कौन हैं DU के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा? जिन्हें माओवादियों से लिंक मामले में बॉम्बे HC ने किया बरी
Maoist links case: बॉम्बे हाईकोर्ट की नागुपर बेंच ने माओवादियों से कथित लिंक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के पूर्व प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा और पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। साइबाबा को मई 2014 में नक्सलियों के साथ कथित संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति एसए मेनेजेस की पीठ ने सेशन कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पूर्व प्रोफेसर को राहत दी है। गढ़चिरौली कोर्ट ने साल 2017 में प्रोफेसर साईबाबा और अन्य को दोषी करार दिया था।

बता दें कि जिन आरोपियों को हाई कोर्ट से राहत मिली है, उनमें जीएन साईबाबा, हेम मिश्रा, महेश तिर्की, विजय तिर्की, नारायण सांगलीकर, प्रशांत राही और पांडु नरोटे शामिल हैं। इसके बाद से ये सभी जेल में बंद हैं। हालांकि इन छह लोगों में से एक पांडु नरोटे की मौत हो चुकी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट राज्य की अपील पर फैसला नहीं कर लेता, तब तक प्रत्येक आरोपी को जमानत बॉन्ड के रूप में 50,000 रुपये जमा करने पर जेल से रिहा किया जा सकता है।
दोबारा क्यों हुई सुनवाई?
बता दें कि दो जजों की इस बेंच ने साईबाबा की अपील पर दोबारा सुनवाई की है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के पहले बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद साईबाबा ने दोबारा अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
दरअसल, साईबाबा और अन्य सहयोगियों द्वारा दायर अपील पर अंतिम सुनवाई 7 सितंबर 2023 को पूरी हुई थी। मगर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। इससे पहले साईबाबा ने सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरबाजा खटखटाया था।
राज्य ने फैसले पर रोक लगाने की नहीं की मांग
इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को साईबाबा को बरी कर दिया था। मगर सरकारी पक्ष ने इसके खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को निलंबित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार राज्य ने फैसले पर रोक लगाने की मांग नहीं की है।
कौन हैं जीएन साईबाबा?
आंध्र प्रदेश में जन्मे जीएन साईबाबा दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर रहे हैं। गिरफ्तारी से पहले व्हीलचेयर से चलने वाले प्रोफेसर साई बाबा दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाते थे।
साईबाबा अखिल भारतीय पीपुल्स रेजिस्टंस फोरम (AIPRF) के एक कार्यकर्ता के रूप में, कश्मीर और उत्तर पूर्व में मुक्ति आंदोलनों के के समर्थन में दलित और आदिवासी अधिकारों के लिए प्रचार करने के लिए 2 लाख किमी से अधिक की यात्रा कर चुके हैं।












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