राज्यसभा में आईटी मंत्री से बदसलूकी का मामला गरमाया, टीएमसी सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएगी बीजेपी
आज यानि गुरुवार को राज्यसभा में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ जिस तरह से टीएमसी सांसदों ने बदसलूकी की उसको लेकर भाजपा फ्रंटफुट पर आ गई है।
नई दिल्ली, 22 जुलाई। आज यानि गुरुवार को राज्यसभा में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ जिस तरह से टीएमसी सांसदों ने बदसलूकी की उसको लेकर भाजपा फ्रंटफुट पर आ गई है। बीजेपी ने टीएमसी सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का मन बना लिया है। सूत्रों के मुताबिक ऐसी जानकारी मिली है।

बता दें कि आज राज्यसभा में पेगासस मुद्दे पर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव जिस वक्त अपना बयान पढ़ रहे थे उसी दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद शांतनु सेन ने उनके हाथ से पेपर लेकर फाड़ दिया। टीएमसी सांसद के इस व्यवहार की बीजेपी ने कड़ी निंदा की। सूत्रों की मानें तो बीजेपी राज्यसभा अध्यक्ष से आईटी मंत्री से दुर्व्यवहार के लिए टीएमसी सांसद शांतनु सेन के निलंबन का अनुरोध करेगी।
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान कुछ कागज फाड़ डाले और उसके टुकड़ों को हवा में लहरा दिया। यह घटना उस वक्त हुई जब सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिये भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों और इस मामले में विपक्ष के आरोपों पर सदन में बयान दे रहे थे।
टीएमसी सांसदों के हंगामा करने के कारण दो बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। भारी हंगामे के कारण वैष्णव अपना बयान पूरा नहीं पढ़ सके और अंत में उन्होंने अपना बयान सदन के पटल पर रख दिया। उपसभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे टीएमसी सांसदों के असंसदीय व्यवहार न करने का अनुरोध किया लेकिन वह नहीं माने और आखिरकार सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
क्या है पेगासस प्रोजेक्ट मामला
बता दें कि फ्रांस की संस्था फॉरबिडेन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मिलकर खुलासा किया है कि इजरायली कंपनी NSO के स्पाईवेयर पेगासस के जरिए दुनिया भर की सरकारें पत्रकारों, कानूनविदों, नेताओं और नेताओं के रिश्तेदारों की जासूसी करा रही हैं। इस जांच को पेगासस प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। निगरानी वाली लिस्ट में 50 हजार लोगों के नाम हैं, जो पहली लिस्ट पत्रकारों की निकली हैं उसमें 40 भारतीय नाम हैं। मीडिया में इस खबर के आने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया है। इस पूरी खबर के बाद विपक्ष मोदी सरकार पर हावी हो गया है। हालांकि भारत सरकार ने किसी भी प्रकार की जारूसी से इंकार किया है।
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