लक्षद्वीप पर दावा नहीं किया गया तो ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। आखिरकार पाकिस्तान ने लक्षद्वीप पर कब्जा करने के लिए एक युद्धपोत को रवाना कर दिया।

इधर सरदार पटेल का ध्यान भी लक्षद्वीप पर गया। वो जल्द से जल्द इस आइलैंड पर भारत का कब्जा चाहते थे। उन्होंने सेना को आदेश दिया कि जल्द से जल्द लक्षद्वीप को अपने में शामिल किया जाए। दोनों देशों की सेना लक्षद्वीप के लिए रवाना हो चुकी थीं। आखिरकार भारत की सेना पहले लक्षद्वीप पहुंची और वहां भारत का झंडा फहरा दिया। थोड़ी ही देर में पाकिस्तान की सेना भी लक्षद्वीप के करीब पहुंच गई लेकिन जैसे ही उसने भारत का झंडा देखा तो वह वापस लौट आई। और इस तरह लक्षद्वीप भारत का हिस्सा बना।

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भारत ने आधिकारिक रूप से 1 नवंबर 1956 को लक्षद्वीप को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। पहले इसका नाम लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि था, बाद में भारत ने 1 नवंबर 1973 को नया नाम लक्षद्वीप कर दिया। क्षेत्रफल कम होने के कारण इसे अलग राज्य का दर्जा नहीं दिया गया।

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