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Maldives vs Lakshadweep: भारत चाहे कुछ भी कर ले, 2024 में मालदीव को पीछे नहीं छोड़ पाएगा लक्षद्वीप..

Maldives vs Lakshadweep: मालदीव के कई उच्च अधिकारियों और वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा भारत पर अभद्र टिप्पणी करने के शोर-शराबे ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीयों ने मालदीव की छुट्टियां रद्द करनी शुरू कर दी हैं।

ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी EaseMyTrip ने मालदीव के लिए बुकिंग बंद करने का फैसला किया, जबकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई लोगों ने दावा किया है, कि उन्होंने मालदीव का अपना टिकट कैंसिल कर लिया है।

Maldives vs Lakshadweep

भले ही मालदीव सरकार डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही है और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले मंत्रियों को सस्पेंड किया गया है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है, कि मालदीव और भारत के संबंध अब पहले जैसे नहीं है। भारत के बहिष्कार का गंभीर असर मालदीव पर होने वाला है, खासकर टूरिज्म सेक्टर में।

हालांकि, इस विवाद के बीच इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, कि लक्षद्वीप इस वक्त मालदीव जैसा नहीं है, क्योंकि सालों से इस द्वीप को पर्यटन के लिए विकसित ही नहीं किया गया है और मालदीव सालों से पर्यटन के अनुकूल खुद को ढालता आया है।

लेकिन फिर भी, एक तुलना करके देखना जरूरी हो जाता है, कि मालदीव और लक्षद्वीप में कितना अंतर है और कम से कम साल 2024 में क्यों भारत लाख कोशिश कर भी ले, तब भी क्यों मालदीव को लक्षद्वीप पीछे नहीं छोड़ सकता है?

लक्षद्वीप बनाम मालदीव... फ्लाइट्स का हाल

मालदीव की राजधानी माले में एक बेहतरीन एयरपोर्ट है, जबकि लक्षद्वीप में फिलहाल एक एयरोड्रम है, और वो भी फिलहाल कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

एक विमानन विश्लेषण कंपनी, सिरिकम द्वारा साझा किए गए डेटा से पता चलता है, कि मालदीव में चालू सप्ताह में 325 अंतर्राष्ट्रीय प्रस्थान हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 35 अमीरात के हैं, उसके बाद इंडिगो, फ्लाईदुबई और कतर एयरवेज के 28-28 एयरवेज हैं। इंडिगो और फ्लाईदुबई के बीच, माले से दुबई के लिए 63 साप्ताहिक प्रस्थान हैं।

कुल मिलाकर दुनिया के 60 बड़े शहरों से मालदीव डायरेक्ट कनेक्ट है।

भारत से हर हफ्ते मालदीव के लिए 48 फ्लाइट्स हैं, जबकि भारत और मालदीव के बीच 58 उड़ाने हैं, जिनमें से 10 फ्लाइटों को मालदीव से ऑपरेट किया जाता है। हालांकि, भारतीय फ्लाइट्स की मालदीव में सीमित उपस्थिति थी, भारत की ओर से एयर इंडिया और स्पाइसजेट की उड़ानें थीं। 2018 के बाद इसमें काफी बदलाव आया, जब गो एयर ने माले के लिए उड़ानें शुरू कीं। इसके बाद इंडिगो की उड़ानों की झड़ी लग गई, जिसमें बाद में विस्तारा भी शामिल हो गई।

आज की तारीख में, एयर इंडिया माले को मुंबई और दिल्ली से जोड़ती है, जबकि सहयोगी कंपनी विस्तारा मुंबई और दिल्ली से उड़ान भरती है। इंडिगो, देश का सबसे बड़ा वाहक, बेंगलुरु (दैनिक), मुंबई (दैनिक), दिल्ली (दैनिक), कोच्चि (दैनिक) हैदराबाद (सप्ताह में तीन बार) से माले के लिए उड़ान भरता है। मालदीव माले से भारत के बेंगलुरु, त्रिवेन्द्रम और कोच्चि तक उड़ान भरता है।

लेकिन, लक्षद्वीप में भारतीय फ्लाइट्स की उपस्थिति बहुत कम रही है, इतना ही नहीं एक समय था जब एलायंस एयर ने कोच्चि से मार्ग संचालित करने के लिए 19 सीटर बी1900 को वेट लीज पर लिया था। वर्तमान में यह स्टार्टअप फ्लाई91 के साथ एटीआर 72-600 के साथ हर दिन संचालन करता है।

हालांकि, अब ऐसी उम्मीद है, कि लक्षद्वीप के लिए विमानों की संख्या में इजाफा होगा और लक्षद्वीप एक प्रीमियम टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभरेगा।

Maldives vs Lakshadweep

लक्षद्वीप में होटलों और रिसॉर्ट की कमी

मालदीव में राजधानी माले के 200 किलोमीटर के अंदर तमाम रिसॉर्ट और होटल्स मिल जाएंगे, लेकिन लक्षद्वीप में फिलहाल होटलों की काफी कमी है। वहीं, लक्षद्वीप का सबसे ज्यादा आबादी वाला द्वीप मिनिकॉय, अगत्ती से 300 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां ठहरने की व्यवस्था नहीं है।

लक्षद्वीप से काफी बड़ा है मालदीव

वहीं, आकार के मामले में मालवीद, लक्षद्वीप से 10 गुना ज्यादा बड़ा है। जिससे लक्षद्वीप में पर्यटकों के लिए घूमने के ज्यादा मौके बन जाते हैं। इसके अलावा, लक्षद्वीप की तुलना में मालदीव में कई गुना ज्यादा विदेशी पर्यटक आते हैं, जो मालदीव को काफी ज्यादा विविध बना देता है। चूंकी लक्षद्वीप के टूरिज्म को फोकस नहीं किया गया, जिससे लक्षद्वीप के लिए कम से कम इस साल मालदीव को रिप्लेस करना संभव नहीं है।

चीन का निवेश- चीन ने मालदीव के कई सेक्टर्स में काफी निवेश किया है, जिसमें सबसे ज्यादा निवेश इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ वहां के नेताओं पर भी चीन ने काफी खर्च किया है।

मालदीव ने अपने एयरपोर्ट्स के विकास के लिए मुंबई का मॉडल अपनाया है, ताकि भविष्य में एयरपोर्ट्स के विस्तार के लिए क्षेत्र की कमी ना हो।

हालांकि, लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अब कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए गये हैं, जिनमें केरला-लक्षद्वीप सर्किट शामिल है, जिसमें केरल से लक्षद्वीप तक की अविस्मरणीय यात्रा करवाई जाती है।

इसमें कोई शक नहीं, कि 2024 में लक्षद्वीप के लिए मालदीव को रेस में पीछे छोड़ना असंभव है, लेकिन अब लक्षद्वीप पीएम मोदी की ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल हो गया है और आने वाले सालों में लक्षद्वीप निश्चित तौर तक मालदीव को पीछे छोड़ सकता है।

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